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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: कांग्रेस ने ट्रस्ट भंग कर सुप्रीम कोर्ट निगरानी में जांच की मांग उठाई

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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: कांग्रेस ने ट्रस्ट भंग कर सुप्रीम कोर्ट निगरानी में जांच की मांग उठाई

सारांश

राम मंदिर में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरा — ट्रस्ट भंग करने, सुप्रीम कोर्ट निगरानी में जांच और स्वतंत्र ऑडिट की माँग के साथ। दीपेंद्र हुड्डा का सवाल: जब प्राण प्रतिष्ठा का श्रेय लिया, तो जवाबदेही से क्यों पीछे?

मुख्य बातें

कांग्रेस ने 10 जुलाई को लखनऊ में प्रेसवार्ता कर राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर केंद्र सरकार को घेरा।
पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र न्यायिक जांच और संपूर्ण चढ़ावे की विशेष ऑडिट की माँग की।
दीपेंद्र हुड्डा ने सवाल उठाया कि पूर्व पदाधिकारी चंपत राय और अनिल मिश्रा ने बिना आरोप के पद क्यों छोड़ा।
अजय राय ने आरोप लगाया कि कार्रवाई केवल छोटे कर्मचारियों तक सीमित है और बड़े जिम्मेदारों को बचाया जा रहा है।
कांग्रेस ने वर्तमान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग कर धर्माचार्यों और स्वतंत्र विशेषज्ञों से युक्त नया पारदर्शी ट्रस्ट बनाने की माँग की।
पार्टी ने कथित दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की माँग भी रखी।

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने 10 जुलाई को केंद्र सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के विरुद्ध सीधा मोर्चा खोल दिया। पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र न्यायिक जांच, ट्रस्ट को भंग करने और संपूर्ण चढ़ावे की विशेष ऑडिट की मांग की है। लखनऊ स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित संयुक्त प्रेसवार्ता में पार्टी ने प्रधानमंत्री से सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट करने का आह्वान किया।

मुख्य आरोप और मांगें

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं सांसद दीपेंद्र हुड्डा तथा उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने संयुक्त रूप से आरोप लगाया कि जब मंदिर निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा समारोह का राजनीतिक श्रेय लिया गया, तो कथित अनियमितताओं पर जवाबदेही से अब पीछे नहीं हटा जा सकता। हुड्डा ने कहा कि भगवान श्रीराम करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं और इन आरोपों ने देशभर के श्रद्धालुओं के मन में गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कांग्रेस सांसद ने यह भी सवाल उठाया कि यदि ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारियों चंपत राय और अनिल मिश्रा पर कोई आरोप नहीं था, तो उनके पद छोड़ने की नौबत क्यों आई। हुड्डा ने आरोप लगाया कि अब तक की कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित है, जबकि शीर्ष स्तर की जवाबदेही तय नहीं की जा रही — जिससे पूरे प्रकरण पर पर्दा डालने की आशंका उत्पन्न होती है।

सरकार पर दबाव और जवाबदेही की माँग

अजय राय ने आरोप लगाया कि सरकार मामले की निष्पक्ष जांच कराने के बजाय उसे दबाने का प्रयास कर रही है। उनके अनुसार, इतने बड़े स्तर की कथित वित्तीय अनियमितता बिना किसी संरक्षण के संभव नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई करके बड़े जिम्मेदार लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है।

यह ऐसे समय में आया है जब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार की देखरेख में हुआ था और प्राण प्रतिष्ठा समारोह का नेतृत्व स्वयं प्रधानमंत्री ने किया था। आलोचकों का कहना है कि इस पृष्ठभूमि में सरकार की चुप्पी और भी संदिग्ध लगती है।

नए ट्रस्ट के गठन की माँग

कांग्रेस ने माँग की कि वर्तमान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग कर उसके स्थान पर एक नया, पारदर्शी और जवाबदेह ट्रस्ट गठित किया जाए। पार्टी के अनुसार, नए ट्रस्ट में धर्माचार्यों, शंकराचार्यों, अयोध्या के संतों, प्रतिष्ठित नागरिकों और स्वतंत्र विशेषज्ञों को सम्मिलित किया जाना चाहिए। इसके साथ ही कथित दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की माँग भी रखी गई।

कांग्रेस का रुख और आगे की रणनीति

एक प्रश्न के उत्तर में हुड्डा ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी है और सभी धर्मों का समान सम्मान करती है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में ही अयोध्या में राम मंदिर का ताला खुला था। पार्टी ने घोषणा की कि वह इस मुद्दे को सड़क से लेकर संसद तक उठाएगी और आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित कराने की लड़ाई जारी रखेगी। गौरतलब है कि यह मामला अब राष्ट्रीय राजनीति में एक प्रमुख विवाद बनता जा रहा है और आने वाले दिनों में संसद में भी इसकी गूँज सुनाई दे सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

किंतु इसे सीधे भ्रष्टाचार से जोड़ना अभी तक प्रमाणित नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट निगरानी की माँग यदि वास्तव में पारदर्शिता के लिए है, तो सरकार को इसका विरोध करने की बजाय स्वागत करना चाहिए — क्योंकि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े धन की जवाबदेही किसी भी दल की राजनीति से बड़ी है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चढ़ावा विवाद क्या है?
अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए धन और दान में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारियों चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने पद छोड़े, जिसने राजनीतिक विवाद को और गहरा कर दिया।
कांग्रेस ने क्या माँगें रखी हैं?
कांग्रेस ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र न्यायिक जांच, राम मंदिर के संपूर्ण चढ़ावे और दान की विशेष ऑडिट, और वर्तमान ट्रस्ट को भंग कर धर्माचार्यों व स्वतंत्र विशेषज्ञों से युक्त नया पारदर्शी ट्रस्ट गठित करना। इसके साथ ही कथित दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की माँग भी की गई है।
चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस विवाद से क्या संबंध है?
चंपत राय और अनिल मिश्रा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारी हैं, जिन्होंने हाल ही में अपने पद छोड़े। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने सवाल उठाया है कि यदि उन पर कोई आरोप नहीं था, तो पद छोड़ने की नौबत क्यों आई — और इनकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
क्या कांग्रेस राम मंदिर के विरोध में है?
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह राम मंदिर की विरोधी नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही की माँग कर रही है। दीपेंद्र हुड्डा ने यह भी याद दिलाया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में ही अयोध्या में राम मंदिर का ताला खुला था।
इस मामले में आगे क्या होने की संभावना है?
कांग्रेस ने घोषणा की है कि वह इस मुद्दे को सड़क से लेकर संसद तक उठाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला आने वाले संसद सत्र में प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर होने की भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
राष्ट्र प्रेस
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