हिज्बुल्लाह को ईरान का समर्थन 'रणनीतिक जिम्मेदारी': मोजतबा खामेनेई का शेख नईम कासिम को पत्र
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह सैयद मोजतबा हुसैनी खामेनेई ने रविवार, 26 जुलाई को हिज्बुल्लाह के महासचिव शेख नईम कासिम को एक पत्र लिखकर स्पष्ट किया कि हिज्बुल्लाह के प्रति ईरान का समर्थन महज़ कूटनीतिक सहानुभूति नहीं, बल्कि एक 'रणनीतिक जिम्मेदारी' है। यह पत्र तब आया जब हिज्बुल्लाह प्रमुख ने ईरान के प्रति अपनी निष्ठा दोहराते हुए एक पत्र भेजा था, जिसके जवाब में खामेनेई ने संगठन की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
खामेनेई का पत्र: मुख्य बातें
ईरानी सरकारी समाचार एजेंसी इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज़ एजेंसी (आईआरएनए) के अनुसार, खामेनेई ने अपने पत्र में लिखा कि हिज्बुल्लाह इज़रायल की 'भयंकर आक्रामकता' के सामने 'एक मजबूत चट्टान की तरह' डटा हुआ है। उन्होंने कहा, 'इस्लामी क्रांति के महान शहीद नेता इमाम सैयद अली खामेनेई की तय की गई नीति के अनुसार, इस्लामी गणराज्य ईरान इन दबे-कुचले लेकिन शक्तिशाली मुजाहिदीन की रक्षा को अपनी रणनीतिक जिम्मेदारी मानता है।'
यह बयान ईरान की उस दीर्घकालिक नीति की पुष्टि करता है जिसके तहत वह 'प्रतिरोध मोर्चे' के संगठनों को वैचारिक, सामरिक और भौतिक समर्थन देता आया है। गौरतलब है कि यह पत्र ऐसे समय में आया है जब लेबनान में संघर्ष की स्थिति और क्षेत्रीय तनाव अपने चरम पर हैं।
अमेरिका पर तीखा प्रहार
खामेनेई ने पत्र के अलावा ईरानी जनता के नाम जारी एक संदेश में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षरों को 'बेकार और अमान्य' करार दिया। उनका यह बयान ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते (एमओयू) के कथित उल्लंघन के संदर्भ में था।
उन्होंने कहा कि अमेरिका ने 'एक बार फिर अपना असली चेहरा दिखा दिया है' और यह अनुभव इस बात का प्रमाण है कि अमेरिका का रवैया 'अविश्वसनीय, तर्कहीन और गलत' है। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने यह भी कहा कि एमओयू के बार-बार उल्लंघन ने यह सिद्ध कर दिया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की कोई कीमत नहीं।
युद्ध जैसी नीतियों पर कड़ी चेतावनी
खामेनेई ने अमेरिका को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वह युद्ध जैसी नीतियाँ जारी रखता है और ईरान पर दबाव बढ़ाने की कोशिश करता है, तो उसे ईरान और 'प्रतिरोध मोर्चे' से ऐसा जवाब मिलेगा जिसे वह कभी नहीं भूल पाएगा। यह बयान क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच तेहरान के आक्रामक रुख का संकेत है।
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में कई मोर्चों पर संघर्ष जारी है और ईरान-अमेरिका संबंध एक नाजुक दौर से गुज़र रहे हैं।
रणनीतिक संदर्भ और आगे की राह
विशेषज्ञों के अनुसार, खामेनेई का यह पत्र ईरान की 'एक्सिस ऑफ रेज़िस्टेंस' नीति की आधिकारिक पुनर्पुष्टि है, जिसके तहत हिज्बुल्लाह, हमास और यमन के हूती जैसे समूहों को समर्थन दिया जाता है। आलोचकों का कहना है कि इस नीति ने क्षेत्र में अस्थिरता को बढ़ावा दिया है, जबकि तेहरान इसे इज़रायली और पश्चिमी 'आक्रामकता' के विरुद्ध आत्मरक्षा बताता है।
आने वाले हफ्तों में ईरान-अमेरिका संबंधों की दिशा और हिज्बुल्लाह की क्षेत्रीय भूमिका पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़र बनी रहेगी।