25 अगस्त 2026
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जंतर-मंतर आरक्षण आंदोलन का वायरल वीडियो फर्जी — दिल्ली पुलिस ने 25 अगस्त को किया खंडन

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जंतर-मंतर आरक्षण आंदोलन का वायरल वीडियो फर्जी — दिल्ली पुलिस ने 25 अगस्त को किया खंडन

सारांश

दिल्ली पुलिस ने 25 अगस्त को स्पष्ट किया कि जंतर-मंतर पर आरक्षण आंदोलन के पाँचवें दिन का वायरल वीडियो पूरी तरह फर्जी है। बीएनएसएस धारा 163 के तहत नई दिल्ली में सभाएँ प्रतिबंधित हैं और फर्जी सामग्री फैलाने वालों पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस ने 25 अगस्त 2026 को जंतर-मंतर पर आरक्षण आंदोलन के पाँचवें दिन के वायरल वीडियो को फर्जी और भ्रामक घोषित किया।
24 अगस्त के लिए जंतर-मंतर पर किसी प्रदर्शन की कोई आधिकारिक अनुमति नहीं दी गई थी।
नई दिल्ली जिले में बीएनएसएस धारा 163 लागू है, जिसके तहत पाँच या अधिक व्यक्तियों की सभा, जुलूस और प्रदर्शन प्रतिबंधित हैं।
वायरल पोस्ट में दावा था कि एक व्यक्ति जंजीरों से बँधकर विरोध कर रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के खिलाफ आक्रोश है — पुलिस ने इन सभी दावों को तथ्यहीन बताया।
फर्जी सामग्री बनाने या प्रसारित करने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

दिल्ली पुलिस ने 25 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि जंतर-मंतर पर आरक्षण सुधार और यूजीसी रोलबैक के समर्थन में कथित रूप से जारी प्रदर्शन से संबंधित वायरल वीडियो पूरी तरह फर्जी और भ्रामक है। पुलिस के अनुसार, उक्त तिथि तक जंतर-मंतर पर ऐसा कोई प्रदर्शन नहीं हो रहा था और 24 अगस्त के लिए भी किसी को आयोजन की अनुमति नहीं दी गई थी।

वायरल दावे क्या थे

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक अकाउंट द्वारा साझा किए गए वीडियो में दावा किया गया था कि जंतर-मंतर पर 'आरक्षण हटाओ आंदोलन' और 'यूजीसी रोलबैक' को लेकर पाँचवें दिन का प्रदर्शन जारी है। पोस्ट में यह भी कहा गया था कि एक प्रदर्शनकारी खुद को जंजीरों से बाँधकर विरोध कर रहा है और आंदोलनकारियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के खिलाफ गहरा रोष है।

पुलिस का आधिकारिक खंडन

दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक बयान जारी कर इन सभी दावों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 प्रभावी है, जिसके अंतर्गत पाँच या उससे अधिक व्यक्तियों का एकत्र होना, प्रदर्शन, जुलूस और सार्वजनिक सभा प्रतिबंधित है। यह प्रतिबंध किसी भी अनधिकृत जमावड़े को कानूनी रूप से अवैध बनाता है।

जनता से अपील और कानूनी चेतावनी

पुलिस ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे किसी भी अपुष्ट या भ्रामक सामग्री को साझा अथवा प्रसारित न करें। साथ ही चेतावनी दी गई कि फर्जी खबर बनाने या फैलाने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में आरक्षण नीति और यूजीसी के नए दिशानिर्देशों को लेकर सोशल मीडिया पर अफवाहें तेज़ी से फैल रही हैं।

गलत सूचना का व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब जंतर-मंतर जैसे संवेदनशील स्थल को केंद्र में रखकर फर्जी प्रदर्शन के वीडियो वायरल हुए हों। विशेषज्ञों का कहना है कि आरक्षण जैसे भावनात्मक मुद्दों पर भ्रामक सामग्री जानबूझकर सामाजिक तनाव बढ़ाने के उद्देश्य से प्रसारित की जाती है। ऐसे मामलों में पुलिस का त्वरित खंडन महत्वपूर्ण है, ताकि अफवाहें व्यापक रूप धारण न कर सकें।

आगे क्या होगा

दिल्ली पुलिस ने संकेत दिया है कि वायरल वीडियो के मूल स्रोत की पहचान कर उचित कानूनी कदम उठाए जाएँगे। नागरिकों को सलाह दी गई है कि किसी भी खबर को साझा करने से पहले उसकी आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि अवश्य करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठाता है कि आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर फर्जी वीडियो इतनी तेज़ी से वायरल क्यों होते हैं। बीएनएसएस धारा 163 जैसे प्रतिबंधात्मक प्रावधानों के बावजूद सोशल मीडिया पर झूठी सामग्री का प्रसार यह दर्शाता है कि केवल कानूनी चेतावनी पर्याप्त नहीं है — प्लेटफॉर्म-स्तर पर त्वरित तथ्य-जाँच तंत्र की ज़रूरत है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर खंडन तक सीमित रह जाती है; यह नहीं पूछा जाता कि वायरल सामग्री का मूल स्रोत कौन है और उसके पीछे क्या एजेंडा हो सकता है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जंतर-मंतर पर आरक्षण आंदोलन का वायरल वीडियो फर्जी क्यों बताया गया?
दिल्ली पुलिस ने 25 अगस्त 2026 को आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि जंतर-मंतर पर ऐसा कोई प्रदर्शन नहीं हो रहा था और 24 अगस्त के लिए किसी को अनुमति भी नहीं दी गई थी। वायरल वीडियो के सभी दावे तथ्यात्मक रूप से गलत पाए गए।
बीएनएसएस धारा 163 क्या है और इसका इस मामले से क्या संबंध है?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत नई दिल्ली जिले में पाँच या उससे अधिक व्यक्तियों का एकत्र होना, प्रदर्शन, जुलूस और सभा प्रतिबंधित है। इस प्रावधान के कारण जंतर-मंतर पर कोई भी अनधिकृत सभा कानूनन अवैध है।
वायरल पोस्ट में क्या दावे किए गए थे?
एक्स पर साझा वीडियो में दावा था कि जंतर-मंतर पर 'आरक्षण हटाओ आंदोलन' और 'यूजीसी रोलबैक' को लेकर पाँचवें दिन का प्रदर्शन जारी है। पोस्ट में यह भी कहा गया था कि एक व्यक्ति जंजीरों से बँधकर विरोध कर रहा है और प्रधानमंत्री मोदी की सरकार के खिलाफ आंदोलनकारियों में गुस्सा है।
फर्जी वीडियो साझा करने पर क्या कानूनी कार्रवाई हो सकती है?
दिल्ली पुलिस ने चेतावनी दी है कि फर्जी खबर बनाने या फैलाने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस वायरल वीडियो के मूल स्रोत की पहचान कर उचित कदम उठाने की प्रक्रिया में है।
ऐसे वायरल फर्जी वीडियो से बचने के लिए नागरिक क्या करें?
दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अपुष्ट या भ्रामक सामग्री को साझा न करें और खबर को आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि के बाद ही प्रसारित करें। संवेदनशील मुद्दों पर सोशल मीडिया पोस्ट को बिना जाँचे फॉरवर्ड करना कानूनी जोखिम भी उत्पन्न कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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