इंडो-पैसिफिक रणनीति में भारत अहम स्तंभ: अमेरिकी एडमिरल पपारो ने चीन को लेकर दिया बड़ा बयान
सारांश
Key Takeaways
- एडमिरल सैमुअल जॉन पपारो ने अमेरिकी सांसदों को बताया कि भारत उनकी सर्वोच्च रक्षा प्राथमिकता है और यह साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है।
- भारत MQ-9B सी गार्जियन ड्रोन खरीदने की योजना बना रहा है, जो हिंद महासागर में निगरानी क्षमता को निर्णायक रूप से बढ़ाएगा।
- क्वाड और मालाबार नौसैनिक अभ्यास को इंडो-पैसिफिक रणनीति की धुरी बताया गया।
- भारत की श्रीलंका और मॉरीशस में सक्रियता को चीन की स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स रणनीति के प्रत्युत्तर के रूप में देखा जा रहा है।
- पपारो ने चीन, रूस और उत्तर कोरिया के बढ़ते गठजोड़ को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जटिल और बहुआयामी खतरा बताया।
- अमेरिकी सांसद एडम स्मिथ ने कहा कि बीजिंग के प्रभाव को रोकने के लिए भारत जैसे साझेदारों के साथ विश्वसनीय संबंध बनाए रखना अपरिहार्य है।
वाशिंगटन, 25 अप्रैल: इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य आक्रामकता के बीच अमेरिका ने स्पष्ट संकेत दिया है कि भारत उसकी क्षेत्रीय रणनीति का सबसे मजबूत स्तंभ है। अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड के प्रमुख एडमिरल सैमुअल जॉन पपारो ने इस सप्ताह अमेरिकी सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के साथ रक्षा संबंध उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता हैं और यह साझेदारी लगातार गहरी होती जा रही है।
भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों की नई ऊंचाई
एडमिरल पपारो ने कहा कि मेजर डिफेंस पार्टनरशिप के ढांचे के तहत दोनों देशों के बीच सैन्य अभ्यास, रक्षा सौदे और रणनीतिक संवाद — तीनों मोर्चों पर उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने इसे अमेरिका की सबसे सक्रिय और गतिशील सैन्य साझेदारियों में से एक बताया।
विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा और पनडुब्बी गतिविधियों की निगरानी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार हुआ है। इसी कड़ी में भारत द्वारा विदेशी सैन्य बिक्री (FMS) चैनल के माध्यम से MQ-9B सी गार्जियन ड्रोन खरीदने की योजना को पपारो ने रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। यह ड्रोन हिंद महासागर में निगरानी क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा।
क्वाड और मालाबार अभ्यास — क्षेत्रीय संतुलन का आधार
एडमिरल पपारो ने क्वाड यानी भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया में भारत की भागीदारी को रेखांकित करते हुए कहा कि यह बहुपक्षीय मंच समुद्री सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स सहयोग में नई जमीन तोड़ रहा है। उन्होंने कहा कि मालाबार जैसे सैन्य अभ्यास, जिनमें चारों क्वाड देश हिस्सा लेते हैं, क्षेत्र में आपसी तालमेल और संयुक्त युद्धक क्षमता के प्रदर्शन के लिहाज से अत्यंत निर्णायक बन गए हैं।
गौरतलब है कि मालाबार नौसैनिक अभ्यास की शुरुआत 1992 में केवल भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय अभ्यास के रूप में हुई थी। आज यह चार देशों की संयुक्त शक्ति का प्रतीक बन चुका है — यह परिवर्तन स्वयं इस साझेदारी की गहराई को दर्शाता है।
हिंद महासागर में भारत की बढ़ती क्षेत्रीय भूमिका
पपारो ने भारत को दक्षिण एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता का प्रमुख स्रोत बताया। उन्होंने श्रीलंका में भारतीय निवेश और मॉरीशस के साथ हुए समझौतों का विशेष उल्लेख किया। इन कदमों का उद्देश्य समुद्री सहयोग को बढ़ावा देना और यह सुनिश्चित करना है कि रणनीतिक बुनियादी ढांचे पर विरोधी ताकतों का प्रभाव न पड़े।
यह संदर्भ अत्यंत महत्वपूर्ण है। चीन ने पिछले एक दशक में हंबनटोटा बंदरगाह (श्रीलंका), ग्वादर (पाकिस्तान) और जिबूती (अफ्रीका) जैसे ठिकानों पर अपनी उपस्थिति मजबूत की है — जिसे विशेषज्ञ स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स रणनीति कहते हैं। भारत का श्रीलंका और मॉरीशस में सक्रिय होना इसी रणनीतिक घेरेबंदी का प्रत्युत्तर माना जा रहा है।
पाकिस्तान तनाव के बावजूद भारत की निवारक क्षमता मजबूत
पपारो ने स्वीकार किया कि भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव जारी है और हालिया सैन्य टकराव पारंपरिक रूप से विवादित क्षेत्रों से आगे तक फैल गए हैं। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि भारत का मुख्य ध्यान पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी निवारक क्षमता और विश्वसनीय युद्धक शक्ति को बनाए रखने पर टिका हुआ है।
अमेरिकी सांसदों की प्रतिक्रिया और व्यापक रणनीतिक संदेश
इंडो-पैसिफिक कमांडर के बयान के साथ-साथ अमेरिकी सांसदों ने भी बीजिंग के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए भारत के साथ साझेदारी को अपरिहार्य बताया। प्रतिनिधि एडम स्मिथ ने कहा कि हमें उन संबंधों को बनाए रखने की जरूरत है और साझेदारों को यह विश्वास दिलाना होगा कि हम उनके साथ हैं।
पपारो ने इंडो-पैसिफिक में अमेरिका की रणनीति का मूल आधार उसकी साझेदारियों को बताया और इन गठबंधनों को वाशिंगटन का सबसे बड़ा असंतुलित रणनीतिक लाभ कहा। उन्होंने चेतावनी दी कि चीन, रूस और उत्तर कोरिया के बीच गहराते संबंध क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक जटिल और बहुआयामी खतरा उत्पन्न कर रहे हैं।
आने वाले महीनों में भारत-अमेरिका 2+2 वार्ता, मालाबार अभ्यास के अगले चरण और MQ-9B ड्रोन सौदे की अंतिम मंजूरी पर नजर रहेगी — जो इस रणनीतिक साझेदारी की अगली परीक्षा होगी।