जंतर-मंतर प्रदर्शनकारियों पर एफआईआर का दावा फर्जी, दिल्ली पुलिस ने एक्स पर किया खंडन
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस ने 6 जून को स्पष्ट किया कि जंतर-मंतर पर आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में वायरल हो रहे इन दावों को पुलिस ने पूरी तरह निराधार और भ्रामक बताया है।
क्या था वायरल दावा
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कुछ पोस्ट और समाचार रिपोर्टों में यह दावा किया जा रहा था कि शनिवार को जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आयोजित प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। यह दावा तेज़ी से वायरल हुआ और नागरिकों में भ्रम की स्थिति पैदा हुई।
दिल्ली पुलिस का आधिकारिक खंडन
दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक आधिकारिक पोस्ट के ज़रिए इन दावों का खंडन किया। पुलिस ने लिखा: 'सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट और समाचार रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह स्पष्ट किया जाता है कि ऐसी कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।' पुलिस ने नागरिकों से अपील की कि वे बिना पुष्टि की जानकारी पर विश्वास न करें और न ही उसे फैलाएं, तथा केवल दिल्ली पुलिस के आधिकारिक बयानों पर ही भरोसा करें।
प्रदर्शन की पृष्ठभूमि
इंटरनेट पर उभरी कॉकरोच जनता पार्टी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया, हालांकि दिल्ली के 40 डिग्री से अधिक तापमान के कारण वे बीच में ही प्रदर्शन स्थल छोड़कर एसी कार में रवाना हो गए।
प्रदर्शनकारियों की मिली-जुली तस्वीर
गौरतलब है कि मौके पर मौजूद कई प्रदर्शनकारियों ने खुद स्पष्ट किया कि वे कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में नहीं, बल्कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग के लिए आए थे। कुछ लोग ऐसे भी मिले जिन्हें यह तक नहीं पता था कि कॉकरोच जनता पार्टी क्या है और यह प्रदर्शन किस उद्देश्य से आयोजित हो रहा है। यह स्थिति प्रदर्शन की संगठनात्मक कमज़ोरी और संदेश की अस्पष्टता को उजागर करती है।
आगे क्या
दिल्ली पुलिस ने नागरिकों को सलाह दी है कि किसी भी घटना से जुड़ी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर निर्भर रहें। फर्जी खबरों के प्रसार को लेकर पुलिस की यह सक्रिय प्रतिक्रिया भविष्य में ऐसे भ्रामक दावों पर अंकुश लगाने की दिशा में एक कदम मानी जा रही है।