सोहावल का नया नाम 'मां ज्वाला देवी': CM योगी के फैसले पर संतों ने जताई प्रसन्नता
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार ने 10 जुलाई 2026 को सोहावल नगर का नाम बदलकर 'मां ज्वाला देवी' रखने की घोषणा की, जिसे साधु-संत समुदाय ने व्यापक रूप से सराहा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त किया। इसी के साथ भदरसा का नाम भी 'भरत कुंड/भरत नगर' रखा गया है।
नामकरण का निर्णय
उत्तर प्रदेश सरकार के इस कदम को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। सोहावल को 'मां ज्वाला देवी' और भदरसा को 'भरत कुंड' या 'भरत नगर' के नाम से जाना जाएगा। गौरतलब है कि यह नामकरण प्रक्रिया राज्य सरकार की उस नीति का हिस्सा है जिसके तहत ऐतिहासिक या पौराणिक महत्व के आधार पर स्थानों के नाम बदले जा रहे हैं।
संतों की प्रतिक्रिया
महंत सीताराम दास ने इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा, 'मैं उत्तर प्रदेश सरकार के इस कदम को सराहनीय मानता हूँ। मां ज्वालामुखी के नाम पर रखा गया यह नाम अत्यंत सुंदर है। एक बार नाम स्मरण करने से ही मंगल हो जाएगा। भारतीय संस्कृति को सुरक्षित रखने की दिशा में यह कदम बहुत महत्वपूर्ण है।'
रामादल ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित कल्कि राम ने कहा कि सनातन धर्म गुलामी के प्रतीकों को समाप्त कर अपनी सभ्यता और संस्कृति के गौरव को स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा करते हुए उनके शीघ्र प्रधानमंत्री बनने की कामना भी व्यक्त की।
आम जनता और समाज पर असर
एक अन्य महंत ने कहा कि इस नामकरण की माँग लंबे समय से की जा रही थी और मुख्यमंत्री ने आम लोगों की भावनाओं को सम्मान दिया है। उनके अनुसार समाज में इस निर्णय को लेकर प्रसन्नता का माहौल है। उन्होंने यह भी माँग की कि प्रदेश के सभी मुगलकालीन नामों को पौराणिक नामों से बदला जाए।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार पहले भी इलाहाबाद को प्रयागराज और फैज़ाबाद को अयोध्या जैसे नामकरण कर चुकी है। आलोचकों का कहना है कि नाम परिवर्तन की इस श्रृंखला पर प्रशासनिक संसाधन और ध्यान केंद्रित होता है, जबकि समर्थकों का तर्क है कि यह सांस्कृतिक पहचान की पुनर्स्थापना है। इस निर्णय के राजनीतिक निहितार्थों पर विभिन्न वर्गों में चर्चा जारी है।