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मुंबई: सीबीआई ने ₹62.42 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी में FIR दर्ज की, कई ठिकानों पर छापे

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मुंबई: सीबीआई ने ₹62.42 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी में FIR दर्ज की, कई ठिकानों पर छापे

सारांश

सीबीआई ने मुंबई की एक फर्म पर ₹62.42 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी का शिकंजा कसा — फर्जी देनदार आँकड़ों से अतिरिक्त कैश क्रेडिट लेने का आरोप। साथ ही, 2006 के निम्बालकर हत्याकांड में सभी आरोपियों की बरी को सीबीआई बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती देगी।

मुख्य बातें

सीबीआई ने मुंबई स्थित एक फर्म और साझेदारों के खिलाफ ₹62.42 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया।
शिकायत भारतीय बैंक, एसएएम शाखा, मुंबई की ओर से दर्ज कराई गई; आरोप है कि फर्जी देनदार आँकड़ों से अतिरिक्त कैश क्रेडिट हासिल की गई।
सीबीआई ने 20 जून को विशेष न्यायालय के सर्च वारंट पर कई शहरों में छापेमारी कर अहम दस्तावेज जब्त किए।
जाँच में बैंक अधिकारियों और निजी व्यक्तियों दोनों की भूमिका की जाँच की जा रही है।
पवनराजे निम्बालकर हत्याकांड ( 3 जून 2006 , नवी मुंबई) में सभी आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को सीबीआई बॉम्बे उच्च न्यायालय में चुनौती देगी।
इस हत्याकांड में पूर्व महाराष्ट्र गृह मंत्री पद्मसिंह बाजीराव पाटिल सहित सभी आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी हुए थे।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मुंबई स्थित एक फर्म और उसके साझेदारों के विरुद्ध ₹62.42 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया है। यह कार्रवाई भारतीय बैंक, एसएएम शाखा, मुंबई की लिखित शिकायत के आधार पर की गई है। मामला दर्ज होते ही सीबीआई ने 20 जून को मुंबई सहित कई स्थानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की।

मुख्य आरोप: क्या है पूरा मामला

जाँच एजेंसी के अनुसार, संबंधित फर्म और अन्य अज्ञात व्यक्तियों ने कथित तौर पर आपराधिक साजिश के तहत बैंक के समक्ष गलत वित्तीय विवरण और फर्जी देनदारों के आँकड़े प्रस्तुत किए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर भारतीय बैंक और एक अन्य बैंक से अतिरिक्त कैश क्रेडिट सुविधा हासिल की गई, जिससे बैंकों को कुल मिलाकर ₹62.42 करोड़ का कथित नुकसान हुआ।

छापेमारी और बरामदगी

सीबीआई ने विशेष न्यायालय, सीबीआई मामले, मुंबई द्वारा जारी सर्च वारंट के आधार पर 20 जून को मुंबई सहित कई शहरों में फर्म के साझेदारों से जुड़े ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस दौरान जाँच के लिए अहम दस्तावेज जब्त किए गए। प्रारंभिक जाँच में ऐसे देनदारों की जानकारी सामने आई है जिनकी वैधता की अभी पुष्टि की जा रही है।

जाँच का दायरा

सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि मामले की जाँच जारी है और इसमें शामिल सभी व्यक्तियों — चाहे वे बैंक अधिकारी हों या निजी व्यक्ति — की भूमिका खँगाली जा रही है। एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि बैंक से लिए गए ऋण की राशि का उपयोग किन-किन मदों में किया गया।

निम्बालकर हत्याकांड: सीबीआई जाएगी बॉम्बे हाईकोर्ट

एक अलग घटनाक्रम में, सीबीआई ने घोषणा की है कि वह कांग्रेस नेता पवनराजे निम्बालकर और उनके चालक की हत्या मामले में सभी आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को बॉम्बे उच्च न्यायालय में चुनौती देगी। मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड में पूर्व महाराष्ट्र गृह मंत्री और पूर्व राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) सांसद पद्मसिंह बाजीराव पाटिल सहित सभी आरोपियों को साक्ष्य के अभाव और संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था।

पवनराजे निम्बालकर और उनके चालक की 3 जून 2006 को नवी मुंबई में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बाद में बॉम्बे उच्च न्यायालय के निर्देश पर यह मामला सीबीआई को सौंपा गया था। सीबीआई अब इस बरी किए जाने के निर्णय को उच्च न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि फर्जी देनदार आँकड़ों को बैंक की आंतरिक जाँच प्रक्रिया ने क्यों नहीं पकड़ा। कैश क्रेडिट सुविधाओं में इस तरह की हेराफेरी कोई नई घटना नहीं — यह उस व्यापक पैटर्न का हिस्सा है जिसमें बैंक अधिकारियों और उधारकर्ताओं की मिलीभगत से सार्वजनिक धन का दुरुपयोग होता है। निम्बालकर हत्याकांड में सीबीआई का बॉम्बे हाईकोर्ट जाने का निर्णय दर्शाता है कि एजेंसी हाई-प्रोफाइल मामलों में बरी के फैसलों को स्वीकार करने को तैयार नहीं — पर दो दशक बाद अपील की सफलता की संभावना साक्ष्य की मज़बूती पर निर्भर करेगी।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीआई ने मुंबई में किसके खिलाफ और किस आधार पर बैंक धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया?
सीबीआई ने मुंबई स्थित एक फर्म और उसके साझेदारों के खिलाफ ₹62.42 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया है। यह मामला भारतीय बैंक, एसएएम शाखा, मुंबई की शिकायत पर आधारित है, जिसमें आरोप है कि फर्जी वित्तीय दस्तावेजों और बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए देनदार आँकड़ों के जरिए अतिरिक्त कैश क्रेडिट हासिल की गई।
सीबीआई की छापेमारी कब और कहाँ हुई, और क्या मिला?
सीबीआई ने 20 जून को मुंबई सहित कई स्थानों पर विशेष न्यायालय के सर्च वारंट के आधार पर छापेमारी की। इस दौरान जाँच से जुड़े अहम दस्तावेज जब्त किए गए, जिनमें देनदारों के आँकड़ों में कथित हेराफेरी से संबंधित कागजात भी शामिल हैं।
पवनराजे निम्बालकर हत्याकांड क्या है और सीबीआई अब क्या करेगी?
कांग्रेस नेता पवनराजे निम्बालकर और उनके चालक की 3 जून 2006 को नवी मुंबई में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने पूर्व महाराष्ट्र गृह मंत्री पद्मसिंह बाजीराव पाटिल सहित सभी आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया, जिसे सीबीआई अब बॉम्बे उच्च न्यायालय में चुनौती देगी।
बैंक धोखाधड़ी मामले में किन लोगों की जाँच की जा रही है?
सीबीआई के अनुसार, इस मामले में शामिल सभी व्यक्तियों की जाँच की जा रही है — चाहे वे बैंक अधिकारी हों या निजी व्यक्ति। एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि ऋण की राशि का उपयोग किन-किन मदों में हुआ।
निम्बालकर हत्याकांड में यह मामला सीबीआई को कैसे सौंपा गया था?
यह मामला मूल रूप से स्थानीय पुलिस द्वारा जाँचा जा रहा था, लेकिन बाद में बॉम्बे उच्च न्यायालय के निर्देश पर इसे सीबीआई को सौंप दिया गया। हत्या 3 जून 2006 को नवी मुंबई में हुई थी और यह महाराष्ट्र के सबसे हाई-प्रोफाइल राजनीतिक हत्याकांडों में से एक रही है।
राष्ट्र प्रेस
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