ऐतिहासिक ली-मोदी शिखर सम्मेलन: 2030 तक 50 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य, 15 MoU पर हस्ताक्षर
सारांश
Key Takeaways
- PM नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग के बीच नई दिल्ली में द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ।
- दोनों देशों ने 2030 तक 50 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य तय किया, जो अभी 25 अरब डॉलर है।
- शिखर सम्मेलन के दौरान 15 समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
- AI, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा, वित्त और जहाज निर्माण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
- भारत में संयुक्त शिपयार्ड निर्माण के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
- CEPA (व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते) को अपग्रेड करने की वार्ता में तेजी लाने का संकल्प लिया गया।
नई दिल्ली/सियोल, 25 अप्रैल। भारत-दक्षिण कोरिया के बीच आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने नई दिल्ली में ऐतिहासिक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन आयोजित किया, जिसमें 2030 तक 50 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया। यह वर्तमान 25 अरब डॉलर के व्यापार से दोगुना है। दोनों देशों ने 15 समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर कर इस साझेदारी को ठोस आधार दिया।
शिखर सम्मेलन के प्रमुख निर्णय
राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने भारत और वियतनाम की छह दिवसीय यात्रा के दौरान दोनों देशों में शिखर-स्तरीय वार्ता की। योनहाप समाचार एजेंसी के अनुसार, यह यात्रा मुख्यतः मध्य-पूर्व संघर्ष से उपजी ऊर्जा अनिश्चितताओं और वैश्विक आपूर्ति शृंखला व्यवधानों से निपटने की रणनीति के तहत आयोजित की गई थी।
शिखर सम्मेलन में महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), वित्त और जहाज निर्माण जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग विस्तार पर सहमति बनी। दोनों पक्षों ने अपने 'व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते' (CEPA) को अपग्रेड करने के लिए वार्ता में तेजी लाने का संकल्प भी लिया।
जहाज निर्माण और ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा कदम
राष्ट्रपति ली ने जहाज निर्माण क्षेत्र में सहयोग को लेकर विशेष उत्साह जताया। एक महत्वपूर्ण समझौते के तहत भारत में एक संयुक्त शिपयार्ड के निर्माण की नींव रखी जाएगी। यह कदम भारत की समुद्री क्षमता और दक्षिण कोरिया की तकनीकी दक्षता के संयोजन से वैश्विक जहाज निर्माण बाजार में दोनों देशों की स्थिति मजबूत करेगा।
ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर ली ने कहा, "मध्य पूर्व में हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए, हम ऊर्जा संसाधनों और प्रमुख कच्चे माल की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए द्विपक्षीय सहयोग को मज़बूत करना जारी रखेंगे।"
वियतनाम के साथ भी बढ़ी साझेदारी
भारत यात्रा के बाद राष्ट्रपति ली ने हनोई में वियतनाम के शीर्ष नेता टो लाम के साथ शिखर-स्तरीय वार्ता की। इसमें ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में आर्थिक संबंध प्रगाढ़ करने और आपूर्ति शृंखला समन्वय बढ़ाने पर सहमति जताई गई।
रणनीतिक महत्व और व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और लगभग 1.5 अरब की आबादी वाला देश है, जो वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं के पुनर्गठन में एक अपरिहार्य भागीदार बन चुका है। दक्षिण कोरिया के लिए भारत न केवल एक विशाल उपभोक्ता बाजार है, बल्कि कुशल मानव संसाधन और प्राकृतिक खनिज संपदा का स्रोत भी है।
यह भी उल्लेखनीय है कि चीन पर निर्भरता कम करने की वैश्विक प्रवृत्ति के बीच भारत-दक्षिण कोरिया CEPA का उन्नयन दोनों देशों के लिए रणनीतिक विकल्प तैयार करता है। AI और महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में सहयोग इस दिशा में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इलेक्ट्रिक वाहन और सेमीकंडक्टर उद्योगों के लिए इन खनिजों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
आने वाले महीनों में CEPA उन्नयन वार्ता की प्रगति और संयुक्त शिपयार्ड परियोजना की रूपरेखा पर नजर रखी जाएगी, जो दोनों देशों के आर्थिक संबंधों की दिशा तय करेगी।