इंडोनेशिया की सबसे अम्लीय फिरोजी झील: विज्ञान के रहस्यों का खुलासा
सारांश
Key Takeaways
- इंडोनेशिया की कावाह इजेन झील दुनिया की सबसे अम्लीय झील है।
- इसका पीएच 0.3 से कम है, जो इसे अद्वितीय बनाता है।
- नीली आग का दृश्य रात में ही स्पष्ट होता है।
- यह स्थान यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त है।
- इजेन ज्वालामुखी सक्रिय है और यहां सल्फर का खनन होता है।
नई दिल्ली, 12 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। प्रकृति की खूबसूरती और रहस्यमयता का संगम देखने के लिए कई स्थान हैं, जो लोगों को चकित कर देते हैं। इंडोनेशिया के पूर्वी जावा में एक अद्वितीय झील है, जिसे यूनेस्को ने पृथ्वी की प्राकृतिक विरासत के रूप में मान्यता दी है।
यह स्थान ज्वालामुखीय भूभाग, असाधारण भूवैज्ञानिक संरचनाओं और सांस्कृतिक धरोहर से भरा हुआ है। यहां का सबसे प्रमुख आकर्षण माउंट इजेन है, जो एक स्ट्रैटोवोल्केनो है, जिसमें कावाह इजेन नाम की सुरम्य फिरोजी क्रेटर झील स्थित है। यूनेस्को के अनुसार, यह झील दुनिया की सबसे अम्लीय झील मानी जाती है।
इजेन जियोपार्क में ज्वालामुखी शंकुओं, क्रेटर्स और लावा प्रवाहों की उच्च उपस्थिति है। लाखों वर्षों की जटिल भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं ने इस क्षेत्र को आकार दिया है। इजेन काल्डेरा प्रणाली में लगभग 22 ज्वालामुखी शंकु हैं। यह क्षेत्र 2016 में यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त बेलंबंगन बायोस्फीयर रिजर्व से भी संबंधित है। कावाह इजेन क्रेटर झील का दृश्य अत्यंत खूबसूरत है, जिसमें पानी का रंग फिरोजी है।
अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के अनुसार, 22 अगस्त 2013 को लैंडसैट 8 सैटेलाइट ने इस झील का चित्र लिया। झील का पीएच स्तर 0.3 से भी कम है। तुलना में, नींबू का रस का पीएच 2 होता है। इतनी अम्लता के साथ, यह झील दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे अम्लीय क्रेटर झील मानी जाती है। इस झील की अम्लता का स्रोत मैग्मा से निकलने वाले वाष्पशील पदार्थ, चट्टानों के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया, वाष्पीकरण और भूमिगत गर्म पानी की प्रणालियों से है।
झील से निकलने वाली बन्युपहित नदी भी अम्लीय है, जिसका पीएच 2.5 से 3.5 के बीच होता है। यह नदी आसपास के इकोसिस्टम को प्रभावित करती है।
इजेन का सबसे रहस्यमय आकर्षण नीली आग (ब्लू फायर) का दृश्य है। क्रेटर की दरारों से निकलने वाली सल्फ्यूरिक गैसें 360 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पर जलती हैं, जिससे नीली लपटें उत्पन्न होती हैं। आम ज्वालामुखियों में लाल या नारंगी आग होती है, लेकिन इजेन में उच्च सल्फर की सांद्रता के कारण नीली आग बनती है। सूरज की रोशनी में यह दृश्य छिप जाता है, इसलिए यह केवल रात में ही स्पष्ट दिखाई देता है।
इजेन ज्वालामुखी सक्रिय है और यहां सल्फर का खनन भी किया जाता है। श्रमिक क्रेटर में पाइप लगाकर गैस को ठंडा कर सल्फर निकालते हैं। हालांकि, जहरीली गैसों के कारण यह कार्य खतरनाक होता है।