अंटार्कटिका की अनोखी अन्टर-सी झील: 3 अरब साल पुराने जीवन की कहानी
सारांश
Key Takeaways
- अन्टर-सी झील अंटार्कटिका की एक अद्वितीय झील है।
- यह झील हमेशा बर्फ से ढकी रहती है।
- यहाँ के पानी की रासायनिक संरचना विशेष है।
- स्ट्रोमेटोलाइट्स 3 अरब साल पुराने जीवन की कहानी बताते हैं।
- ग्लेशियल झीलों का फटना पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर सकता है।
नई दिल्ली, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अंटार्कटिका में स्थित अन्टर-सी झील पृथ्वी की सबसे अद्भुत झीलों में से एक मानी जाती है। यह क्वीन मौड लैंड के ग्रुबर पर्वतों के निकट अनुचिन ग्लेशियर के सिरे पर अवस्थित है। अत्यधिक सर्दियों के कारण यह झील सालभर बर्फ की एक मोटी परत से ढकी रहती है, जहां वार्षिक औसत तापमान शून्य से 10 डिग्री सेल्सियस नीचे बना रहता है।
नासा के लैंडसैट 9 उपग्रह पर लगे ओएलआई सेंसर ने 16 फरवरी 2026 को अंटार्कटिका की गर्मियों के दौरान इस झील की तस्वीर खींची, जिसमें बर्फ से ढका पानी और चारों ओर का ठंडा दृश्य स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। झील का अधिकांश पानी मौसमी तौर पर अनुचिन ग्लेशियर के पिघलने से प्राप्त होता है। सूरज की किरणें बर्फ के माध्यम से होकर नीचे के पानी को थोड़ा गर्म करती हैं, लेकिन तेज हवाएं और ठंडी सतह वाष्पीकरण और सब्लिमेशन को बढ़ावा देती हैं, जिससे सतह अधिक नहीं पिघलती।
अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा की आधिकारिक वेबसाइट पर इस झील के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध है। नासा के अनुसार, झील की अधिकतम गहराई लगभग 558 फीट है। इस झील के पानी की रासायनिक संरचना अत्यंत विशेष है। यहाँ घुली हुई ऑक्सीजन का स्तर बहुत अधिक, जबकि कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर कम है और पीएच का स्तर लगभग बेसिक यानी क्षारीय है। यह उन कुछ झीलों में से एक है जो हमेशा जमी रहती है और जहां बड़े कोनिकल स्ट्रोमेटोलाइट्स पाए जाते हैं।
ये स्ट्रोमेटोलाइट्स फोटोसिंथेटिक साइनोबैक्टीरिया का निर्माण करते हैं, जो चिपचिपी सतह पर सेडिमेंट को फंसाते हैं और कैल्शियम कार्बोनेट क्रस्ट बनाते हैं। ये संरचनाएं धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ती हैं और ऑक्सीजन छोड़ती हैं। वर्ष 2011 में एसईटीआई के जियोबायोलॉजिस्ट डेल एंडरसन और उनकी टीम ने इन स्ट्रोमेटोलाइट्स की खोज की थी। ये आधे मीटर तक ऊंचे हो सकते हैं, जबकि अन्य अंटार्कटिक झीलों जैसे लेक जॉयस में केवल कुछ सेंटीमीटर ऊंचे स्ट्रोमेटोलाइट्स पाए जाते हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि बर्फ के नीचे ज्वार-लहरों से सुरक्षा, शुद्ध पानी, कम गाद और कम रोशनी के कारण ये असामान्य रूप से ऊंचे बनते हैं। झील के सबसे बड़े जीव टार्डिग्रेड्स हैं, जो कठिन परिस्थितियों में जीवित रह सकते हैं। ये स्ट्रोमेटोलाइट्स 3 अरब साल पहले के जीवन की झलक प्रदान करते हैं, जब पृथ्वी पर केवल सूक्ष्मजीव ही मौजूद थे। ये उन जीवों में से हैं, जो ग्रीनलैंड और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में पाए जाने वाले सबसे पुराने फॉसिल्स में से एक हैं।
एस्ट्रोबायोलॉजिस्ट इसे यूरोपा, एन्सेलाडस जैसे बर्फीले चंद्रमाओं या मंगल ग्रह के प्राचीन बर्फीले झीलों के लिए एनालॉग मानते हैं। हालांकि, झील स्थिर दिखाई देती है, लेकिन कभी-कभी इसमें अचानक परिवर्तन होते हैं।
वर्ष 2019 में ओटावा विश्वविद्यालय के एक दल ने इस झील पर विस्तृत फील्डवर्क किया। नासा के आईसीईएसएटी-2 डेटा से पुष्टि हुई कि समीपवर्ती ओबर-सी झील के फटने से लगभग 1.75 करोड़ क्यूबिक मीटर पानी इस झील में समाहित हुआ था। इस प्रवाह के कारण झील के पीएच स्तर में परिवर्तन हुआ और कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा में वृद्धि हुई, जिससे सूक्ष्मजीवी जीवन की उत्पादकता में वृद्धि देखी गई। हालांकि, वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि ग्लेशियल झीलों के फटने से उत्पन्न होने वाली ऐसी बाढ़ अंटार्कटिका के पारिस्थितिकी तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।