मुंबई: एक्सिस बैंक में ₹29.83 लाख की धोखाधड़ी, मृत खाताधारक के खाते से फर्जी हस्ताक्षर कर निकाली रकम
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई के ताड़देव रोड स्थित एक्सिस बैंक की एक शाखा में बैंक कर्मचारियों ने कथित तौर पर एक मृत खाताधारक के खाते से ₹29,83,200 की हेराफेरी की है। 14 जुलाई 2026 को सामने आए इस मामले में पुलिस और बैंक अधिकारी संयुक्त रूप से जाँच कर रहे हैं।
कैसे हुई धोखाधड़ी
प्रारंभिक जाँच के अनुसार, मृत खाताधारक विमला पाटिल के नाम पर कस्टमर रिक्वेस्ट फॉर्म पर कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षर किए गए और उस फॉर्म को बैंक में जमा कराया गया। इसके बाद NEFT, UPI और IMPS के माध्यम से यह रकम अलग-अलग बैंक खातों में स्थानांतरित कर दी गई। यह ऐसे समय में सामने आया है जब बैंकिंग क्षेत्र में आंतरिक धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
मामला दर्ज, तीन आरोपी
एक्सिस बैंक के अधिकारियों की शिकायत पर ताड़देव पुलिस स्टेशन में राहुल पंजवाणी, अभिषेक वर्मा और राम पाल के विरुद्ध धोखाधड़ी समेत अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस यह भी जाँच कर रही है कि क्या आरोपियों ने इसी तरह अन्य मृत खाताधारकों के खातों से भी अवैध रूप से धन निकाला है।
मुंबई में बैंकिंग धोखाधड़ी का व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि इससे पहले 4 जुलाई को मुंबई पुलिस की अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) ने साइबर ठगी और ऑनलाइन गेमिंग के लिए बैंक खातों के कथित दुरुपयोग से जुड़े एक गिरोह का भंडाफोड़ किया था। उस मामले में गिरोह के सरगना समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।
क्राइम ब्रांच की यूनिट-2 को सूचना मिली थी कि अंधेरी पश्चिम के मरोल क्षेत्र स्थित एक कार्यालय से फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उनका इस्तेमाल साइबर ठगी और ऑनलाइन गेमिंग में किया जा रहा था। जाँच में पता चला कि आरोपी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर विभिन्न बैंकों में चालू खाते खुलवाते थे और उनसे जुड़े डेबिट कार्ड व सिम कार्ड सक्रिय कर डिब्रूगढ़ सहित देश के विभिन्न हिस्सों में भेजते थे।
बरामदगी
4 जुलाई के मामले में पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 66 एटीएम कार्ड, 12 सिम कार्ड, 19 बैंक पासबुक, 122 चेकबुक, 2 लैपटॉप, एक कैनन कलर प्रिंटर, 2 पेन ड्राइव और 68 फर्जी रबर स्टैंप बरामद किए।
आगे की जाँच
ताड़देव मामले में पुलिस की जाँच जारी है और अधिकारियों के अनुसार यह पता लगाया जा रहा है कि क्या इस धोखाधड़ी का दायरा और अधिक खातों तक फैला हुआ है। बैंकिंग नियामकों की भूमिका और आंतरिक निगरानी तंत्र की विफलता पर भी सवाल उठने लगे हैं।