भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस: MP उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला बोले — दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने 7 जुलाई 2026 को भोपाल में पत्रकारों से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर अडिग है और किसी भी अनियमितता की शिकायत पर निष्पक्ष जाँच के बाद दोषी व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं, मेडिकल शिक्षा और ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता सहित कई अहम मुद्दों पर सरकार का पक्ष रखा।
भ्रष्टाचार पर सरकार का रुख
शुक्ला ने कहा, 'हमारी सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करती है। यदि किसी प्रकार की कमी, लापरवाही या भ्रष्टाचार की शिकायत सामने आती है तो उसकी पूरी जाँच कराई जाती है। जाँच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी अनियमितताओं को लेकर सार्वजनिक चर्चा तेज़ है।
इंदौर में स्वास्थ्य सेवाएँ और मैनपावर व्यवस्था
इंदौर में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सवाल पर उपमुख्यमंत्री ने बताया कि पैरामेडिकल कर्मचारियों की अधिक आवश्यकता को देखते हुए अस्थायी व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा, 'स्वीकृत पदों में से 35 कर्मचारियों को आसपास के स्वास्थ्य केंद्रों से प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर लाया गया है।' शुक्ला ने स्पष्ट किया कि जैसे ही संबंधित केंद्र पूरी तरह संचालित होगा, इन सभी कर्मचारियों को उनके मूल कार्यस्थल पर वापस भेज दिया जाएगा।
एनएमसी गाइडलाइन और एनआरआई कोटा
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) की गाइडलाइन और मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई कोटे के पालन पर शुक्ला ने कहा कि राज्य सरकार आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों, मैनुअल और एडवाइजरी का पूरी गंभीरता से अनुपालन सुनिश्चित करती है। उन्होंने कहा, 'नीट परीक्षा के बाद एनआरआई कोटे सहित प्रवेश प्रक्रिया में किसी प्रकार की कमी न रहे, यह सुनिश्चित किया जाता है। हाल ही में जारी एडवाइजरी का भी पूरी तरह पालन कराया जाएगा।' गौरतलब है कि मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर देशभर में माँगें उठती रही हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी
ग्रामीण इलाकों में चिकित्सकों की अनुपलब्धता के मुद्दे पर शुक्ला ने माना कि यह समस्या दीर्घकालिक है, लेकिन सरकार इसे दूर करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि नए अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की घोषणा के साथ-साथ आवश्यक पद भी स्वीकृत किए जाते हैं और भवन निर्माण जल्द से जल्द पूरा कराने पर ज़ोर दिया जा रहा है।
खजराना स्वास्थ्य केंद्र: भूमि विवाद से अटका निर्माण
इंदौर के खजराना क्षेत्र में स्वास्थ्य केंद्र के भवन निर्माण में हो रही देरी पर उन्होंने स्पष्ट किया कि आवंटित भूमि पर अतिक्रमण और कब्जा न मिलने जैसी बाधाओं के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। शुक्ला ने कहा, 'भूमि से जुड़े सभी विवादों का समाधान कर स्वास्थ्य विभाग को विधिवत कब्जा दिलाने के बाद निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जाएगा।' यह मामला दर्शाता है कि प्रशासनिक देरी और भूमि विवाद स्वास्थ्य अवसंरचना विस्तार में बड़ी बाधा बने हुए हैं।