राम मंदिर चढ़ावा विवाद: सपा विधायक मनोज कुमार पारस ने ट्रस्ट से माँगा जवाब, 'चंपत राय की चुप्पी क्यों?'
सारांश
मुख्य बातें
नगीना विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक मनोज कुमार पारस ने 7 जुलाई को लखनऊ में राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि मंदिर में सामने आई चोरी की घटना ने करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था को गहरी ठेस पहुँचाई है और इसके लिए ट्रस्ट के सदस्यों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
मुख्य आरोप: व्यवस्था विफल, जवाबदेही कहाँ?
पारस ने कहा, 'जब किसी संस्था या संपत्ति की देखरेख के लिए लोगों की नियुक्ति की जाती है, तो यह पूरी जिम्मेदारी उन्हीं की होती है। ऐसे में यदि मंदिर में इस तरह की घटना हुई है, तो इसकी जवाबदेही उन लोगों पर भी बनती है जिन्हें ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया और मंदिर की व्यवस्था संभालने का दायित्व सौंपा गया।' उन्होंने यह भी कहा कि जब श्रीराम मंदिर का निर्माण हुआ, तब समाज के अनेक वर्गों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, किंतु ट्रस्ट गठन के समय उन्हें उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला।
दलित व पिछड़े वर्ग की अनदेखी का आरोप
पारस, जो स्वयं अनुसूचित समाज से आते हैं, ने कहा कि दलित और पिछड़े वर्ग के अनेक लोगों ने राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय योगदान दिया था, लेकिन ट्रस्ट में इन वर्गों के किसी भी व्यक्ति को स्थान नहीं दिया गया। यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर से जुड़े प्रशासनिक विवाद राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन चुके हैं।
एसआईटी जाँच पर सवाल, प्रक्रिया पर उठाई आपत्ति
पारस ने एसआईटी (SIT) जाँच की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार सामान्य कानूनी प्रक्रिया में पहले प्राथमिकी (FIR) दर्ज होती है और उसके बाद जाँच आगे बढ़ती है, लेकिन इस मामले में पहले एसआईटी का गठन किया गया और बाद में एफआईआर दर्ज हुई। उन्होंने कहा, 'इससे ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार अपनी सुविधा के अनुसार कानून और संवैधानिक प्रक्रियाओं का इस्तेमाल कर रही है।' उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर आरोप लगाया कि वह विपक्ष पर दोषारोपण कर अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रही है।
चंपत राय की चुप्पी पर तंज
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की ओर से जारी पत्र-प्रतिक्रिया पर पारस ने कहा कि यह चंपत राय ही बता सकते हैं कि वह कब बोलेंगे। उन्होंने अनुमान जताया कि संभवतः उन्हें फिलहाल सार्वजनिक बयान देने से रोका गया है और जाँच प्रक्रिया पूरी होने के बाद तय रणनीति के तहत उनसे बयान दिलाया जाएगा।
सपा का पक्ष और राज्यपाल की टिप्पणी
पारस ने सपा के रुख का बचाव करते हुए स्पष्ट किया कि न तो पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और न ही अखिलेश यादव ने कभी राम मंदिर निर्माण का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से जुड़ा था और फैसले के बाद उसका पालन कराना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी थी। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल द्वारा लव मैरिज पर की गई टिप्पणी पर पारस ने संयमित प्रतिक्रिया दी और कहा कि संविधान में बालिग होने की आयु निर्धारित है और प्रत्येक व्यक्ति को उसी के अनुरूप आचरण करना चाहिए। आगे के घटनाक्रम पर सबकी नज़रें ट्रस्ट की आधिकारिक प्रतिक्रिया और जाँच की दिशा पर टिकी हैं।