निसार सैटेलाइट का डेटा सार्वजनिक, अंटार्कटिका में दिखी हमिंगबर्ड जैसी बर्फीली आकृति
सारांश
मुख्य बातें
नासा-इसरो के संयुक्त पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह निसार (NISAR) ने 20 जुलाई 2026 से अपने दोनों रडार उपकरणों — एल-बैंड और एस-बैंड — से संकलित वैज्ञानिक डेटा को आम जनता और शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है। इस डेटा में पूर्वी अंटार्कटिका का एक ऐसा दुर्लभ दृश्य सामने आया है, जिसमें टूटी-फूटी बर्फ की आकृति एक उड़ती हुई हमिंगबर्ड जैसी प्रतीत होती है।
डेटा सार्वजनिक होने का महत्त्व
नासा और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की संयुक्त टीमें अब इस उपग्रह से प्राप्त प्रोसेस्ड डेटा को निरंतर जारी करती रहेंगी। इसरो के अहमदाबाद स्थित स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर ने भूनिधि पोर्टल के माध्यम से एस-बैंड डेटा उपलब्ध कराना शुरू किया है, जबकि अमेरिकी पक्ष से 17 जून से कैलिब्रेटेड एल-बैंड डेटा लगातार जारी किया जा रहा है। इससे पहले जनवरी में कुछ नमूना डेटा और फरवरी में हज़ारों प्री-कैलिब्रेटेड डेटा फाइलें जारी की जा चुकी थीं।
यह डेटा वैज्ञानिकों को भूमि और हिमखंडों की गतिविधियों पर नज़र रखने, वनों और दलदली क्षेत्रों की निगरानी करने तथा भूकंप, भूस्खलन और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बाद की स्थिति का सटीक आकलन करने में सक्षम बनाएगा।
अंटार्कटिका में हमिंगबर्ड जैसी आकृति
मंगलवार को नासा ने एक प्रारंभिक रडार छवि जारी की, जिसमें पूर्वी अंटार्कटिका का नुनातक जतेरजावशिज्जा पर्वत दिखाई देता है। इस पर्वत के चारों ओर से बर्फ उत्तर-पूर्व दिशा में समुद्र की ओर प्रवाहित हो रही है। जब ग्लेशियर इस पर्वत के इर्द-गिर्द से गुज़रता है, तो भूमि की संरचना के कारण बर्फ पर दबाव पड़ता है और उसमें गहरी दरारें बन जाती हैं। इन दरारों की टूटी-फूटी बनावट रडार छवि में एक उड़ती हुई हमिंगबर्ड जैसी आकृति बनाती है।
रडार छवि में विभिन्न रंगों का विशेष अर्थ है — जहाँ बर्फ की सतह चिकनी थी, वहाँ से लौटे माइक्रोवेव सिग्नल मैजेंटा रंग में दिखे; दरारों और ऊबड़-खाबड़ क्षेत्रों से बिखरे सिग्नल हरे रंग में नज़र आए; और जहाँ दोनों प्रकार के सिग्नल एक साथ मिले, वे हिस्से सफेद रंग में दिखाई दिए। यह छवि अगस्त 2025 में एल-बैंड रडार से संकलित डेटा के आधार पर तैयार की गई थी, जब दोनों देशों की टीमें उपग्रह प्रणाली का परीक्षण कर रही थीं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी में सिग्नल विश्लेषण इंजीनियर सेओंगसू जियोंग ने कहा, 'सबसे पहले तो यह बेहद खूबसूरत तस्वीर है। इसमें कई ऐसे बारीक विवरण दिखाई देते हैं, जिनसे यह समझने में मदद मिलती है कि ग्लेशियर कैसे आगे बढ़ रहा है।' उन्होंने यह भी बताया कि रडार बर्फ और हिम की परतों के भीतर तक देख सकता है, इसलिए निसार अंटार्कटिका की बर्फ के ऐसे गुण उजागर करता है जो सामान्य कैमरों की पहुँच से परे हैं। जियोंग के अनुसार, 'निसार की मदद से हम सतह के नीचे छिपी चीज़ों को भी देख पा रहे हैं।'
मिशन की तकनीकी विशेषताएँ
निसार को 30 जुलाई 2025 को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया गया था। यह मिशन प्रतिदिन कई दर्जन टेराबाइट वैज्ञानिक डेटा उत्पन्न करता है और हर 12 दिन में दो बार पृथ्वी की भूमि और हिमाच्छादित क्षेत्रों की निगरानी करता है। उपग्रह दक्षिणी ध्रुव के निकट से लेकर उत्तरी गोलार्ध में 77.5 डिग्री अक्षांश तक के क्षेत्रों को स्कैन करता है।
इसमें लगा 12 मीटर चौड़ा ड्रम के आकार का रडार रिफ्लेक्टर नासा द्वारा अब तक अंतरिक्ष में भेजा गया सबसे बड़ा रडार एंटीना रिफ्लेक्टर है। सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह बादलों के आवरण और रात के अंधकार में भी स्पष्ट जानकारी एकत्र कर सकता है — एक क्षमता जो सामान्य ऑप्टिकल कैमरों में नहीं होती।
भारत-अमेरिका अंतरिक्ष सहयोग की नई कड़ी
निसार नासा और इसरो का पहला संयुक्त उपग्रह मिशन है और दोनों देशों के बीच वर्षों से चले आ रहे अंतरिक्ष सहयोग की एक महत्त्वपूर्ण कड़ी है। गौरतलब है कि इससे पहले नासा के उपकरण भारत के चंद्रयान-1 मिशन में भी उपयोग किए गए थे। यह डेटा ऐसे समय जारी हुआ है जब निसार की लॉन्चिंग की पहली वर्षगाँठ निकट है, जो इस वैश्विक पृथ्वी-अवलोकन मिशन की एक बड़ी उपलब्धि को रेखांकित करता है।