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नोएडा: बीएनएसएस धारा 130 पर जिला प्रशासन का बड़ा स्पष्टीकरण, DM ने कहा — कोई आदेश जारी नहीं

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नोएडा: बीएनएसएस धारा 130 पर जिला प्रशासन का बड़ा स्पष्टीकरण, DM ने कहा — कोई आदेश जारी नहीं

सारांश

नोएडा जिला प्रशासन ने बीएनएसएस धारा 130 पर स्पष्ट किया — DM कार्यालय से कोई आदेश नहीं दिया गया। यह बयान उस विवाद के बाद आया जिसमें एक छात्र को ₹5 लाख के मुचलके का नोटिस दिया गया था — जिसे बाद में वापस ले लिया गया।

मुख्य बातें

नोएडा जिला प्रशासन ने 9 सितंबर को आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि बीएनएसएस धारा 130 के तहत जिला मजिस्ट्रेट की ओर से कोई आदेश पारित नहीं किया गया।
पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने के बाद बीएनएसएस की समस्त संबंधित शक्तियाँ पुलिस आयुक्तालय को हस्तांतरित की जा चुकी हैं।
गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत त्रिपाठी को जंतर मंतर प्रदर्शन में शामिल होने पर ₹5 लाख के मुचलके का नोटिस जारी किया गया था।
सोशल मीडिया पर विवाद बढ़ने के बाद एसीपी 3 की कोर्ट ने वह नोटिस वापस ले लिया।
कमिश्नरेट वाले जिलों में बीएनएसएस से जुड़ी फाइलें DM, ADM या SDM के कार्यालय तक नहीं पहुँचती हैं।

नोएडा जिला प्रशासन ने 9 सितंबर 2026 को एक आधिकारिक बयान जारी कर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 130 के तहत अपनी भूमिका को लेकर चल रही अटकलों को सिरे से खारिज किया। जिला मजिस्ट्रेट, नोएडा के कार्यालय ने स्पष्ट किया कि उनकी ओर से बीएनएसएस की धारा 130 अथवा पुरानी दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के तहत कोई भी आदेश पारित नहीं किया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

जिला प्रशासन के बयान के अनुसार, पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने के बाद बीएनएसएस के तहत आने वाली समस्त संबंधित शक्तियाँ पुलिस आयुक्तालय को स्थानांतरित कर दी गई हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि जिला मजिस्ट्रेट, अपर जिला मजिस्ट्रेट या उप-जिला मजिस्ट्रेट के स्तर पर ऐसे मामलों की फाइलें नहीं आती हैं।

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि बीएनएसएस के आदेशों में जहाँ कार्यपालक मजिस्ट्रेट का उल्लेख होता है, वहाँ संबंधित कार्य पुलिस व्यवस्था के अंतर्गत नियुक्त कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा किए जाते हैं — न कि जिला प्रशासन के अधिकारियों द्वारा।

प्रशासन की भूमिका को लेकर भ्रम की स्थिति

यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के एक प्रदर्शन में शामिल होने पर गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के एलएलबी द्वितीय वर्ष के छात्र अक्षत त्रिपाठी को सरकार के विरुद्ध भड़काने के आरोप में ₹5 लाख के मुचलके का नोटिस जारी किया गया था। जब यह मामला सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बन गया, तब एसीपी 3 की कोर्ट ने उक्त नोटिस वापस ले लिया।

गौरतलब है कि इस घटना के बाद जिला प्रशासन की भूमिका को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं, जिसके जवाब में यह आधिकारिक बयान जारी किया गया।

कानूनी ढाँचे में बदलाव: बीएनएसएस और CrPC

बीएनएसएस के लागू होने के बाद पुरानी दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की जगह नई प्रक्रिया अस्तित्व में आई है। कमिश्नरेट व्यवस्था वाले जिलों में कानून-व्यवस्था से संबंधित अधिकार पुलिस को सौंपे गए हैं। इस नई व्यवस्था में पुलिस कमिश्नरेट के पास अपने स्वयं के कार्यपालक मजिस्ट्रेट होते हैं, जो बीएनएसएस के तहत निर्धारित कार्यों को स्वतंत्र रूप से संपन्न करते हैं।

प्रशासन के अनुसार, इसीलिए किसी बीएनएसएस आदेश को जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय से जोड़कर देखना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।

आगे की स्थिति

जिला प्रशासन के इस बयान को नोएडा में प्रशासनिक और पुलिस अधिकार-क्षेत्र के बीच की रेखा को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। अक्षत त्रिपाठी के मामले में नोटिस वापस लिए जाने के बाद अब यह देखना होगा कि संबंधित प्राधिकरण इस प्रकरण में आगे क्या कदम उठाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक ऐसी प्रणाली की परीक्षा है जहाँ नागरिक अधिकारों पर असर डालने वाले नोटिस जारी होते हैं और जवाबदेही तय करना मुश्किल हो जाता है।
RashtraPress
9 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा में बीएनएसएस धारा 130 को लेकर विवाद क्या है?
गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत त्रिपाठी को जंतर मंतर पर एक प्रदर्शन में शामिल होने पर ₹5 लाख के मुचलके का नोटिस जारी किया गया था। सोशल मीडिया पर विरोध के बाद एसीपी 3 की कोर्ट ने यह नोटिस वापस ले लिया और जिला प्रशासन ने अपनी भूमिका से इनकार करते हुए स्पष्टीकरण जारी किया।
क्या नोएडा के जिला मजिस्ट्रेट ने बीएनएसएस धारा 130 के तहत कोई आदेश दिया था?
नहीं। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिला मजिस्ट्रेट, नोएडा की ओर से बीएनएसएस की धारा 130 के तहत कोई आदेश पारित नहीं किया गया है। पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था में यह शक्तियाँ पुलिस को हस्तांतरित हैं।
पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था में बीएनएसएस की शक्तियाँ किसके पास होती हैं?
पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने के बाद बीएनएसएस के तहत संबंधित सभी शक्तियाँ पुलिस आयुक्तालय को सौंपी गई हैं। कमिश्नरेट के पास अपने कार्यपालक मजिस्ट्रेट होते हैं जो इन कार्यों को स्वतंत्र रूप से करते हैं।
अक्षत त्रिपाठी का मुचलका नोटिस क्यों वापस लिया गया?
गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के एलएलबी छात्र अक्षत त्रिपाठी को जारी ₹5 लाख के मुचलके का नोटिस सोशल मीडिया पर व्यापक विरोध के बाद एसीपी 3 की कोर्ट ने वापस ले लिया। मामले ने नागरिक स्वतंत्रता और प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर सार्वजनिक बहस छेड़ दी थी।
बीएनएसएस और पुरानी CrPC में क्या अंतर है?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) ने पुरानी दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की जगह ली है। कमिश्नरेट वाले जिलों में कानून-व्यवस्था से जुड़े अधिकार अब पुलिस को दिए गए हैं, जिससे जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय की इन मामलों में प्रत्यक्ष भूमिका समाप्त हो गई है।
राष्ट्र प्रेस
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