एडमिरल पापारो का भारत दौरा: अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने की मेजबानी, रक्षा साझेदारी पर बड़ी चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी हिंद-प्रशांत कमान के कमांडर एडमिरल सैमुअल जे. पापारो 3 अक्टूबर से 8 अक्टूबर 2026 तक भारत के छह दिवसीय दौरे पर हैं, जिसका उद्देश्य भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को सुदृढ़ करना और दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी सहयोग को नई ऊँचाई देना है। नई दिल्ली में भारत के शीर्ष सैन्य नेतृत्व के साथ उनकी बैठकें हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक भागीदारी का संकेत देती हैं।
राजदूत गोर की मेजबानी और एक्स पर संदेश
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने एडमिरल पापारो के स्वागत में एक विशेष शाम का आयोजन किया। गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, 'भारत में एडमिरल सैमुअल पापारो की मेजबानी करना सम्मान की बात है। अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण सैन्य नेताओं में से एक, एडमिरल पापारो अमेरिकी प्रशांत कमान का नेतृत्व करते हैं, जो देश की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी भौगोलिक लड़ाकू कमान है। यह कमान लगभग आधी दुनिया में फैले क्षेत्र में लगभग चार लाख सैन्य और असैन्य कर्मियों की निगरानी करती है।' गोर ने इस शाम को अमेरिका-भारत प्रमुख रक्षा साझेदारी की बढ़ती मज़बूती, महत्वाकांक्षा और महत्व का प्रतीक बताया।
भारतीय सैन्य नेतृत्व के साथ बैठकें
गोर के अनुसार, एडमिरल पापारो ने भारत के शीर्ष रक्षा अधिकारियों के साथ विस्तृत बातचीत की। इनमें चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि, थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ, वायु सेना के उप-प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित और एकीकृत रक्षा स्टाफ के प्रमुख एयर मार्शल तेजिंदर सिंह शामिल रहे।
इससे पूर्व एडमिरल पापारो ने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से भी मुलाकात की, जिसमें हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा साझेदारी और समुद्री सहयोग को विस्तार देने पर केंद्रित चर्चा हुई।
जयशंकर की प्रतिक्रिया
विदेश मंत्री जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'अमेरिकी प्रशांत कमान के कमांडर एडमिरल सैमुअल जे. पापारो से मिलकर खुशी हुई। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में हमारी सुरक्षा साझेदारी और समुद्री सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।' यह बयान इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत हिंद-प्रशांत में अपनी भूमिका को रणनीतिक दृष्टि से और सक्रिय रूप से परिभाषित कर रहा है।
दौरे के मुख्य एजेंडे
एडमिरल पापारो के इस दौरे में साझा सुरक्षा प्राथमिकताएँ, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, उभरती प्रौद्योगिकियाँ, क्षेत्रीय रणनीतिक स्थिरता और हिंद-प्रशांत में समुद्री सहयोग प्रमुख विषय रहे। गौरतलब है कि यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब हिंद-प्रशांत में चीन की बढ़ती उपस्थिति को लेकर क्षेत्रीय शक्तियों में कूटनीतिक सक्रियता तेज़ हुई है।
क्या होगा आगे
एडमिरल पापारो का यह दौरा 8 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगा। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की उच्च-स्तरीय बैठकें भारत-अमेरिका की 'मेजर डिफेंस पार्टनरशिप' को व्यावहारिक धरातल पर मज़बूत करती हैं और भविष्य में संयुक्त सैन्य अभ्यासों तथा रक्षा प्रौद्योगिकी सहयोग की राह प्रशस्त करती हैं।