मोजतबा खामेनेई का कहना है, तुर्की और ओमान पर हमलों में ईरान का हाथ नहीं
सारांश
Key Takeaways
- ईरान के सुप्रीम लीडर ने हालिया हमलों में अपने देश की संलिप्तता को नकारा।
- खामेनेई ने तुर्की और ओमान के साथ अच्छे संबंधों पर जोर दिया।
- उन्होंने इजरायल के संभावित 'फॉल्स फ्लैग' ऑपरेशनों के प्रति चेतावनी दी।
- नए साल को प्रतिरोध अर्थव्यवस्था का वर्ष घोषित किया गया।
तेहरान, 21 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने तुर्की और ओमान के कुछ क्षेत्रों पर हाल में हुए हमलों से ईरान के सशस्त्र बलों या उनके सहयोगियों के संबंध में किसी भी प्रकार की संलिप्तता को नकार किया है।
एक बयान में, खामेनेई ने कहा कि ये हमले ईरान द्वारा नहीं किए गए थे। उन्होंने यह बात शुक्रवार को ईद-उल-फितर के अवसर पर एक संदेश में कही, जो रमजान के समाप्ति और 21 मार्च को ईरानी नए साल की शुरुआत 'नवरोज' का प्रतीक है।
खामेनेई ने तुर्की और ओमान के साथ ईरान के अच्छे संबंधों पर जोर दिया। उन्होंने इजरायल की चालबाजियों के प्रति चेतावनी दी कि इजरायल पड़ोसी देशों में फूट डालने के लिए 'फॉल्स फ्लैग' ऑपरेशनों का सहारा ले सकता है।
साथ ही, उन्होंने अफगानिस्तान और पाकिस्तान से आपसी संबंधों को बेहतर बनाने की अपील की और इस दिशा में कदम उठाने की तत्परता व्यक्त की।
खामेनेई ने नागरिकों के जीवनस्तर और देश के बुनियादी ढांचे में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया, जिसमें जनता की भलाई और संपत्ति निर्माण पर ध्यान केंद्रित करने की बात की गई। उन्होंने नए साल को राष्ट्रीय एकता का प्रतीक और प्रतिरोध अर्थव्यवस्था का वर्ष घोषित किया।
इस बीच, नाटो ने तुर्की के दक्षिणी अदाना प्रांत में एक अतिरिक्त पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किया है। तुर्की के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह कदम पिछले सप्ताह ईरान द्वारा दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को रोकने के बाद उठाया गया।
तुर्की के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रियर एडमिरल जेकी अकतुर्क ने कहा कि हमारे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
अकतुर्क ने कहा कि 13 मार्च को ईरान से लॉन्च की गई एक मिसाइल तुर्की के एयरस्पेस में घुस गई थी, जिसे नाटो एयर और मिसाइल डिफेंस यूनिट्स ने निष्क्रिय कर दिया।
यह ध्यान देने योग्य है कि 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने तेहरान और ईरान के कई अन्य शहरों पर संयुक्त हमले किए थे, जिसमें खामेनेई सहित कई वरिष्ठ सैन्य कमांडर और नागरिक मारे गए थे। इसके जवाब में, ईरान ने इजरायल और मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए।