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मध्य प्रदेश ने गेहूं खरीद में 100 लाख मीट्रिक टन का रिकॉर्ड तोड़ा, 13.1 लाख किसानों को ₹20,680 करोड़ का भुगतान

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मध्य प्रदेश ने गेहूं खरीद में 100 लाख मीट्रिक टन का रिकॉर्ड तोड़ा, 13.1 लाख किसानों को ₹20,680 करोड़ का भुगतान

सारांश

मध्य प्रदेश ने इस रबी सीजन में 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदकर पंजाब के बाद देश में दूसरा स्थान हासिल किया है। 13.1 लाख किसानों के खातों में ₹20,680 करोड़ सीधे ट्रांसफर हुए — और यह आँकड़ा अभी भी बढ़ रहा है।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश ने 2025-26 रबी सीजन में 100 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की MSP खरीद पूरी की।
राज्य पंजाब के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा सरकारी गेहूं खरीदार बना।
रिकॉर्ड 13.1 लाख किसानों को MSP योजना का लाभ मिला; ₹20,680 करोड़ सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर।
किसानों को प्रति क्विंटल ₹2,625 दिए जा रहे हैं — केंद्र का ₹2,585 MSP + राज्य का ₹40 बोनस।
प्रारंभिक लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन था, जिसे बाद में केंद्र ने बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन किया।
स्लॉट बुक किसानों के लिए खरीद की अंतिम तिथि 28 मई तक बढ़ाई गई।

मध्य प्रदेश ने 2025-26 रबी सीजन में गेहूं खरीद का नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए 100 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की सरकारी खरीद पूरी कर ली है। इस उपलब्धि के साथ मध्य प्रदेश, पंजाब के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं खरीदने वाला राज्य बन गया है। राज्य सरकार ने 23 मई को जारी आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी।

खरीद का दायरा और किसानों की भागीदारी

इस सीजन में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर रिकॉर्ड 13.1 लाख किसानों से गेहूं खरीदा गया है। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, यह संख्या मध्य प्रदेश को उन अग्रणी राज्यों की श्रेणी में रखती है जहाँ सर्वाधिक किसानों को MSP योजना का सीधा लाभ मिला है। राज्य सरकार ने अब तक किसानों के बैंक खातों में सीधे ₹20,680 करोड़ से अधिक की राशि हस्तांतरित कर दी है।

MSP और बोनस: किसानों को क्या मिला

किसानों को प्रति क्विंटल ₹2,625 का भुगतान किया जा रहा है। इसमें केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित ₹2,585 प्रति क्विंटल MSP और मध्य प्रदेश सरकार की ओर से दिया जा रहा ₹40 प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस शामिल है। यह सीधे बैंक खाते में हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होती है।

लक्ष्य से आगे: कैसे बढ़ा खरीद का लक्ष्य

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि शुरुआत में गेहूं खरीद का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन रखा गया था। राज्य सरकार की प्रभावी निगरानी और किसानों की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए केंद्र सरकार ने इसे संशोधित कर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया। राजपूत ने कहा कि कोविड काल को छोड़ दें तो पिछले 10 वर्षों में यह सबसे बड़ी MSP गेहूं खरीद है।

मुख्यमंत्री की सक्रिय निगरानी

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्वयं कई खरीद केंद्रों का औचक निरीक्षण किया और तौल व्यवस्था, बारदानों की उपलब्धता तथा किसानों के लिए आवश्यक सुविधाओं का जायज़ा लिया। उन्होंने किसानों से सीधे संवाद कर भुगतान प्रक्रिया और अन्य समस्याओं की जानकारी भी ली। मंत्री राजपूत ने इस उपलब्धि का श्रेय मुख्यमंत्री की सक्रिय पहल और निरंतर निगरानी को दिया।

किसानों की सुविधा के लिए उठाए गए कदम

स्लॉट बुक करा चुके किसानों के लिए खरीद की अंतिम तिथि 28 मई तक बढ़ा दी गई है। प्रत्येक खरीद केंद्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 कर दी गई है और जिला प्रशासन को आवश्यकतानुसार अतिरिक्त कांटे लगाने का अधिकार भी दिया गया है। तौल पर्ची जारी करने का समय रात 10 बजे तक और भुगतान वाउचर जारी करने का समय आधी रात तक बढ़ाया गया है। सप्ताह में छह दिन खरीद का काम जारी रखा जा रहा है। सभी केंद्रों पर बारदाने, कंप्यूटर, गुणवत्ता जाँच उपकरण और सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। यह पहल मध्य प्रदेश के कृषि क्षेत्र में संरचनात्मक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या यह खरीद किसानों की वास्तविक आय में टिकाऊ बदलाव लाती है। ₹40 प्रति क्विंटल का राज्य बोनस एक सकारात्मक कदम है, फिर भी कृषि विशेषज्ञ लंबे समय से तर्क देते आए हैं कि MSP-आधारित खरीद मॉडल भंडारण, परिवहन और बाज़ार लिंकेज की संरचनात्मक कमियों को नहीं सुलझाता। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर MSP कानूनी गारंटी की माँग ज़ोर पकड़ रही है। मध्य प्रदेश का यह मॉडल — DBT, बोनस और विस्तारित खरीद अवधि के साथ — एक संदर्भ बिंदु बन सकता है, बशर्ते इसके रोज़गार और आय प्रभाव का स्वतंत्र सत्यापन हो।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश ने इस सीजन में कितना गेहूं खरीदा?
मध्य प्रदेश ने 2025-26 रबी सीजन में 100 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की MSP खरीद पूरी की है, जो राज्य के इतिहास में एक नया कीर्तिमान है। इस उपलब्धि के साथ मध्य प्रदेश पंजाब के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा सरकारी गेहूं खरीदार बन गया है।
मध्य प्रदेश में किसानों को गेहूं का कितना भाव मिल रहा है?
किसानों को प्रति क्विंटल ₹2,625 का भुगतान किया जा रहा है। इसमें केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित ₹2,585 का MSP और मध्य प्रदेश सरकार का ₹40 प्रति क्विंटल अतिरिक्त बोनस शामिल है।
मध्य प्रदेश में गेहूं खरीद की अंतिम तारीख क्या है?
स्लॉट बुक करा चुके किसानों के लिए गेहूं खरीद की अंतिम तिथि 28 मई 2025 तक बढ़ा दी गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किसानों को राहत देते हुए यह निर्णय लिया।
कितने किसानों को MSP पर गेहूं बेचने का लाभ मिला?
इस सीजन में रिकॉर्ड 13.1 लाख किसानों से MSP पर गेहूं खरीदा गया है। राज्य सरकार ने अब तक इन किसानों के बैंक खातों में सीधे ₹20,680 करोड़ से अधिक की राशि DBT के माध्यम से हस्तांतरित की है।
मध्य प्रदेश का गेहूं खरीद लक्ष्य मूल रूप से क्या था और कैसे बढ़ा?
शुरुआत में राज्य का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का था। राज्य सरकार की प्रभावी निगरानी और किसानों की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए केंद्र सरकार ने इस लक्ष्य को संशोधित कर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया।
राष्ट्र प्रेस
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