चीन-रूस का चौथा संयुक्त आर्कटिक अभियान शुरू, 62 दिन चलेगा वैज्ञानिक सर्वेक्षण
सारांश
मुख्य बातें
चीन और रूस ने अपना चौथा संयुक्त आर्कटिक वैज्ञानिक अभियान 20 अगस्त 2026 को रूस के सुदूर पूर्वी शहर व्लादिवोस्तोक से रवाना किया, जो तेज़ी से बदलते आर्कटिक पर्यावरण का गहन अध्ययन करेगा। यह अभियान करीब 62 दिनों तक चलेगा और इसमें उत्तर-पश्चिमी प्रशांत महासागर तथा आर्कटिक महासागर पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
अभियान का दायरा और प्रमुख क्षेत्र
शोधकर्ता इस अभियान के दौरान चुक्ची सागर, पूर्वी साइबेरियाई सागर, लोमोनोसोव रिज, मकारोव बेसिन और अमुंडसेन बेसिन सहित कई समुद्री क्षेत्रों का दौरा करेंगे। इन इलाकों में बहु-विषयक व्यापक सर्वेक्षण किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन की पृष्ठभूमि में इन समुद्री क्षेत्रों के बदलते पर्यावरण का व्यवस्थित अध्ययन करना है।
अभियान समुद्री गतिशील प्रक्रियाओं, जलवायु परिवर्तन के पैटर्न और समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों की वैज्ञानिक समझ को और गहरा करने का प्रयास करेगा। वैश्विक जलवायु परिवर्तन के प्रति इन क्षेत्रों की प्रतिक्रिया-प्रक्रियाओं और तंत्रों को समझना भी प्रमुख लक्ष्यों में शामिल है।
आयोजक संस्थाएँ और भागीदारी
यह संयुक्त अभियान चीन के प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय के प्रथम समुद्र विज्ञान संस्थान, शानतोंग विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और रूसी विज्ञान अकादमी की सुदूर पूर्वी शाखा के प्रशांत समुद्र विज्ञान संस्थान द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया है। इस बार के अभियान में कुल 9 चीनी शोधकर्ता शामिल हैं।
विशेषज्ञों की राय
शुभारंभ समारोह में रूसी विज्ञान अकादमी की सुदूर पूर्वी शाखा के प्रशांत समुद्र विज्ञान संस्थान के कार्यवाहक निदेशक यूरी पावलोविच वासिलेंको ने कहा कि यह संयुक्त वैज्ञानिक अभियान रूस और चीन के बीच संबंधों को मजबूत करने के साथ ही आर्कटिक और प्रशांत क्षेत्रों में दोनों देशों के सहयोग को बढ़ावा देने में मदद करेगा।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वर्तमान में आर्कटिक समुद्री मार्ग से माल ढुलाई लगातार बढ़ रही है और वैश्विक अर्थव्यवस्था में इसका महत्व भी तेज़ी से बढ़ता जा रहा है, जिससे इन समुद्री क्षेत्रों में व्यापक वैज्ञानिक अनुसंधान की ज़रूरत और अधिक हो गई है।
चीन के प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय के प्रथम समुद्र विज्ञान संस्थान के निदेशक वेई त्सेश्युन ने कहा कि यह अभियान समुद्री क्षेत्र में चीन और रूस के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में एक ठोस कदम है। उन्होंने इसे नए युग में समुद्री विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी का एक उदाहरण बताया।
भू-राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि यह अभियान ऐसे समय में शुरू हुआ है जब पश्चिमी देशों के साथ रूस के संबंध तनावपूर्ण हैं और चीन आर्कटिक क्षेत्र में अपनी वैज्ञानिक उपस्थिति लगातार मज़बूत कर रहा है। आर्कटिक समुद्री मार्ग की व्यावसायिक संभावनाओं को देखते हुए यह वैज्ञानिक सहयोग दोनों देशों के लिए रणनीतिक महत्व भी रखता है।
आगे की राह
अभियान के 62 दिन पूरे होने पर शोधकर्ताओं द्वारा एकत्र किए गए डेटा से आर्कटिक जलवायु परिवर्तन की दिशा और गति को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी। यह शोध न केवल दोनों देशों, बल्कि वैश्विक जलवायु विज्ञान के लिए भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।