मोजतबा खामेनेई ने ट्रंप के दावों का दिया करारा जवाब, कहा- मुआवजा दो या भुगतो अंजाम
सारांश
Key Takeaways
- मोजतबा खामेनेई ने मुआवजे की मांग की है।
- ईरान अमेरिका के दबाव में नहीं आएगा।
- विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि ईरान युद्धविराम की मांग नहीं करेगा।
तेहरान, 16 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार यह कह रहे हैं कि ईरान के खिलाफ 28 फरवरी से शुरू हुई युद्ध अब अपने अंतिम चरण में है और ईरान का जवाबी कार्रवाई करने का साहस खत्म हो गया है। जबकि दूसरी ओर, ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई और विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के तेवर यह संकेत नहीं दे रहे कि वे इजरायल और अमेरिका के सामने झुकने को तैयार हैं।
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने दुश्मन देश से मुआवजे की मांग की है, यह कहते हुए कि हम दुश्मन से मुआवजा लेंगे। अगर वे मुआवजा देने से मना करते हैं, तो हम उनकी संपत्ति पर कब्जा कर लेंगे, और अगर यह भी संभव नहीं है, तो हम उनकी संपत्ति को नष्ट कर देंगे।
यह जानकारी सिन्हुआ समाचार एजेंसी ने खामेनेई के टेलीग्राम अकाउंट पर किए गए एक पोस्ट के हवाले से दी है। इससे पहले, खामेनेई ने देश के नाम अपने पहले संदेश में निरंतर प्रतिरोध का आह्वान किया।
खामेनेई ने एक लिखित संदेश में संघर्ष में मारे गए लोगों का बदला लेने की कसम खाई और जोर देकर कहा कि तेहरान अपने शहीदों के खून का बदला लेने से पीछे नहीं हटेगा।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह संदेश ईरानी सरकारी टेलीविजन पर एक महिला एंकर द्वारा पढ़ा गया। इसमें कहा गया कि ईरान जरूरत पड़ने पर अन्य मोर्चे भी खोल सकता है और पड़ोसी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध चाहता है।
इस बीच, अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने शुक्रवार को कहा कि ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई घायल हो गए हैं और उन्हें छिपने के लिए मजबूर होना पड़ा है। हेगसेथ ने बताया कि सैन्य अभियान जारी रहने के कारण ईरान के नेतृत्व पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
28 फरवरी को, इजरायल और अमेरिका ने तेहरान और अन्य ईरानी शहरों पर संयुक्त हमले किए, जिसमें ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई, वरिष्ठ सैन्य कमांडर और नागरिक मारे गए। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए मध्य पूर्व में इजराइल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइलों और ड्रोन हमलों का सहारा लिया।
विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने यह स्पष्ट किया है कि ईरान अमेरिका के साथ युद्धविराम या वार्ता की मांग नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि तेहरान जब तक आवश्यक समझेगा, खुद का बचाव करने के लिए तैयार है।
सिन्हुआ के अनुसार, रविवार को प्रसारित सीबीएस न्यूज के साथ एक साक्षात्कार में अराघची ने उन दावों को खारिज किया कि ईरान ने युद्ध को समाप्त करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि ईरान ने कभी युद्धविराम की मांग नहीं की और न ही इस बारे में बातचीत की। हम तब तक अपनी रक्षा करते रहेंगे, जब तक यह आवश्यक होगा।
अराघची ने कहा कि ईरान तब तक सैन्य अभियान जारी रखेगा, जब तक डोनाल्ड ट्रंप इस निष्कर्ष पर नहीं पहुँच जाते कि यह एक अवैध युद्ध है।
अराघची ने होर्मुज जलडमरूमध्य के बारे में कहा कि ईरान ने इस जलमार्ग को बंद नहीं किया है। यह हमारे सैन्य बलों को तय करना है। उन्होंने पहले ही विभिन्न देशों के कुछ जहाजों को गुजरने की अनुमति देने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, अराघची ने दोहराया कि तेहरान ने कभी परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं की।
मंत्री ने बताया कि ईरान ने अमेरिका के साथ हमले से पहले हुई वार्ता में अपने संवर्धित यूरेनियम को कम करने पर सहमति जताई थी, लेकिन परमाणु संयंत्रों पर हुए हमलों के बाद अब वह संवर्धित सामग्री मलबे के नीचे दब गई है। उन्होंने यह भी बताया कि ईरान की क्षतिग्रस्त स्थलों से संवर्धित यूरेनियम के भंडार को पुनः प्राप्त करने की कोई योजना नहीं है।
- राष्ट्र प्रेस