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कैंसर योद्धाओं को उपराष्ट्रपति का सलाम: आयुष्मान भारत से 68 लाख उपचार, 75% ग्रामीण लाभार्थी

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कैंसर योद्धाओं को उपराष्ट्रपति का सलाम: आयुष्मान भारत से 68 लाख उपचार, 75% ग्रामीण लाभार्थी

सारांश

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने जयपुर में 23वें कैंसर उत्तरजीवी दिवस पर कैंसर विजेताओं को योद्धा बताया। आयुष्मान भारत से ₹13,000 करोड़ से 68 लाख उपचार, 75% ग्रामीण लाभार्थी। एचपीवी टीकाकरण से 1 करोड़ किशोरियों को सुरक्षा का लक्ष्य।

मुख्य बातें

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 25 अप्रैल 2025 को जयपुर में 23वें कैंसर उत्तरजीवी दिवस पर कैंसर विजेताओं को 'सच्चे योद्धा' बताया।
आयुष्मान भारत योजना के तहत ₹13,000 करोड़ से अधिक की लागत से 68 लाख से ज्यादा कैंसर उपचार प्रदान किए गए हैं।
इन उपचारों में 75 प्रतिशत लाभार्थी ग्रामीण क्षेत्रों से हैं, जो योजना की व्यापक पहुंच दर्शाता है।
देशभर में जिला अस्पतालों में 450 से अधिक डे केयर कैंसर सेंटर पहले से कार्यरत हैं।
राष्ट्रव्यापी एचपीवी टीकाकरण अभियान के तहत एक करोड़ से अधिक किशोरियों को गर्भाशय ग्रीवा कैंसर से सुरक्षित करने का लक्ष्य है।
आईसीएमआर के अनुसार भारत में प्रतिवर्ष 15 लाख से अधिक नए कैंसर मामले दर्ज होते हैं।

जयपुर, 25 अप्रैल। भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शनिवार को जयपुर स्थित भगवान महावीर कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र में आयोजित 23वें कैंसर उत्तरजीवी दिवस पर कहा कि कैंसर से जीत हासिल करने वाले लोग सच्चे योद्धा हैं और उनका जीवन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने यह भी बताया कि आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत अब तक 68 लाख से अधिक कैंसर उपचार उपलब्ध कराए गए हैं, जिनमें से करीब 75 प्रतिशत लाभार्थी ग्रामीण क्षेत्रों से हैं।

कैंसर उत्तरजीवी दिवस: साहस और आशा का उत्सव

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यह दिवस केवल एक समारोह नहीं, बल्कि अटूट मानवीय साहस और आशा का उत्सव है। उन्होंने भगवान महावीर कैंसर अस्पताल और केजी कोठारी मेमोरियल ट्रस्ट की प्रशंसा की, जो वर्ष 1997 से कैंसर रोगियों की निःस्वार्थ सेवा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस संस्था ने अपने समर्पण और करुणा से अनगिनत जीवन बदले हैं।

कैंसर से उबरे लोगों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, "आपकी कहानियां दूसरों के लिए आशा की किरण हैं।" उन्होंने डॉक्टरों, नर्सों और देखभालकर्ताओं की अथक सेवा के प्रति आभार भी व्यक्त किया।

भारत में कैंसर का बढ़ता बोझ और सरकारी पहलें

उपराष्ट्रपति ने बताया कि आईसीएमआर के राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम के अनुसार भारत में प्रतिवर्ष 15 लाख से अधिक नए कैंसर मामले दर्ज होते हैं। यह आंकड़ा देश की स्वास्थ्य प्रणाली के लिए एक गंभीर चुनौती है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने कैंसर की रोकथाम, शीघ्र निदान और उपचार के लिए ठोस कदम उठाए हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत 13,000 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से 68 लाख से अधिक कैंसर उपचार प्रदान किए गए हैं। इनमें 75 प्रतिशत लाभार्थी ग्रामीण पृष्ठभूमि से हैं, जो दर्शाता है कि यह योजना वास्तव में जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की खाई पाट रही है।

उल्लेखनीय है कि ग्रामीण भारत में कैंसर की पहचान अक्सर देर से होती है और उपचार की पहुंच सीमित रहती है। ऐसे में आयुष्मान भारत की यह उपलब्धि नीतिगत दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

डे केयर कैंसर सेंटर और एचपीवी टीकाकरण अभियान

उपराष्ट्रपति ने बताया कि केंद्र सरकार देशभर के जिला अस्पतालों में डे केयर कैंसर सेंटर स्थापित कर रही है, जिनमें से 450 से अधिक सेंटर पहले से ही सक्रिय हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से प्रारंभिक कैंसर जांच और जिला व उप-मंडल अस्पतालों में कैंसर रोधी दवाओं को आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल किया गया है।

निवारक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ी पहल का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि इस वर्ष गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से बचाव के लिए राष्ट्रव्यापी एचपीवी टीकाकरण अभियान शुरू किया गया है, जिसका लक्ष्य एक करोड़ से अधिक किशोरियों को सुरक्षित करना है। उन्होंने इस अभियान में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और राजस्थान सरकार के प्रयासों की विशेष सराहना की।

संस्थानों में समन्वय और जीवनशैली में बदलाव की अपील

उपराष्ट्रपति ने देशभर के कैंसर उपचार संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय और ज्ञान साझाकरण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कैंसर देखभाल में नवीनतम तकनीकी प्रगति को सभी सार्वजनिक और निजी अस्पतालों तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि गुणवत्तापूर्ण इलाज की पहुंच व्यापक हो सके।

उन्होंने धूम्रपान, तंबाकू सेवन, नशीली दवाओं और अस्वास्थ्यकर फास्ट फूड की आदतों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव कैंसर के जोखिम को उल्लेखनीय रूप से कम कर सकता है।

अस्पताल के स्क्रीनिंग अभियानों, मोबाइल मेडिकल यूनिट, नुक्कड़ नाटक, शैक्षिक व्याख्यान और सामुदायिक शिविरों की भी उपराष्ट्रपति ने भूरि-भूरि प्रशंसा की और कहा कि इन प्रयासों ने शीघ्र निदान के जरिए अनेक जीवन बचाए हैं।

इस अवसर पर राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसानराव बागडे, राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खिमसर, भगवान महावीर कैंसर अस्पताल के अध्यक्ष नवरतन कोठारी और अन्य गणमान्य अतिथि भी उपस्थित रहे। उपराष्ट्रपति ने कार्यक्रम में कैंसर से विजय पाने वाले लोगों को सम्मानित भी किया।

आने वाले समय में सरकार की योजना है कि डे केयर कैंसर सेंटरों का नेटवर्क और विस्तृत किया जाए तथा एचपीवी टीकाकरण अभियान को और राज्यों में फैलाया जाए, जिससे भारत कैंसर के खिलाफ अपनी लड़ाई को और मजबूत कर सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी सफलता जमीनी क्रियान्वयन और जागरूकता पर निर्भर करेगी। असली परीक्षा तब होगी जब ये योजनाएं आंकड़ों से निकलकर आखिरी छोर के गांव तक पहुंचेंगी।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कैंसर उत्तरजीवी दिवस 2025 पर उपराष्ट्रपति ने क्या कहा?
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने जयपुर में 23वें कैंसर उत्तरजीवी दिवस पर कैंसर से जीतने वाले लोगों को 'सच्चे योद्धा' बताया। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि 68 लाख से अधिक कैंसर उपचार प्रदान किए गए हैं।
आयुष्मान भारत से कैंसर उपचार में कितना खर्च हुआ और कितने लोगों को फायदा मिला?
आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 13,000 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से 68 लाख से ज्यादा कैंसर उपचार उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें लगभग 75 प्रतिशत लाभार्थी ग्रामीण क्षेत्रों से हैं।
भारत में एचपीवी टीकाकरण अभियान का लक्ष्य क्या है?
केंद्र सरकार ने गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से बचाव के लिए राष्ट्रव्यापी एचपीवी टीकाकरण अभियान शुरू किया है, जिसका लक्ष्य एक करोड़ से अधिक किशोरियों को कवर करना है। यह अभियान 2025 की शुरुआत में लॉन्च किया गया।
भारत में प्रतिवर्ष कितने कैंसर के मामले सामने आते हैं?
आईसीएमआर के राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम के अनुसार भारत में हर साल 15 लाख से अधिक नए कैंसर मामले दर्ज होते हैं। यह आंकड़ा देश में कैंसर के बढ़ते बोझ को दर्शाता है।
देशभर में कितने डे केयर कैंसर सेंटर काम कर रहे हैं?
केंद्र सरकार जिला अस्पतालों में डे केयर कैंसर सेंटर स्थापित कर रही है और अब तक 450 से अधिक सेंटर सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। इन सेंटरों का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर कैंसर उपचार सुलभ कराना है।
राष्ट्र प्रेस
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