मुंबई में 25 दिन तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रहकर रिटायर्ड अधिकारी से ठगी, 1.57 करोड़ रुपए की चपत

Click to start listening
मुंबई में 25 दिन तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रहकर रिटायर्ड अधिकारी से ठगी, 1.57 करोड़ रुपए की चपत

सारांश

साइबर अपराधियों ने एक रिटायर्ड अधिकारी को 25 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा और 1.57 करोड़ रुपए की ठगी की। जांच में पता चला कि आरोपियों ने फर्जी वीडियो कॉल के माध्यम से अदालती सुनवाई का नाटक किया।

Key Takeaways

  • साइबर ठगी के मामलों में सतर्क रहना आवश्यक है।
  • फर्जी वीडियो कॉल का उपयोग करके ठगी की जा सकती है।
  • पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है।
  • धोखाधड़ी के मामलों में धन ट्रांसफर के प्रति सावधान रहें।
  • साइबर सुरक्षा के उपाय अपनाना जरूरी है।

मुंबई, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अंधेरी के डीएन नगर क्षेत्र में 69 वर्षीय एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी को 25 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा गया। इसके बाद, पुलिस और अदालत के अधिकारियों का भेष धारण कर रहे साइबर अपराधियों ने उनसे 1.57 करोड़ रुपए की ठगी कर ली।

आरोपियों ने वीडियो कॉल के माध्यम से एक फर्जी अदालती सुनवाई की व्यवस्था की और पीड़ित को डराने-धमकाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश का नाम इस्तेमाल किया।

मुंबई पुलिस के अनुसार, पीड़ित की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर सेल ने अशोक पाल नामक एक ऑटो-रिक्शा चालक को गिरफ्तार किया, जिसने इस धोखाधड़ी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आरोप है कि उसने कमीशन के बदले अपने बैंक खाते का उपयोग कर धोखाधड़ी की राशि को ट्रांसफर करने की अनुमति दी थी।

पुलिस ने बताया कि यह घटना 6 दिसंबर, 2025 को शुरू हुई, जब पीड़ित को संजय कुमार गुप्ता नामक एक व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को दूरसंचार विभाग का अधिकारी बताया। फोन करने वाले ने आरोप लगाया कि पीड़ित के मोबाइल नंबर से आपत्तिजनक एमएमएस संदेश भेजे जा रहे हैं और बांद्रा क्राइम ब्रांच में उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

इसके बाद कॉल प्रदीप सावंत नाम के एक अन्य व्यक्ति को ट्रांसफर कर दी गई, जिसने खुद को पुलिस अधिकारी बताया। उसने पीड़ित को बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) स्थित पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करने के लिए कहा। जालसाजों ने पीड़ित पर मनी लॉन्ड्रिंग मामले में संलिप्तता का आरोप लगाया।

आरोपियों ने अपने दावों को सही साबित करने के लिए वीडियो कॉल के जरिए एक फर्जी अदालत का मंच तैयार किया और इसे भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीएस गावई के तहत चल रही कार्यवाही के रूप में प्रस्तुत किया। पीड़ित को धमकी दी गई कि यदि उसने सहयोग नहीं किया तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

जालसाजों ने पीड़ित को कहा कि वह अपनी सभी धनराशि, जिसमें फिक्स्ड डिपॉजिट, म्यूचुअल फंड और बचत खाते शामिल हैं, जांच के दौरान "सत्यापन" के लिए निर्दिष्ट बैंक खातों में स्थानांतरित कर दे। गिरफ्तारी के डर से, पीड़ित ने बात मान ली और 8 दिसंबर, 2025 से 3 जनवरी, 2026 के बीच कई लेनदेन में 1.57 करोड़ रुपए स्थानांतरित कर दिए।

धोखाधड़ी का मामला तब सामने आया जब धन हस्तांतरण पूरा होने के बाद आरोपी के फोन आने बंद हो गए, जिससे संदेह उत्पन्न हुआ। परिवार के सदस्यों और परिचितों से सलाह मशविरा करने के बाद, पीड़ित ने साइबर सेल से संपर्क किया और औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।

जांच के दौरान, पुलिस ने धन के लेन-देन का पता लगाया और पाया कि धनराशि का एक बड़ा हिस्सा अशोक पाल के बैंक खाते के माध्यम से भेजा गया था। पूछताछ करने पर, उसने कमीशन के बदले साइबर अपराधियों को अपना खाता इस्तेमाल करने की अनुमति देने की बात स्वीकार की।

पुलिस ने पाल को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि धोखाधड़ी नेटवर्क के बाकी सदस्यों की पहचान और उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं।

Point of View

NationPress
08/04/2026

Frequently Asked Questions

यह घटना कब हुई?
यह घटना 6 दिसंबर, 2025 को शुरू हुई।
धोखाधड़ी में कितनी राशि शामिल थी?
धोखाधड़ी में कुल 1.57 करोड़ रुपए की राशि शामिल थी।
पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
पुलिस ने अशोक पाल नामक एक आरोपी को गिरफ्तार किया है।
साइबर अपराधियों ने पीड़ित को कैसे ठगा?
उन्होंने पीड़ित को वीडियो कॉल के माध्यम से फर्जी अदालती सुनवाई का नाटक करके ठगा।
क्या और आरोपी हैं?
हाँ, बाकी सदस्यों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।
Nation Press