₹133.52 करोड़ के बैंक फ्रॉड में CBI की छापेमारी, मुंबई और कोच्चि में दस्तावेज़-डिजिटल रिकॉर्ड बरामद
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 10 जुलाई 2025 को ₹133.52 करोड़ से अधिक की बैंक धोखाधड़ी के मामले में मुंबई और केरल के कोच्चि में एक निजी कंपनी के निदेशकों से जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। इस मामले में 9 जुलाई को प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी और अगले ही दिन एजेंसी ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
CBI के अनुसार, यह मामला भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की स्पेशल एसेट मैनेजमेंट (SAM) शाखा, मुंबई की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है। FIR में एक निजी कंपनी के निदेशकों के अलावा अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अज्ञात निजी व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन सभी ने मिलकर आपराधिक साजिश रची और बैंक को कथित तौर पर ₹133.52 करोड़ का वित्तीय नुकसान पहुंचाया।
धोखाधड़ी का तरीका
CBI के अनुसार, आरोपियों ने बैंक से अधिक ऋण और क्रेडिट सुविधाएं हासिल करने के लिए कथित तौर पर गलत और भ्रामक वित्तीय जानकारी प्रस्तुत की। स्वीकृत ऋण राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के बजाय अन्य कार्यों में किया गया या उसे अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया गया, जिससे बैंक को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी। गौरतलब है कि इस तरह की भ्रामक वित्तीय सूचनाओं के ज़रिए ऋण हड़पने की प्रवृत्ति देश के बैंकिंग क्षेत्र में एक गंभीर चुनौती बनी हुई है।
छापेमारी में क्या मिला
CBI ने बताया कि मुंबई और कोच्चि में की गई तलाशी के दौरान मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज़, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य बरामद किए गए हैं। इन साक्ष्यों का विश्लेषण कर यह पता लगाया जाएगा कि कथित धोखाधड़ी किस तरह अंजाम दी गई और इसमें किन-किन व्यक्तियों की भूमिका रही।
जांच का दायरा और आगे की कार्रवाई
CBI अधिकारियों के अनुसार, जांच अभी प्रारंभिक चरण में है। एजेंसी का मुख्य उद्देश्य साजिश के पूरे दायरे का पता लगाना, इसमें शामिल सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों की भूमिका की पहचान करना तथा यह स्पष्ट करना है कि बैंक से प्राप्त ऋण राशि का अंतिम उपयोग किस मद में हुआ। साक्ष्यों के आधार पर आगे आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी, और बैंकिंग प्रणाली से जुड़े इस वित्तीय अपराध में शामिल सभी ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कदम उठाए जाएंगे।