12 अक्टूबर 2026
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एडमिरल पापारो की भारत यात्रा: अंडमान-निकोबार कमान प्रमुख से मुलाकात, हिंद-प्रशांत सुरक्षा पर मंथन

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एडमिरल पापारो की भारत यात्रा: अंडमान-निकोबार कमान प्रमुख से मुलाकात, हिंद-प्रशांत सुरक्षा पर मंथन

सारांश

अमेरिकी प्रशांत कमान प्रमुख एडमिरल पापारो की भारत यात्रा महज़ शिष्टाचार नहीं — यह हिंद-प्रशांत में बढ़ते चीनी दबाव के बीच भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को क्षेत्रीय कमांड स्तर तक ले जाने की सुनियोजित कोशिश है।

मुख्य बातें

एडमिरल सैमुअल पापारो ने 12 अक्टूबर 2026 को वाइस एडमिरल विनीत मैकार्टी से मुलाकात की।
बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग और द्विपक्षीय रक्षा साझेदारी को मज़बूत करने पर चर्चा हुई।
अंडमान और निकोबार कमान भारत की एकमात्र त्रि-सेवा संयुक्त सैन्य कमान है — थल, नौ और वायु सेना एकीकृत।
इससे पहले राजदूत सर्जियो गोर ने रूजवेल्ट हाउस में पापारो की मेजबानी की, जिसमें भारत के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी शामिल हुए।
यात्रा के बाद एडमिरल पापारो जापान के दौरे पर रवाना हुए।

अमेरिकी प्रशांत कमान (INDOPACOM) के प्रमुख एडमिरल सैमुअल पापारो ने 12 अक्टूबर 2026 को अंडमान और निकोबार कमान के कमांडर-इन-चीफ वाइस एडमिरल विनीत मैकार्टी से मुलाकात की, जिसमें भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को सुदृढ़ करने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा सुरक्षा हितों पर विस्तृत चर्चा हुई। नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने इस बैठक की पुष्टि सोमवार को की।

मुलाकात की पृष्ठभूमि

यह बैठक उस समय हुई जब एडमिरल पापारो जापान की यात्रा पर जाने से पूर्व भारत में थे। अमेरिकी दूतावास ने अपने आधिकारिक संदेश में स्पष्ट किया कि यह मुलाकात भारत-अमेरिका की प्रमुख रक्षा साझेदारी को आगे बढ़ाने के जारी प्रयासों का हिस्सा है। दूतावास के अनुसार, दोनों देशों के रक्षा बलों के बीच सहयोग को गहरा करने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए मिलकर काम किया जा रहा है।

बैठक में क्या हुई चर्चा

बैठक में द्विपक्षीय रक्षा सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य और वैश्विक घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ। सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्षों ने हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, संयुक्त अभ्यास और सूचना-साझाकरण व्यवस्था पर भी विमर्श किया। गौरतलब है कि यह एडमिरल पापारो की भारत यात्रा के दौरान हुई एकमात्र बैठक नहीं थी — इससे कुछ दिन पूर्व भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने नई दिल्ली स्थित रूजवेल्ट हाउस में उनकी मेजबानी की थी, जिसमें भारत के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।

अंडमान-निकोबार कमान का रणनीतिक महत्व

अंडमान और निकोबार कमान भारत की एकमात्र त्रि-सेवा संयुक्त सैन्य संचालन कमान है, जिसमें थल सेना, नौसेना और वायु सेना की क्षमताएँ एकीकृत रूप से कार्य करती हैं। हिंद महासागर के प्रवेशद्वार पर स्थित होने के कारण यह कमान भारत के समुद्री हितों की रक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह ऐसे समय में आया है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती नौसैनिक गतिविधियों को लेकर दोनों देश सतर्क हैं।

भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों का व्यापक संदर्भ

भारत और अमेरिका पिछले एक दशक में अपनी रक्षा साझेदारी को तेज़ी से गहरा कर चुके हैं। BECA, COMCASA और LEMOA जैसे प्रमुख रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य संपर्क, संयुक्त अभ्यास और खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। Quad ढाँचे के तहत भी दोनों देश हिंद-प्रशांत में स्वतंत्र और खुले समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए साझा प्रयास कर रहे हैं।

आगे की दिशा

विशेषज्ञों का मानना है कि INDOPACOM प्रमुख का अंडमान और निकोबार कमान के प्रमुख से सीधा संवाद दोनों देशों के बीच परिचालन-स्तरीय समन्वय की बढ़ती गहराई को दर्शाता है। ताज़ा बैठक ने स्पष्ट संकेत दिया है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग केवल नीतिगत स्तर तक सीमित नहीं, बल्कि अब क्षेत्रीय कमांड स्तर पर भी सक्रिय रूप से आगे बढ़ रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आलोचकों का कहना है कि उच्च-स्तरीय बैठकें तब तक रणनीतिक गहराई नहीं बनातीं जब तक संयुक्त अभ्यास, सूचना-साझाकरण और लॉजिस्टिक्स सहयोग संस्थागत रूप नहीं लेते।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एडमिरल पापारो और वाइस एडमिरल मैकार्टी की बैठक क्यों अहम है?
यह बैठक भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को नीतिगत स्तर से आगे ले जाकर क्षेत्रीय कमांड स्तर तक मज़बूत करने की दिशा में एक ठोस कदम है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते सामरिक दबाव के बीच INDOPACOM प्रमुख का अंडमान-निकोबार कमान प्रमुख से सीधा संवाद दोनों देशों के परिचालन समन्वय को दर्शाता है।
अंडमान और निकोबार कमान क्या है?
अंडमान और निकोबार कमान भारत की एकमात्र त्रि-सेवा संयुक्त सैन्य संचालन कमान है, जिसमें थल सेना, नौसेना और वायु सेना एकीकृत रूप से काम करती हैं। हिंद महासागर के प्रवेशद्वार पर रणनीतिक स्थिति के कारण यह भारत के समुद्री हितों की सुरक्षा में केंद्रीय भूमिका निभाती है।
एडमिरल पापारो की भारत यात्रा के दौरान और किनसे मुलाकात हुई?
एडमिरल पापारो ने वाइस एडमिरल मैकार्टी के अलावा भारत के कई वरिष्ठ रक्षा व सैन्य अधिकारियों से भी मुलाकात की। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने नई दिल्ली स्थित रूजवेल्ट हाउस में एक विशेष कार्यक्रम में उनकी मेजबानी की, जिसमें भारतीय सेना के वरिष्ठ प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी हिंद-प्रशांत में क्यों महत्वपूर्ण है?
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती नौसैनिक गतिविधियों के बीच भारत और अमेरिका स्वतंत्र एवं खुले समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए Quad ढाँचे के तहत मिलकर काम कर रहे हैं। BECA, COMCASA और LEMOA जैसे समझौतों ने दोनों देशों के बीच सैन्य संपर्क को संस्थागत आधार दिया है।
एडमिरल पापारो भारत के बाद कहाँ गए?
अमेरिकी दूतावास के अनुसार, एडमिरल पापारो भारत दौरे के बाद जापान की यात्रा पर रवाना हुए। यह यात्रा INDOPACOM प्रमुख के रूप में उनकी व्यापक एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय दौरे का हिस्सा बताई जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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