असम में ₹550 करोड़ की प्रोटॉन बीम थेरेपी: GMCH बनेगा देश का पहला सरकारी कैंसर उपचार केंद्र
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 10 जुलाई 2026 को घोषणा की कि राज्य सरकार गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (GMCH) में अत्याधुनिक प्रोटॉन बीम थेरेपी सुविधा स्थापित करने के लिए ₹550 करोड़ का निवेश करेगी। इस कदम से असम सरकारी स्वास्थ्य क्षेत्र में यह सुविधा उपलब्ध कराने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा, जो पूरे पूर्वोत्तर भारत के कैंसर मरीजों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगी।
बजट में क्या हुई घोषणा
विधानसभा में वित्त मंत्री जयंत मल्लाबरुआ द्वारा असम बजट 2026-27 पेश किए जाने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए सरमा ने इस महत्वाकांक्षी योजना का ऐलान किया। बजट प्रस्तावों में GMCH में प्रोटॉन थेरेपी केंद्र स्थापित करने के लिए ₹550 करोड़ का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा, 'असम जल्द ही सरकारी हेल्थकेयर सेक्टर में एडवांस्ड कैंसर इलाज के लिए प्रोटॉन बीम थेरेपी की सुविधा वाला पहला राज्य बन जाएगा। हम इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए ₹550 करोड़ का निवेश कर रहे हैं।'
प्रोटॉन थेरेपी: क्यों है यह खास
प्रोटॉन बीम थेरेपी विश्वभर में उपलब्ध रेडिएशन उपचार के सबसे उन्नत रूपों में से एक है। यह तकनीक कैंसरग्रस्त ट्यूमर का अत्यंत सटीक उपचार करती है और आसपास के स्वस्थ ऊतकों को न्यूनतम क्षति पहुँचाती है। इससे साइड इफेक्ट कम होते हैं और उपचार के परिणाम बेहतर होते हैं — विशेष रूप से जटिल और दुर्लभ प्रकार के कैंसर में। गौरतलब है कि अभी तक यह सुविधा देश के कुछ ही निजी अस्पतालों में उपलब्ध है, जिससे इलाज का खर्च अधिकांश मरीजों की पहुँच से बाहर रहता है।
पूर्वोत्तर के मरीजों पर असर
सरमा ने बताया कि प्रस्तावित प्रोटॉन थेरेपी केंद्र पूरे पूर्वोत्तर भारत के मरीजों के लिए एडवांस्ड कैंसर उपचार को सुलभ और किफायती बनाएगा। अभी तक विशेष इलाज के लिए मरीजों को मुंबई, चेन्नई या दिल्ली जैसे बड़े शहरों में जाना पड़ता है, जिससे परिवारों पर भारी वित्तीय और भावनात्मक बोझ पड़ता है। मुख्यमंत्री के अनुसार, मरीजों के करीब यह सुविधा लाने से न केवल जीवित रहने की दर में सुधार होगा, बल्कि उपचार की लागत भी घटेगी।
असम की स्वास्थ्य यात्रा: पृष्ठभूमि
यह पहल ऐसे समय में आई है जब असम पिछले कुछ वर्षों में टाटा ट्रस्ट्स के साथ साझेदारी में कई विशेष कैंसर अस्पताल स्थापित कर चुका है। प्रोटॉन थेरेपी परियोजना इस स्वास्थ्य अवसंरचना विस्तार की अगली कड़ी है। सरमा के अनुसार, यह कदम असम को पूर्वी भारत में एक प्रमुख हेल्थकेयर हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक प्रयास है।
आगे की राह
बजट में आवंटन के बाद अब परियोजना के क्रियान्वयन की रूपरेखा तय होनी बाकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर की सुविधा स्थापित करने में तकनीकी जटिलताएँ और दक्ष जनशक्ति की उपलब्धता सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौतियाँ होंगी। यदि यह परियोजना समय पर पूरी होती है, तो यह सरकारी स्वास्थ्य सेवा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगी।