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जंतर-मंतर पर डर का माहौल बनाना बंद करे दिल्ली पुलिस: सौरव दास की माँग

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जंतर-मंतर पर डर का माहौल बनाना बंद करे दिल्ली पुलिस: सौरव दास की माँग

सारांश

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने एक्स पर पोस्ट कर दिल्ली पुलिस पर जंतर-मंतर के पास प्रदर्शनकारियों को डराने, हिरासत में लेने और खाना-पानी रोकने का आरोप लगाया। पेपर लीक मामले में एक महीने से चल रहे शांतिपूर्ण धरने को लेकर सीजेपी ने पुलिस कमिश्नर से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है।

मुख्य बातें

सौरव दास (कॉकरोच जनता पार्टी) ने 25 जुलाई को एक्स पर पोस्ट कर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की कड़ी निंदा की।
कथित तौर पर एक महीने से अधिक समय से जंतर-मंतर पर पेपर लीक के खिलाफ शांतिपूर्ण धरना जारी है।
सीजेपी के अनुसार प्रदर्शनकारियों तक खाना, पानी, दवाइयाँ पहुँचाने वाले स्वयंसेवकों को रोका जा रहा है।
पार्टी ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर से तीन विशेष माँगों पर तत्काल कार्रवाई की अपील की।
सर्वोच्च न्यायालय के शांतिपूर्ण विरोध को संवैधानिक अधिकार बताने वाले फैसलों का हवाला दिया गया।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास ने 25 जुलाई को दिल्ली पुलिस से माँग की है कि वह जंतर-मंतर के आसपास नागरिकों को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लेना, डराना और प्रदर्शन स्थल तक पहुँचने से रोकना तत्काल बंद करे। सीजेपी के अनुसार, एक महीने से अधिक समय से हज़ारों छात्र, अभिभावक, शिक्षक और आम नागरिक पेपर लीक मामले में सरकारी जवाबदेही की माँग को लेकर जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण धरने पर बैठे हैं।

मुख्य आरोप और माँगें

सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'कॉकरोच जनता पार्टी माँग करती है कि दिल्ली पुलिस तुरंत गैर-कानूनी तरीके से लोगों को हिरासत में लेना, डराना, या जंतर-मंतर तक पहुँचने से रोकना बंद करे और जंतर-मंतर के आसपास डर और घेराबंदी का माहौल बनाने से बचे।' सीजेपी ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर से अपील की है कि वे अपने अधिकारियों को इस आशय के तत्काल निर्देश जारी करें।

प्रदर्शनकारियों पर कथित पाबंदियाँ

सीजेपी के बयान के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने कथित तौर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों तक खाना, पीने का पानी, दवाइयाँ और अन्य आवश्यक सामग्री पहुँचाने वाले स्वयंसेवकों को रोका। बयान में यह भी आरोप लगाया गया कि नागरिकों के आज़ाद आने-जाने पर रोक लगाई जा रही है और सिर्फ प्रदर्शन स्थल तक पहुँचने की कोशिश करने पर लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है।

संवैधानिक अधिकारों का हवाला

सीजेपी ने अपने बयान में कहा कि जंतर-मंतर 'डेमोक्रेटिक विरोध के लिए भारत की तय जगह है' और वहाँ बैठे लोग 'संविधान के तहत मिले अधिकारों का शांति से इस्तेमाल कर रहे हैं।' पार्टी ने यह भी रेखांकित किया कि सर्वोच्च न्यायालय ने बार-बार शांतिपूर्ण विरोध को संवैधानिक लोकतंत्र का अनिवार्य अंग बताया है। सीजेपी के अनुसार, 'पुलिस का काम है कि जहाँ जरूरी हो, शांतिपूर्ण सभाओं को रेगुलेट करे, न कि डर, भूख, परेशानी और अकेलापन पैदा करके उन्हें दबाए।'

पुलिस कमिश्नर से अपील

सीजेपी ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर से तीन विशेष माँगें रखी हैं — नागरिकों को जंतर-मंतर तक शांतिपूर्वक पहुँचने से रोकना बंद किया जाए; प्रदर्शनकारियों के लिए खाना, पानी, दवाइयाँ और सफाई सामग्री की आपूर्ति में रुकावट तत्काल समाप्त की जाए; और स्वयंसेवकों, परिवार के सदस्यों, वकीलों, पत्रकारों तथा चिकित्सा कर्मियों को प्रदर्शन स्थल तक जाने की अनुमति दी जाए। इस मामले में दिल्ली पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अगर सत्यापित होते हैं, तो ये केवल कानून-व्यवस्था का मसला नहीं, बल्कि संवैधानिक उल्लंघन का मामला बनता है। दिल्ली पुलिस की चुप्पी और पारदर्शिता की कमी इस पूरे प्रकरण में जवाबदेही के अभाव को रेखांकित करती है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर राजनीतिक दलों के बयानों पर केंद्रित रहती है, जबकि असली खबर यह है कि पेपर लीक जैसे व्यवस्थागत मुद्दे पर सरकार की जवाबदेही अब तक कहाँ है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जंतर-मंतर पर चल रहा धरना किस मुद्दे को लेकर है?
सीजेपी के बयान के अनुसार, हज़ारों छात्र, अभिभावक, शिक्षक और नागरिक पेपर लीक मामले में सरकार से जवाबदेही की माँग को लेकर एक महीने से अधिक समय से जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण धरने पर बैठे हैं।
कॉकरोच जनता पार्टी ने दिल्ली पुलिस पर क्या आरोप लगाए हैं?
सीजेपी ने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस कथित तौर पर नागरिकों को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में ले रही है, प्रदर्शन स्थल तक पहुँचने से रोक रही है और खाना, पानी व दवाइयाँ पहुँचाने वाले स्वयंसेवकों को भी रोका जा रहा है।
सीजेपी ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर से क्या माँगें रखी हैं?
सीजेपी ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — नागरिकों को जंतर-मंतर तक पहुँचने से रोकना बंद हो; खाना, पानी, दवाइयाँ और सफाई सामग्री की आपूर्ति में रुकावट समाप्त हो; और वकीलों, पत्रकारों, परिवार के सदस्यों व चिकित्सा कर्मियों को प्रदर्शन स्थल तक जाने दिया जाए।
शांतिपूर्ण विरोध के बारे में सर्वोच्च न्यायालय का क्या रुख रहा है?
सीजेपी के बयान के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण विरोध भारतीय संवैधानिक लोकतंत्र का एक अनिवार्य अंग है और पुलिस का दायित्व ऐसी सभाओं को दबाना नहीं, बल्कि आवश्यकतानुसार उन्हें विनियमित करना है।
इस मामले में दिल्ली पुलिस की क्या प्रतिक्रिया है?
सीजेपी के बयान और माँगों के बाद अब तक दिल्ली पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह खबर लिखे जाने तक पुलिस का पक्ष उपलब्ध नहीं था।
राष्ट्र प्रेस
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