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गर्मी में मिट्टी के घड़े का पानी: शरीर को ठंडक देने का बेहतरीन उपाय

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गर्मी में मिट्टी के घड़े का पानी: शरीर को ठंडक देने का बेहतरीन उपाय

सारांश

गर्मियों में ठंडा पानी पीना राहत देता है, लेकिन यह शरीर को नुकसान भी पहुंचा सकता है। मिट्टी के घड़े का पानी एक सुरक्षित और प्राकृतिक विकल्प है, जो न केवल शरीर को ठंडा करता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है। जानिए इसे खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

मुख्य बातें

मिट्टी के घड़े का पानी शरीर को प्राकृतिक ठंडक देता है।
यह पाचन तंत्र को मजबूत करता है।
घड़े का पानी डिटॉक्स करने में मदद करता है।
सही घड़े का चुनाव स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
अत्यधिक ठंडा पानी पीने से बचें।

नई दिल्ली, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। गर्मियों की कड़ी धूप और बढ़ते तापमान में जब हम फ्रिज से ठंडा पानी पीते हैं, तो यह निश्चित रूप से राहत देता है, लेकिन यह शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है। इसके विपरीत, मिट्टी के घड़े का पानी एक ऐसा विकल्प है, जो शरीर को धीरे-धीरे ठंडा करता है और आंतरिक तंत्र को बिना नुकसान पहुंचाए आराम प्रदान करता है।

विज्ञान के अनुसार, जब हम बहुत ठंडा पानी पीते हैं, तो शरीर का तापमान अचानक प्रभावित होता है। इससे गले की नसें सिकुड़ सकती हैं और पाचन तंत्र भी धीमा हो सकता है। कई बार ठंडा पानी पीने से गले में खराश, खांसी या पाचन संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। वहीं, आयुर्वेद का मानना है कि अत्यधिक ठंडा पानी शरीर की पाचन शक्ति को कमजोर करता है, जिससे खाना सही से नहीं पचता और गैस, एसिडिटी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

इसके विपरीत, मिट्टी के घड़े का पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है। इसमें एक विशेष प्रक्रिया काम करती है, जिसमें घड़े की सतह से पानी धीरे-धीरे बाहरी हवा के संपर्क में आकर वाष्पित होता है। इस प्रक्रिया से पानी ठंडा होता है, और यह ठंडक शरीर के लिए संतुलित होती है।

आयुर्वेद में मिट्टी के बर्तनों का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि मिट्टी में ऐसे गुण होते हैं, जो पानी के पीएच स्तर को संतुलित रखने में सहायता करते हैं। घड़े का पानी पेट को ठंडा रखता है, जिससे एसिडिटी और जलन जैसी समस्याएं कम हो सकती हैं।

इसके अलावा, घड़े का पानी शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ प्राकृतिक रूप से डिटॉक्स करने में भी मदद करता है। यह शरीर से अनचाहे तत्वों को बाहर निकालता है। जब शरीर का तापमान संतुलित रहता है, तो रक्त संचार भी बेहतर होता है और त्वचा पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई देता है।

घड़े का चयन करते समय कुछ सावधानियाँ बरतनी चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसा घड़ा चुनना चाहिए जो पूरी तरह से प्राकृतिक मिट्टी से बना हो और जिसमें किसी भी प्रकार का रासायनिक या रंग न मिलाया गया हो। यदि बर्तन से अजीब गंध आती है या रंग हाथ में लगता है, तो उसे उपयोग नहीं करना चाहिए। अच्छी गुणवत्ता का घड़ा हल्की मिट्टी की सुगंध देता है और उसके अंदर का हिस्सा थोड़ा खुरदुरा होता है।

घड़े की मोटाई भी महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि मोटा घड़ा पानी को अधिक समय तक ठंडा रखता है और जल्दी टूटता भी नहीं है। साथ ही, खरीदने से पहले यह देख लेना चाहिए कि उसमें पानी भरकर कहीं रिसाव तो नहीं हो रहा है। सही आकार का घड़ा चुनना भी आवश्यक है, ताकि वह घर में आसानी से उपयोग किया जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह शरीर को ठंडा करने और पाचन में सहायता करने में मदद करता है। यह न केवल हाइड्रेशन में सहायक है, बल्कि शरीर को डिटॉक्स करने में भी मदद करता है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

घड़े का पानी पीने के क्या फायदे हैं?
घड़े का पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है, पाचन में सुधार करता है और एसिडिटी को कम करता है।
क्या ठंडा पानी पीने से स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है?
हां, अत्यधिक ठंडा पानी पीने से पाचन शक्ति कमजोर हो सकती है और गले में खराश हो सकती है।
घड़े का सही चुनाव कैसे करें?
सुनिश्चित करें कि घड़ा प्राकृतिक मिट्टी से बना हो और उसमें कोई रासायनिक या रंग न मिलाया गया हो।
घड़े का पानी कैसे डिटॉक्स करता है?
यह अनचाहे तत्वों को शरीर से बाहर निकालता है और हाइड्रेशन में मदद करता है।
क्या घड़े का पानी एसिडिटी को कम कर सकता है?
हां, यह पेट को ठंडा रखता है और एसिडिटी और जलन जैसी समस्याएं कम करता है।
राष्ट्र प्रेस
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