22 जुलाई 2026
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जंतर-मंतर प्रदर्शन: 'आप' ने दिल्ली पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप, दोषी अधिकारियों पर FIR और निलंबन की मांग

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जंतर-मंतर प्रदर्शन: 'आप' ने दिल्ली पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप, दोषी अधिकारियों पर FIR और निलंबन की मांग

सारांश

जंतर-मंतर प्रदर्शन में कथित पुलिस बर्बरता का मामला अब सियासी अखाड़े में आ गया है। AAP के सौरभ भारद्वाज ने दोषी अधिकारियों की पहचान का दावा करते हुए FIR और निलंबन की मांग की है — और PM मोदी की चुप्पी को सरकार की 'मौन सहमति' करार दिया है।

मुख्य बातें

आम आदमी पार्टी (AAP) ने 22 जुलाई को जंतर-मंतर प्रदर्शन में कथित पुलिस बल प्रयोग पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए।
AAP दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि दोषी अधिकारियों की पहचान हो चुकी है, फिर भी न FIR दर्ज हुई, न निलंबन।
कथित तौर पर सिविल ड्रेस में मौजूद लोगों ने कील लगे डंडों से प्रदर्शनकारियों पर हमला किया — यह भारद्वाज का आरोप है।
भारद्वाज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी को 'सरकार की मौन सहमति' का संकेत बताया।
AAP ने निष्पक्ष जाँच और दोषी पाए जाने पर कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की मांग की है।

नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान कथित बल प्रयोग को लेकर राजनीतिक विवाद तीखा हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने 22 जुलाई को केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज करने और उन्हें निलंबित करने की मांग की है।

मुख्य आरोप

AAP के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान युवाओं की बेरहमी से पिटाई की गई। उनके अनुसार, कथित तौर पर सिविल ड्रेस में मौजूद कुछ लोगों ने कील लगे डंडों से प्रदर्शनकारियों पर हमला किया। भारद्वाज ने दावा किया कि सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में ऐसे वीडियो उपलब्ध हैं जिनमें कथित तौर पर पुलिस अधिकारियों को अभद्र व्यवहार करते देखा जा सकता है।

कार्रवाई न होने पर सवाल

भारद्वाज ने बुधवार को जारी अपने बयान में कहा कि जिन पुलिस अधिकारियों पर मारपीट के आरोप हैं, उनकी पहचान हो चुकी है और उनके नाम भी सामने आ चुके हैं — फिर भी अब तक न तो कोई FIR दर्ज की गई है और न ही उन्हें निलंबित किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि दोषी अधिकारियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती, तो इससे यह संदेश जाता है कि इस पूरी घटना को सरकार की मौन सहमति प्राप्त है।

प्रधानमंत्री की चुप्पी पर निशाना

भारद्वाज ने यह भी कहा कि इस पूरे मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने तर्क दिया कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार और महिलाओं के सम्मान की रक्षा करना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल केंद्र सरकार पर पुलिस के दुरुपयोग के आरोप लगाते रहे हैं।

AAP की मांगें

आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार से माँग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच कराई जाए। पार्टी के अनुसार, यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए। गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन आती है, जिससे यह विवाद सीधे राजनीतिक रंग ले लेता है।

आगे क्या

फिलहाल केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक दबाव बढ़ने के साथ यह देखना होगा कि क्या अधिकारियों के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कदम उठाया जाता है या मामला जाँच के दायरे में आता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अब तक वे एकतरफा बयानों और वायरल वीडियो पर टिके हैं — स्वतंत्र जाँच की माँग इसीलिए तार्किक है। असली सवाल यह है कि क्या दिल्ली पुलिस आंतरिक जवाबदेही तंत्र को सक्रिय करेगी, या यह मामला भी पिछले ऐसे विवादों की तरह राजनीतिक बयानबाजी में दब जाएगा।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जंतर-मंतर प्रदर्शन विवाद क्या है?
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कथित बल प्रयोग को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। AAP ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शनकारियों की बेरहमी से पिटाई की गई और कथित तौर पर सिविल ड्रेस में मौजूद लोगों ने कील लगे डंडों से हमला किया।
AAP ने क्या मांगें रखी हैं?
AAP ने केंद्र सरकार से मांग की है कि दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज की जाए और उन्हें निलंबित किया जाए। साथ ही पार्टी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच की भी माँग की है।
सौरभ भारद्वाज ने क्या कहा?
AAP दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने 22 जुलाई को जारी बयान में कहा कि दोषी अधिकारियों की पहचान हो चुकी है और उनके नाम भी सामने आ चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि PM मोदी की चुप्पी इस घटना को सरकार की मौन सहमति का संकेत देती है।
दिल्ली पुलिस किसके अधीन आती है और इसका क्या महत्व है?
दिल्ली पुलिस केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन है, राज्य सरकार के नहीं। इसीलिए AAP के आरोप सीधे केंद्र सरकार पर जवाबदेही की माँग के रूप में सामने आते हैं।
इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
AAP के दावों के अनुसार, अब तक न तो किसी अधिकारी के खिलाफ FIR दर्ज की गई है और न ही किसी को निलंबित किया गया है। केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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