श्वेयलोंग-2 ने 84° उत्तरी अक्षांश पर आर्कटिक आइस स्टेशन सर्वेक्षण शुरू किया, 7 स्टेशनों पर होंगे 20+ वैज्ञानिक कार्य
सारांश
मुख्य बातें
चीन के 16वें आर्कटिक महासागर अभियान के तहत बर्फ भंजक जहाज श्वेयलोंग-2 (स्नो ड्रैगन-2) ने 9 अगस्त को 84 डिग्री उत्तरी अक्षांश के निकट मध्य आर्कटिक महासागर में इस यात्रा के पहले आइस स्टेशन का सर्वेक्षण कार्य आरंभ किया। यह अभियान आर्कटिक समुद्री बर्फ में तेज़ी से हो रहे परिवर्तनों और उनके पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले प्रभावों के अध्ययन के लिए महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक डेटा एकत्र करेगा।
मुख्य घटनाक्रम
बताया जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान श्वेयलोंग-2 कुल सात आइस स्टेशनों पर 20 से अधिक वैज्ञानिक कार्य संपन्न करेगा। इनमें डिस्पोजेबल बर्फ-आधारित बोया परिनियोजन, बर्फ कोर नमूनाकरण और समुद्री बर्फ का सुदूर संवेदन (रिमोट सेंसिंग) अवलोकन प्रमुख रूप से शामिल हैं।
वैज्ञानिक उद्देश्य
इस सर्वेक्षण के माध्यम से वायुमंडल, समुद्री बर्फ, ऊपरी महासागर और उपहिमनद पारिस्थितिक प्रक्रियाओं से जुड़े मापदंडों का व्यापक अवलोकन किया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय आर्कटिक में बर्फ पिघलने की दर को लेकर गहरी चिंता व्यक्त कर रहा है। एकत्र डेटा आर्कटिक पारिस्थितिकी तंत्र के विकास को समझने में सहायक होगा।
ध्रुवीय भालू से सुरक्षा की चुनौती
गौरतलब है कि आइस स्टेशन सर्वेक्षण कार्य के दौरान पोलर बेयर (ध्रुवीय भालू) एक प्रमुख खतरे के रूप में सामने आता है। अभियान दल ने इस जोखिम से निपटने के लिए पोलर बेयर से बचाव की विशेष योजना और आपातकालीन प्रोटोकॉल तैयार किए हैं, ताकि दल के सभी सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
आगे क्या
यह अभियान चीन के आर्कटिक अनुसंधान कार्यक्रम की एक कड़ी है, जो वर्षों से ध्रुवीय क्षेत्रों में वैज्ञानिक उपस्थिति को सुदृढ़ करता आ रहा है। शेष छह आइस स्टेशनों पर सर्वेक्षण कार्य यात्रा के दौरान क्रमशः संपन्न किए जाएंगे और प्राप्त आँकड़े अंतरराष्ट्रीय जलवायु अनुसंधान में योगदान देंगे।