चंद्रमा पर वापसी: नासा ने 2028 तक 3 बड़े मिशन किए तय, जानें पूरी योजना
सारांश
Key Takeaways
- नासा ने 2028 तक अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की सतह पर उतारने का लक्ष्य तय किया है।
- आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत चंद्रमा पर स्थायी बेस बनाने की योजना है, जिसमें लैंडर, रोवर और पावर सिस्टम शामिल होंगे।
- लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में निजी अंतरिक्ष स्टेशन और कमर्शियल मिशनों का विस्तार नासा की रणनीति का तीसरा बड़ा लक्ष्य है।
- नासा के प्रस्तावित बजट में 23 प्रतिशत की कटौती से सांसदों और विशेषज्ञों ने चिंता जताई है।
- चीन के 2030 तक चंद्रमा पर पहुंचने की योजना के मद्देनजर अमेरिका के लिए यह मिशन रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- 1972 में अपोलो 17 के बाद यह पहली बार होगा जब कोई इंसान चंद्रमा की सतह पर कदम रखेगा।
वाशिंगटन, 25 अप्रैल — अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने आने वाले वर्षों के लिए अपनी नई अंतरिक्ष रणनीति के तहत तीन बड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं। इनमें 2028 तक इंसानों को फिर से चंद्रमा पर उतारना, वहां स्थायी मानव बेस की स्थापना करना और लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार करना शामिल है। यह योजना अमेरिका की राष्ट्रीय अंतरिक्ष नीति के अनुरूप है और वैश्विक अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा में अमेरिकी नेतृत्व को मजबूत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।
नासा प्रशासक का बयान और मिशन का फोकस
नासा प्रशासक जेरेड आइजकमैन ने कहा, "हमारा लक्ष्य चंद्रमा पर वापसी करना, लॉन्च की संख्या बढ़ाना और 2028 तक अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की सतह पर उतारना है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नासा के निकट भविष्य के मिशनों का केंद्रीय उद्देश्य है।
आइजकमैन ने यह भी बताया कि एजेंसी केवल चंद्रमा तक पहुंचने को अपना अंतिम लक्ष्य नहीं मानती। बल्कि वहां दीर्घकालिक मानव उपस्थिति स्थापित करने की व्यापक योजना है, जिसके लिए सरकारी और निजी क्षेत्र मिलकर काम करेंगे।
चंद्र बेस की स्थापना: क्या होगी तैयारी
चंद्रमा पर स्थायी उपस्थिति के लिए लैंडर, रोवर, पावर सिस्टम और कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी जैसी बुनियादी जरूरतों को प्राथमिकता दी जाएगी। इस पूरे ढांचे को इस तरह तैयार किया जाएगा कि चंद्रमा पर निरंतर ऑपरेशन संभव हो सके।
गौरतलब है कि 1972 में अपोलो 17 मिशन के बाद से कोई भी इंसान चंद्रमा पर नहीं गया है। यानी 50 से अधिक वर्षों के अंतराल के बाद यह वापसी होगी, जो इसे ऐतिहासिक बनाती है। इसी उद्देश्य के लिए आर्टेमिस कार्यक्रम शुरू किया गया था, जिसके तहत हाल ही में आर्टेमिस II मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की कक्षा में घुमाकर सुरक्षित वापस लाया गया।
लो-अर्थ ऑर्बिट में व्यावसायिक विस्तार
नासा की रणनीति का तीसरा अहम स्तंभ लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में कमर्शियल गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इसके अंतर्गत निजी अंतरिक्ष स्टेशन विकसित किए जाएंगे और उद्योगों के लिए नए व्यावसायिक अवसर सृजित किए जाएंगे।
आइजकमैन ने कहा, "हम उद्योग जगत के साथ मिलकर कमर्शियल एस्ट्रोनॉट मिशन और उससे जुड़े राजस्व के अवसरों को विस्तार देना चाहते हैं।" साथ ही, सैटेलाइट लॉन्च और अर्थ ऑब्जर्वेशन जैसे कार्यों के लिए निजी कंपनियों पर अधिक निर्भरता बढ़ाई जाएगी, जबकि नासा स्वयं डीप स्पेस एक्सप्लोरेशन और न्यूक्लियर प्रोपल्शन जैसे जटिल मिशनों पर ध्यान केंद्रित करेगा।
बजट कटौती और संसद की चिंताएं
इस महत्वाकांक्षी योजना पर अमेरिकी सांसदों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। संसदीय सुनवाई के दौरान सामने आया कि प्रस्तावित बजट में पिछले वर्ष की तुलना में करीब 23 प्रतिशत की कटौती की गई है, जो इन लक्ष्यों की प्राप्ति को कठिन बना सकती है।
स्पेस कमेटी के चेयरमैन ब्रायन बैबिन ने चेतावनी दी कि कम फंडिंग से अमेरिका की अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता कमजोर हो सकती है, खासकर तब जब चीन तेजी से अपने चंद्र मिशनों को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा, "नासा को कम फंड देना कतई समझदारी नहीं है।"
रैंकिंग मेंबर जो लोफग्रेन ने आशंका जताई कि इस योजना से विज्ञान और प्रौद्योगिकी के कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम प्रभावित हो सकते हैं, विशेषकर वे जो मानव अंतरिक्ष मिशनों से प्रत्यक्ष रूप से नहीं जुड़े हैं। अन्य सांसदों ने वर्कफोर्स, अर्थ साइंस मिशन और एरोनॉटिक्स रिसर्च पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को लेकर भी चिंता व्यक्त की।
नासा का जवाब और भविष्य की दिशा
आइजकमैन ने इन आशंकाओं का जवाब देते हुए कहा कि नासा हमेशा कानून के दायरे में रहकर काम करेगा और संसाधनों के उपयोग में पूर्ण पारदर्शिता बरती जाएगी। उन्होंने कहा, "हम ऐसे कार्यक्रम नहीं बना सकते जो इतने विशाल हों कि विफल न हो सकें, लेकिन इतने महंगे भी हों कि सफल ही न हो पाएं।"
उन्होंने स्पष्ट किया कि नासा अब बड़े और खर्चीले प्रोजेक्ट्स की बजाय छोटे, केंद्रित और परिणामोन्मुख निवेश को प्राथमिकता देगा। मिशनों के बीच लंबे अंतराल को भी कम करने पर जोर दिया जाएगा, क्योंकि यह प्रगति को बाधित करता है।
1958 में स्थापित नासा दशकों से अंतरिक्ष अन्वेषण में वैश्विक नेतृत्व करता आया है। अब जब चीन 2030 तक अपने अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजने की योजना बना रहा है, तो अमेरिका के लिए 2028 की समयसीमा रणनीतिक रूप से और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। आने वाले महीनों में आर्टेमिस III मिशन की तैयारियों और बजट आवंटन पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।