होर्मुज स्ट्रेट में एक दिन में तीन टैंकरों पर हमले, सऊदी कच्चे तेल और कतरी LNG जहाज क्षतिग्रस्त
सारांश
मुख्य बातें
होर्मुज स्ट्रेट में 7 जुलाई 2026 को एक ही दिन में तीन अलग-अलग तेल टैंकरों पर हमले हुए, जिनमें सऊदी अरब का एक कच्चे तेल का टैंकर और कतर का एक तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) टैंकर कथित तौर पर क्षतिग्रस्त हुए। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने इन तीनों घटनाओं की पुष्टि की है और बताया कि किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
तीन घटनाओं का क्रम
पहली घटना की जानकारी UKMTO को सोमवार रात 2119 UTC पर मिली। रिपोर्टों के अनुसार, ओमान के लिमाह से करीब आठ समुद्री मील पूर्व में दक्षिण की ओर जा रहे एक टैंकर के बाईं तरफ एक अज्ञात वस्तु टकराई, जिससे उसमें आग लग गई।
दूसरी घटना की जानकारी मंगलवार को दी गई, जिसमें एक अन्य टैंकर को अज्ञात वस्तु से संरचनात्मक नुकसान पहुँचने की बात कही गई। तीसरी और सबसे नई घटना की सूचना UKMTO को मंगलवार दोपहर 1305 UTC पर मिली — इसमें एक टैंकर पर ड्रोन से हमला किया गया, जिससे उसे हल्का ढाँचागत नुकसान हुआ। यह जहाज हमले के बाद भी अपने अगले बंदरगाह की ओर बढ़ता रहा।
कौन से जहाज निशाने पर
मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के अनुसार, तीन में से दो जहाजों की पहचान हो चुकी है। इनमें से एक सऊदी अरब के झंडे वाला कच्चे तेल का टैंकर है, जबकि दूसरा कतर का LNG टैंकर है। कतरी जहाज की पहचान अल रेकय्यात के रूप में की गई है, जिसने हमले के बाद आपातकालीन संकेत भेजे।
इससे पहले, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने कथित तौर पर दो ऐसे टैंकरों को निशाना बनाया था जो अमेरिका समर्थित ओमानी रास्ते से होर्मुज स्ट्रेट पार करने की कोशिश कर रहे थे। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स ने दावा किया कि इन जहाजों ने चेतावनी नहीं मानी थी।
कतर की प्रतिक्रिया
कतर ने अल रेकय्यात पर हुए हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल अंसारी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जारी बयान में कहा कि कतर इस हमले और इससे होने वाले किसी भी नुकसान या परिणाम के लिए ईरान को पूरी तरह कानूनी रूप से जिम्मेदार मानता है। उन्होंने ईरान से ऐसी सभी गतिविधियों को तुरंत बंद करने की माँग की।
समुद्री यातायात पर असर
स्वतंत्र सैन्य पर्यवेक्षक Mencho SINT के एक्स अकाउंट पर साझा की गई सैटेलाइट तस्वीरों का हवाला देते हुए फार्स ने बताया कि हमलों के बाद जापान, भारत और पश्चिमी देशों के कई जहाजों ने अपना रास्ता बदल लिया और जलडमरूमध्य पार करने के लिए ईरान की ओर से बताए गए रास्ते का उपयोग किया। गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है, और यहाँ तनाव बढ़ने पर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर सीधा असर पड़ता है।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब खाड़ी क्षेत्र में ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव पहले से ऊँचे स्तर पर है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया और संभावित कूटनीतिक कदमों पर नजर बनी हुई है। UKMTO ने क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों को सतर्क रहने की सलाह दी है।