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राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद: ट्रस्ट ने SBI और आउटसोर्स एजेंसी को ठहराया जिम्मेदार

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद: ट्रस्ट ने SBI और आउटसोर्स एजेंसी को ठहराया जिम्मेदार

सारांश

अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले में ट्रस्ट ने साफ कहा — गड़बड़ी हुई तो जिम्मेदार SBI और उसकी आउटसोर्स एजेंसी है, ट्रस्ट नहीं। 8 आरोपियों के साथ SIT जांच जारी है और मंदिर की वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल गहरे होते जा रहे हैं।

मुख्य बातें

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट ने कहा कि दान की गिनती SBI की आउटसोर्स एजेंसी करती थी, ट्रस्ट के कर्मचारी नहीं।
ट्रस्ट और SBI के बीच औपचारिक समझौते के तहत बैंक-नियुक्त कर्मचारी नकदी की गिनती और जमा करते थे।
मामले में कुल 8 लोगों को आरोपी बनाया गया है; आरोपी टिन्नू यादव परिसर व्यवस्था और वीआईपी दर्शन की देखरेख करते थे।
कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने कहा कि ट्रस्ट के पास बैंक कर्मचारियों के चयन या सत्यापन का कोई अधिकार नहीं था।
SIT की जांच जारी है; ट्रस्ट ने निष्पक्ष जांच और दोषियों को कानूनी दंड की उम्मीद जताई।

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट ने 2 जुलाई को औपचारिक सफाई जारी करते हुए दान-राशि की गिनती में किसी भी अनियमितता की जिम्मेदारी भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और उसकी आउटसोर्स एजेंसी पर डाल दी। ट्रस्ट के कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने स्पष्ट किया कि नकदी की गिनती और जमा करने का पूरा काम बैंक द्वारा नियुक्त कर्मचारियों के जिम्मे था, ट्रस्ट के कर्मचारियों के नहीं।

बैंक-ट्रस्ट समझौते की संरचना

प्रकाश गुप्ता के अनुसार, ट्रस्ट और SBI के बीच एक औपचारिक समझौते के तहत बैंक अपनी टीम या संबद्ध आउटसोर्स एजेंसी के कर्मचारियों को काउंटिंग के लिए भेजता था। ट्रस्ट की ओर से केवल एक प्रतिनिधि निगरानी के लिए मौजूद रहता था — उसकी भूमिका नकदी की गिनती या हैंडलिंग में प्रत्यक्ष रूप से शामिल होने की नहीं थी। गुप्ता ने कहा कि ट्रस्ट के पास न तो उन कर्मचारियों के चयन का अधिकार था और न ही उनके सत्यापन की जिम्मेदारी।

आरोपियों पर ट्रस्ट का पक्ष

इस मामले में जिन आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है, उनके बारे में गुप्ता ने कहा कि इनमें से कुछ परिसर की आंतरिक व्यवस्था संभालते थे। उन्होंने बताया कि आरोपी टिन्नू यादव को परिसर की देखरेख और वीआईपी दर्शन व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई थी, क्योंकि मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और विशिष्ट अतिथि आते हैं। गुप्ता ने जोर देकर कहा कि काउंटिंग प्रक्रिया में किसी की भागीदारी का यह अर्थ नहीं है कि ट्रस्ट के भीतर मिलीभगत थी।

जांच के दायरे पर ट्रस्ट की राय

गुप्ता ने कहा कि जांच का दायरा बढ़ना सकारात्मक कदम है, क्योंकि इससे पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी। उन्होंने कहा कि विशेष जांच दल (SIT) को यह तय करना होगा कि जांच किस समय-सीमा से शुरू होगी — चाहे वह ट्रस्ट के गठन से हो या किसी विशेष अवधि से। यह निर्णय पूरी तरह SIT के विवेक पर निर्भर है।

आलोचकों पर पलटवार

गुप्ता ने यह भी कहा कि जो लोग पहले से ट्रस्ट के विरोध में रहे हैं, वे इस मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं। उनके अनुसार, बड़े धार्मिक या सार्वजनिक संस्थानों के विरुद्ध कई बार बिना ठोस आधार के भी आरोप लगाए जाते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि जांच निष्पक्ष होगी, दोषी को कानून के अनुसार दंड मिलेगा और किसी निर्दोष को अनावश्यक रूप से नहीं फंसाया जाएगा।

आगे क्या होगा

SIT की जांच की दिशा और समय-सीमा अभी स्पष्ट नहीं है। ट्रस्ट ने संकेत दिया है कि वह जांच प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेगा। यह मामला अयोध्या में धार्मिक संस्थाओं की वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर व्यापक बहस को नई दिशा दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

हमारी नहीं' — प्रशासनिक दृष्टि से तर्कसंगत लग सकता है, लेकिन यह उस बड़े सवाल को नहीं टालता कि देश के सबसे चर्चित धार्मिक स्थल पर वित्तीय निगरानी इतनी कमज़ोर कैसे रही। आउटसोर्सिंग जिम्मेदारी कम नहीं करती — वह जवाबदेही के अंतर को उजागर करती है। SIT को यह तय करना होगा कि क्या निगरानी तंत्र की विफलता भी अपने आप में एक चूक है। जब तक काउंटिंग प्रक्रिया में तृतीय-पक्ष ऑडिट और रियल-टाइम सत्यापन नहीं होता, ऐसे विवाद दोबारा उठते रहेंगे।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला क्या है?
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान-पेटियों से एकत्र नकदी की गिनती के दौरान कथित अनियमितताओं का यह मामला है, जिसमें 8 लोगों को आरोपी बनाया गया है और SIT जांच चल रही है।
ट्रस्ट ने अपनी जिम्मेदारी से इनकार क्यों किया?
ट्रस्ट के कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने कहा कि SBI के साथ समझौते के तहत नकदी की गिनती बैंक की आउटसोर्स एजेंसी करती थी। ट्रस्ट के पास न उन कर्मचारियों के चयन का अधिकार था और न ही उनके सत्यापन की जिम्मेदारी।
आरोपी टिन्नू यादव की मंदिर में क्या भूमिका थी?
ट्रस्ट के अनुसार, टिन्नू यादव को परिसर की देखरेख और वीआईपी दर्शन व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई थी। ट्रस्ट का कहना है कि काउंटिंग प्रक्रिया में उपस्थिति का अर्थ सीधे चोरी में संलिप्तता नहीं है।
SIT जांच किस दिशा में जाएगी?
प्रकाश गुप्ता के अनुसार, SIT को यह तय करना है कि जांच ट्रस्ट के गठन से शुरू होगी या किसी विशेष अवधि से। जांच का दायरा और समय-सीमा पूरी तरह SIT के विवेक पर निर्भर है।
इस मामले में SBI की क्या भूमिका है?
ट्रस्ट के दावे के अनुसार, SBI ने आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से काउंटिंग की व्यवस्था की थी। यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है, तो ट्रस्ट उसकी जिम्मेदारी बैंक और उसकी प्रक्रिया पर डालता है।
राष्ट्र प्रेस
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