गगनयान मिशन को बड़ी कामयाबी: इसरो ने श्योपुर में मुख्य पैराशूट सिस्टम का 5वाँ सफल परीक्षण किया
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 10 जुलाई 2026 को मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ADRDE) के ड्रॉप ज़ोन में गगनयान मिशन के मुख्य पैराशूट सिस्टम का सफल परीक्षण किया। यह इंटीग्रेटेड मेन पैराशूट एयरड्रॉप टेस्ट (IMAT) श्रृंखला का पाँचवाँ सफल परीक्षण है, जो भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन की सुरक्षित वापसी प्रणाली को और अधिक विश्वसनीय बनाता है।
परीक्षण कैसे हुआ
भारतीय वायु सेना के IL-76 विमान से लगभग ढाई किलोमीटर की ऊँचाई पर एक परीक्षण असेंबली को हवा में छोड़ा गया। इस असेंबली में मुख्य पैराशूट के साथ एक डमी पेलोड भी जोड़ा गया था, ताकि वास्तविक मिशन जैसी परिस्थितियाँ तैयार की जा सकें।
हवा में छोड़े जाने के तुरंत बाद सबसे पहले ड्रोग पैराशूट सक्रिय हुआ, जिसने असेंबली को संतुलित किया और उसकी गति को नियंत्रित किया। इसके बाद मुख्य पैराशूट खुला और पूरे पेलोड को सुरक्षित गति से ज़मीन तक पहुँचाया। इसरो के अनुसार, पूरा परीक्षण तय मानकों के अनुरूप सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।
परीक्षण का उद्देश्य
इसरो के मुताबिक, इस परीक्षण का मुख्य लक्ष्य बिना चालक वाले पहले गगनयान मिशन G1 के दौरान संभावित अधिकतम भार की स्थिति में मुख्य पैराशूट सिस्टम की मज़बूती और कार्यक्षमता को परखना था। यह परीक्षण इस विश्वास को और पुख़्ता करता है कि अंतरिक्ष से लौटते समय गगनयान क्रू मॉड्यूल सुरक्षित तरीके से पृथ्वी पर उतर सकेगा।
गौरतलब है कि इसरो लगातार अलग-अलग परिस्थितियों में पैराशूट सिस्टम की जाँच कर रहा है, ताकि मिशन के दौरान किसी भी तकनीकी चुनौती से निपटा जा सके।
গগनयान की 10-पैराशूट प्रणाली
গগনयান क्रू मॉड्यूल में कुल 10 पैराशूट लगाए गए हैं और हर एक की भूमिका अलग-अलग है। कुछ पैराशूट मॉड्यूल के सुरक्षा कवर को अलग करते हैं, कुछ उसकी गति कम करते हैं, कुछ मुख्य पैराशूट को बाहर निकालते हैं, और अंत में मुख्य पैराशूट मॉड्यूल को सुरक्षित गति से धरती पर उतारता है।
यह पूरी प्रणाली बहु-चरणीय है और प्रत्येक चरण मिशन की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। IMAT श्रृंखला के अंतर्गत इसरो इन्हीं सभी चरणों को क्रमबद्ध तरीके से सत्यापित कर रहा है।
श्योपुर और ADRDE की भूमिका
मध्य प्रदेश का श्योपुर ज़िला भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षण स्थल के रूप में उभरा है। ADRDE का ड्रॉप ज़ोन पैराशूट और एयरड्रॉप प्रणालियों के परीक्षण के लिए देश की प्रमुख सुविधाओं में से एक है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने पहले मानव अंतरिक्ष मिशन की अंतिम तैयारियों में जुटा है।
आगे क्या होगा
इस सफल परीक्षण के बाद गगनयान मिशन की तैयारियाँ और तेज़ होने की उम्मीद है। इसरो अभी भी विभिन्न परिस्थितियों में पैराशूट प्रणाली के शेष परीक्षण पूरे करेगा। वह दिन अब दूर नहीं जब भारतीय अंतरिक्ष यात्री स्वदेशी तकनीक से अंतरिक्ष की यात्रा कर सुरक्षित धरती पर लौटेंगे।