10 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

शांति निकेतन हाउसिंग सोसाइटी घोटाला: ईडी ने ₹6.63 करोड़ की नकदी-सोना-चांदी जब्त, 8 ठिकानों पर छापे

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
शांति निकेतन हाउसिंग सोसाइटी घोटाला: ईडी ने ₹6.63 करोड़ की नकदी-सोना-चांदी जब्त, 8 ठिकानों पर छापे

सारांश

शांति निकेतन को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई — ₹6.63 करोड़ की नकदी, सोना और चांदी जब्त। कुल ₹90.50 करोड़ की वसूली का खुलासा, 34 अवैध सदस्यताएँ बेचने और हाउसिंग प्रोजेक्ट अधूरा छोड़ने का आरोप। जांच जारी है।

मुख्य बातें

ईडी ने 9 जुलाई 2026 को दिल्ली, गुरुग्राम और फरीदाबाद में 8 ठिकानों पर छापेमारी की।
कुल ₹6.63 करोड़ की संपत्ति जब्त — जिसमें ₹55 लाख नकदी, ₹1.85 करोड़ की सोने की ईंटें, ₹1.95 करोड़ के आभूषण और 100 किलोग्राम चांदी (₹2.28 करोड़) शामिल।
जांच में अब तक ₹90.50 करोड़ की कथित वसूली का पता चला है।
आरोपी मंगल सैन मित्तल , अनिल शर्मा और अरुण शर्मा पर 34 अवैध सदस्यताएँ बेचने और फंड गबन का आरोप।
मेसर्स कॉनोइसर इन्फ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड के खातों में ₹12 करोड़ नकद जमा के प्रमाण मिले।
आरोपियों के कई बैंक खाते फ्रीज , आगे की कानूनी कार्रवाई जारी।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 9 जुलाई 2026 को शांति निकेतन को-ऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी (एसजीएचएस) से जुड़े कथित धोखाधड़ी और धनशोधन मामले में दिल्ली, गुरुग्राम और फरीदाबाद में आठ ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई में ₹6.63 करोड़ मूल्य की बेहिसाबी नकदी, सोने की ईंटें, आभूषण और चांदी बरामद की गई, साथ ही कई बैंक खाते भी फ्रीज किए गए।

मामले की पृष्ठभूमि

यह जांच गुरुग्राम के सुशांत लोक थाने में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई। एफआईआर में सोसाइटी के तत्कालीन अध्यक्ष मंगल सैन मित्तल, मेसर्स कॉनोइसर इन्फ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड (सीआईपीएल) के निदेशक अनिल शर्मा और अरुण शर्मा पर सोसाइटी सदस्यों के साथ धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत यह कार्रवाई की।

मुख्य आरोप और घोटाले का स्वरूप

जांच में सामने आया कि आरोपियों ने कथित तौर पर सोसाइटी पर अवैध नियंत्रण स्थापित किया और सदस्यों के फंड का गबन किया। जहाँ सोसाइटी में केवल 98 सदस्यताओं की अनुमति थी, वहीं कथित तौर पर 34 अतिरिक्त अवैध सदस्यताएँ बेची गईं। फ्लैटों की बिक्री में दोहरे भुगतान की व्यवस्था अपनाई गई — खरीदारों से बैंकिंग चैनलों के साथ-साथ नकद भुगतान भी लिया गया।

आरोप है कि फर्जी सदस्य बनाए गए, आधिकारिक रिकॉर्ड छिपाए गए और बड़ी रकम जुटाने के बाद हाउसिंग प्रोजेक्ट को अधूरा छोड़ दिया गया। अब तक की जांच में करीब ₹90.50 करोड़ की वसूली का पता चला है, जिसमें बैंक खातों और नकद के माध्यम से प्राप्त धन शामिल है।

धन की लेयरिंग और रोटेशन

जांच में यह भी सामने आया कि सोसाइटी के फंड को आरोपियों से जुड़ी विभिन्न व्यावसायिक कंपनियों में स्थानांतरित किया गया। बैंक खातों के विश्लेषण से धन की लेयरिंग और रोटेशन के प्रमाण मिले हैं। गौरतलब है कि मेसर्स कॉनोइसर इन्फ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड तथा अनिल शर्मा के खातों में ₹12 करोड़ नकद जमा किए जाने का भी उल्लेख है।

जब्त संपत्ति का विवरण

तलाशी के दौरान ईडी ने कुल ₹6.63 करोड़ मूल्य की संपत्ति बरामद की, जिसमें शामिल हैं:

₹55 लाख की बेहिसाबी नकदी; ₹1.85 करोड़ की सोने की ईंटें; ₹1.95 करोड़ के सोने के आभूषण; और करीब 100 किलोग्राम चांदी, जिसकी अनुमानित कीमत ₹2.28 करोड़ है। इसके अलावा कई डिजिटल उपकरण, संपत्ति संबंधी दस्तावेज, ऑडिटेड वित्तीय रिकॉर्ड, टैली डेटा और फंड डायवर्जन से जुड़े दस्तावेज भी जब्त किए गए।

आगे की कार्रवाई

ईडी ने आरोपियों से जुड़े कई बैंक खाते फ्रीज कर दिए हैं। एजेंसी के अनुसार धनशोधन और वित्तीय अनियमितताओं के पूरे नेटवर्क की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब रियल एस्टेट क्षेत्र में को-ऑपरेटिव सोसाइटी घोटालों के खिलाफ ईडी की कार्रवाइयाँ देशभर में तेज हुई हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और क्या पीड़ित सदस्यों को उनका फंड वापस मिलेगा — जिसका जवाब अभी तक जांच एजेंसी ने नहीं दिया है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शांति निकेतन हाउसिंग सोसाइटी घोटाला क्या है?
यह गुरुग्राम की शांति निकेतन को-ऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी (एसजीएचएस) से जुड़ा कथित धोखाधड़ी और धनशोधन मामला है, जिसमें सोसाइटी के पदाधिकारियों पर सदस्यों के फंड का गबन, अवैध सदस्यताएँ बेचने और हाउसिंग प्रोजेक्ट अधूरा छोड़ने का आरोप है। जांच में अब तक ₹90.50 करोड़ की कथित वसूली का पता चला है।
ईडी ने इस मामले में क्या-क्या जब्त किया?
ईडी ने 9 जुलाई 2026 की छापेमारी में ₹6.63 करोड़ मूल्य की संपत्ति जब्त की — जिसमें ₹55 लाख नकदी, ₹1.85 करोड़ की सोने की ईंटें, ₹1.95 करोड़ के सोने के आभूषण और करीब 100 किलोग्राम चांदी (₹2.28 करोड़) शामिल हैं। इसके अलावा डिजिटल उपकरण, वित्तीय दस्तावेज और टैली डेटा भी जब्त किए गए।
इस मामले में मुख्य आरोपी कौन हैं?
मुख्य आरोपियों में सोसाइटी के तत्कालीन अध्यक्ष मंगल सैन मित्तल और मेसर्स कॉनोइसर इन्फ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अनिल शर्मा व अरुण शर्मा शामिल हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने मिलकर सोसाइटी पर अवैध नियंत्रण स्थापित किया और सदस्यों के धन का दुरुपयोग किया।
सोसाइटी में अवैध सदस्यताओं का मामला क्या है?
सोसाइटी में अधिकतम 98 सदस्यताओं की अनुमति थी, लेकिन आरोपियों ने कथित तौर पर 34 अतिरिक्त अवैध सदस्यताएँ बेचीं। फ्लैट खरीदारों से बैंकिंग चैनल के साथ-साथ नकद भुगतान भी लिया गया — जो दोहरे भुगतान की व्यवस्था का संकेत देता है।
ईडी की जांच आगे कहाँ तक जाएगी?
ईडी के अनुसार धनशोधन और वित्तीय अनियमितताओं के पूरे नेटवर्क की जांच अभी जारी है। आरोपियों के कई बैंक खाते फ्रीज किए जा चुके हैं और आगे और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मेसर्स कॉनोइसर इन्फ्राबिल्ड के खातों में ₹12 करोड़ नकद जमा के प्रमाण मिलने के बाद जांच का दायरा बढ़ने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले