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जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन: सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने दिल्ली सरकार से माँगी एफआईआर वापसी की स्पष्ट समयसीमा

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जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन: सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने दिल्ली सरकार से माँगी एफआईआर वापसी की स्पष्ट समयसीमा

सारांश

जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के बाद दर्ज एफआईआर को लेकर सीजेपी और दिल्ली सरकार के बीच तनाव बढ़ा है। सरकार 13 एफआईआर मान रही है, सीजेपी का दावा 20 का है। प्रवक्ता सौरव दास ने 'जल्द से जल्द' जैसी अस्पष्ट भाषा को खारिज करते हुए ठोस समयसीमा की माँग की है।

मुख्य बातें

सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने 30 जुलाई को दिल्ली सरकार से जंतर-मंतर प्रदर्शनकारी छात्रों की रिहाई की स्पष्ट समयसीमा माँगी।
दिल्ली सरकार के नोटिफिकेशन में 13 एफआईआर का उल्लेख, जबकि सीजेपी का दावा है कि संख्या 20 है।
सरकार ने एफआईआर 'बंद' करने की बात कही, जबकि सीजेपी की माँग 'विथड्रॉ' यानी पूरी तरह वापस लेने की है।
बिहार, असम, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में भी इसी तरह के नोटिफिकेशन जारी; सीजेपी वहाँ भी बातचीत में।
दास ने सर्वोच्च न्यायालय के उस निर्णय का हवाला दिया जिसमें एक दिन की भी स्वतंत्रता के हनन को गंभीर माना गया है।

नई दिल्ली, 30 जुलाईकॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर की संख्या और उनकी वापसी की प्रक्रिया को लेकर दिल्ली सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने माँग की है कि सरकार गिरफ्तार छात्रों की रिहाई के लिए 'जल्द से जल्द' जैसी अस्पष्ट भाषा छोड़कर एक ठोस समयसीमा तय करे।

एफआईआर की संख्या पर विवाद

सौरव दास ने कहा कि दिल्ली सरकार के नोटिफिकेशन में 13 एफआईआर दर्ज होने का उल्लेख है, जबकि सीजेपी की जानकारी के अनुसार वास्तविक संख्या 20 एफआईआर है। उन्होंने कहा, "दिल्ली सरकार के नोटिफिकेशन के मुताबिक, उनके हिसाब से 13 एफआईआर दर्ज हैं। हमारी जानकारी के अनुसार, 20 एफआईआर हैं।" इस विसंगति को उन्होंने सरकार की मंशा पर संदेह का आधार बताया।

सरकार की भाषा पर आपत्ति

दास ने सरकारी नोटिफिकेशन में इस्तेमाल की गई शब्दावली पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि 'जल्द से जल्द' एक अनिश्चित पद है — "इसका क्या मतलब माना जाए, एक महीने, 10 महीने, 15 महीने या एक घंटा?" उनके अनुसार, सरकार ने एफआईआर को 'बंद' करने की बात कही है, जबकि गारंटी 'विथड्रॉ' यानी वापस लेने की दी गई थी — और यह दोनों कानूनी रूप से अलग-अलग प्रक्रियाएँ हैं।

युवाओं के साथ विश्वासघात की चेतावनी

सौरव दास ने सरकार को चेताया कि यदि दी गई गारंटी पर शीघ्र अमल नहीं हुआ तो यह युवा पीढ़ी के साथ "बहुत बड़ा विश्वासघात" होगा। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के उस निर्णय का भी हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि यदि किसी की स्वतंत्रता एक दिन के लिए भी छिन जाए, तो उसका असर दीर्घकालिक होता है।

अन्य राज्यों में भी जारी बातचीत

दास ने बताया कि यह मुद्दा केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और कई अन्य राज्यों में भी प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ नोटिफिकेशन जारी हुए हैं। उन्होंने कहा कि सीजेपी उन राज्य सरकारों से भी स्पष्ट भाषा में गारंटी वाला नोटिफिकेशन जारी करवाने के लिए बातचीत कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि एफआईआर की प्रति अभी तक उन्हें नहीं मिली है, हालाँकि उन्होंने दिल्ली सरकार के सकारात्मक रुख को स्वीकार किया।

आगे की राह

सीजेपी ने स्पष्ट किया है कि वह सरकार के कदमों पर नज़र बनाए रखेगी। दास ने कहा कि युवा पीढ़ी बहुत आशा के साथ आगे बढ़ना चाहती है और इन उम्मीदों को नहीं तोड़ा जाना चाहिए। यह मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर छात्र आंदोलन और नागरिक स्वतंत्रता की बहस का केंद्र बनता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और सरकार का इस पर मौन संदेह पैदा करता है। 'जल्द से जल्द' जैसी अनिश्चित भाषा का इस्तेमाल बताता है कि प्रशासन प्रतिबद्धता से बचना चाहता है। यह ऐसे समय में आया है जब छात्र आंदोलनों पर राज्य की प्रतिक्रिया पूरे देश में जाँच के दायरे में है। बिना जवाबदेही के दिए गए आश्वासन, युवाओं के संस्थागत विश्वास को और कमज़ोर करेंगे।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जंतर-मंतर प्रदर्शन में कितनी एफआईआर दर्ज हुई हैं?
दिल्ली सरकार के नोटिफिकेशन के अनुसार 13 एफआईआर दर्ज हैं, जबकि सीजेपी का दावा है कि वास्तविक संख्या 20 है। इस विसंगति को लेकर सीजेपी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास की मुख्य माँग क्या है?
सौरव दास ने माँग की है कि दिल्ली सरकार गिरफ्तार छात्रों की रिहाई और एफआईआर वापसी के लिए एक स्पष्ट और बाध्यकारी समयसीमा घोषित करे। उन्होंने 'जल्द से जल्द' जैसी अस्पष्ट भाषा को अपर्याप्त बताया।
एफआईआर 'बंद' करने और 'विथड्रॉ' करने में क्या फर्क है?
कानूनी रूप से एफआईआर 'विथड्रॉ' करने का अर्थ है उसे पूरी तरह वापस लेना, जबकि 'बंद' करना एक अलग प्रक्रिया है जिसमें अभियुक्त पर भविष्य में कार्रवाई की संभावना बनी रह सकती है। सीजेपी का कहना है कि सरकार ने विथड्रॉ की गारंटी दी थी, लेकिन नोटिफिकेशन में 'बंद' शब्द का प्रयोग किया।
क्या यह मामला केवल दिल्ली तक सीमित है?
नहीं। सौरव दास के अनुसार बिहार, असम और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में भी प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ नोटिफिकेशन जारी हुए हैं। सीजेपी उन राज्य सरकारों से भी स्पष्ट गारंटी दिलाने के लिए बातचीत कर रही है।
सर्वोच्च न्यायालय का इस मामले में क्या संदर्भ है?
सौरव दास ने सर्वोच्च न्यायालय के उस निर्णय का हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि यदि किसी की स्वतंत्रता एक दिन के लिए भी छिन जाए, तो उसका प्रभाव दीर्घकालिक होता है। इस आधार पर उन्होंने तत्काल रिहाई की माँग को उचित ठहराया।
राष्ट्र प्रेस
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