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ब्रिक्स प्लस से भारत को ग्लोबल साउथ में बड़ा मंच, पर गठबंधन साधने की चुनौती भी: रिपोर्ट

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ब्रिक्स प्लस से भारत को ग्लोबल साउथ में बड़ा मंच, पर गठबंधन साधने की चुनौती भी: रिपोर्ट

सारांश

ब्रिक्स प्लस का विस्तार भारत के लिए दोधारी तलवार है — एक तरफ ग्लोबल साउथ में अभूतपूर्व कूटनीतिक पहुँच का मौका, तो दूसरी तरफ अधिक विरोधाभासी और कम एकजुट समूह को साधने की जटिल चुनौती। असली सवाल यह है कि क्या नई दिल्ली इस बड़े मंच को अपनी सौदेबाजी की ताकत में बदल सकती है।

मुख्य बातें

वियतनाम टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिक्स प्लस ने भारत को मध्य पूर्व, अफ्रीका और एशिया में ग्लोबल साउथ के प्रमुख देशों से जुड़ने का व्यापक मंच दिया है।
विस्तारित ब्रिक्स से भारत की रणनीतिक स्वायत्तता, बहुध्रुवीयता और सुधरे बहुपक्षवाद की कूटनीतिक भाषा को मजबूती मिलती है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत को अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बदलने के लिए नहीं, बल्कि उसमें सौदेबाजी की शक्ति बढ़ाने के लिए ब्रिक्स की ज़रूरत है।
नए सदस्यों के जुड़ने से समूह में अंतर्विरोध गहरे हुए हैं; नई दिल्ली को यूएई समेत अन्य मध्यम शक्तियों के साथ तालमेल बढ़ाना होगा।
रिपोर्ट में नई दिल्ली को ब्रिक्स को विदेश नीति का प्राथमिक मंच नहीं, बल्कि बहुध्रुवीय रणनीति का एक अहम स्तंभ मानने की सलाह दी गई है।

विस्तारित ब्रिक्स प्लस समूह ने भारत को मध्य पूर्व, अफ्रीका और एशिया सहित पूरे ग्लोबल साउथ के प्रमुख देशों के साथ अपने कूटनीतिक और आर्थिक संबंध गहरे करने का एक व्यापक मंच दिया है। वियतनाम टाइम्स में प्रकाशित एक विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार, यह विस्तार नई दिल्ली की रणनीतिक स्वायत्तता और बहुध्रुवीयता की नीति को नई ताकत दे सकता है। हालाँकि, रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि लगातार बढ़ते सदस्यों के साथ समूह में अंतर्विरोध भी गहरे होते जा रहे हैं।

ब्रिक्स का बदलता स्वरूप

रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिक्स अब वह छोटा पाँच देशों का समूह नहीं रहा जिसे उभरती अर्थव्यवस्थाओं के मंच के रूप में बनाया गया था। विस्तार के बाद इसका भौगोलिक दायरा, जनसंख्या और आर्थिक वजन उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। रिपोर्ट में कहा गया, 'यह मौजूदा वैश्विक व्यवस्था से असंतुष्ट देशों की आवाज़ के तौर पर उभरा है, लेकिन इस विस्तार ने ऐसे समूह में और भी अंतर्विरोध ला दिए हैं, जो पहले से ही बहुत एकजुट नहीं था।'

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक भू-राजनीतिक ध्रुवीकरण तेज़ हो रहा है और पश्चिमी नेतृत्व वाली बहुपक्षीय संस्थाओं की प्रासंगिकता पर सवाल उठ रहे हैं। गौरतलब है कि यूएई, मिस्र, इथियोपिया और ईरान सहित कई नए सदस्यों के जुड़ने से समूह की विविधता बढ़ी है — लेकिन आम सहमति बनाना कठिन भी हुआ है।

भारत के लिए रणनीतिक लाभ

रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिक्स प्लस भारत की पसंदीदा कूटनीतिक शब्दावली — रणनीतिक स्वायत्तता, बहुध्रुवीयता, संप्रभु समानता, सुधरा हुआ बहुपक्षवाद और विकासशील देशों के लिए अधिक प्रतिनिधित्व — को और अधिक मजबूती दे सकता है। रिपोर्ट में एक महत्त्वपूर्ण भेद उजागर किया गया: 'भारत को अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बदलने के लिए ब्रिक्स की आवश्यकता नहीं है। भारत को उस व्यवस्था के भीतर अपनी सौदेबाजी की शक्ति बढ़ाने के लिए ब्रिक्स की आवश्यकता है।'

विस्तारित समूह विकास वित्तपोषण, जलवायु न्याय, प्रौद्योगिकी पहुँच, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा, लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारत की ग्लोबल साउथ कूटनीति के लिए भी एक सशक्त मंच प्रदान करता है।

नई दिल्ली पर बढ़ी ज़िम्मेदारी

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अब भारत को यूएई समेत अन्य मध्यम शक्तियों के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करना होगा तथा नए सदस्यों के साथ तालमेल बैठाना होगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लगातार हो रहे विस्तार से समूह की सामूहिक ताकत कमजोर न पड़े।

रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली को ब्रिक्स प्लस को न तो अपनी विदेश नीति के प्राथमिक मंच के रूप में देखना चाहिए और न ही एक असुविधाजनक विरासत वाले समूह के रूप में। इसके बजाय, इसे गुटबंदी की राजनीति से दूर रहते हुए बहुध्रुवीयता को आगे बढ़ाने की व्यापक रणनीति के एक अहम स्तंभ के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए।

असली परीक्षा: क्या भारत समूह को अपने पक्ष में चला सकता है?

रिपोर्ट में केंद्रीय सवाल यह उठाया गया है कि 'क्या ब्रिक्स प्लस पुराने ब्रिक्स से अधिक मजबूत है' — यह मुद्दा नहीं है। असली सवाल यह है कि 'क्या भारत एक बड़े और अधिक विरोधाभासी समूह को एक बहुध्रुवीय व्यवस्था के पक्ष में काम करवा सकता है जो भारतीय स्वायत्तता को बनाए रखे।'

विश्लेषकों के अनुसार, नई दिल्ली की अध्यक्षता भारत के राजनयिक नेतृत्व को प्रदर्शित करने का एक अवसर है — परंतु इसके बाद की कूटनीतिक सफलता ही इस पहल की वास्तविक कसौटी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

'सौदेबाजी बढ़ाने' के लिए रहना चाहिए — यह वास्तव में एक सूक्ष्म लेकिन महत्त्वपूर्ण स्वीकारोक्ति है कि ब्रिक्स कोई वैकल्पिक विश्व व्यवस्था नहीं, बल्कि एक दबाव-समूह है। विरोधाभास यह है कि जितने अधिक देश जुड़ते हैं, उतना ही समूह में एकमत होना कठिन होता जाता है — और भारत की पहले से ही नाजुक स्थिति, जहाँ वह चीन और पश्चिम दोनों के साथ संतुलन बनाए रखता है, और जटिल होती है। नई दिल्ली की अध्यक्षता एक अवसर तो है, पर बिना ठोस एजेंडा और परिणाम-उन्मुख कूटनीति के यह महज एक प्रतीकात्मक नेतृत्व बनकर रह सकती है।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिक्स प्लस से भारत को क्या फायदा होगा?
रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिक्स प्लस भारत को मध्य पूर्व, अफ्रीका और पूरे ग्लोबल साउथ के प्रमुख देशों के साथ कूटनीतिक और आर्थिक संबंध गहरे करने का व्यापक मंच देता है। यह विकास वित्तपोषण, जलवायु न्याय, ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारत की ग्लोबल साउथ कूटनीति को भी मज़बूती देता है।
क्या ब्रिक्स विस्तार से भारत के लिए चुनौतियाँ भी हैं?
हाँ, रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि नए सदस्यों के जुड़ने से ब्रिक्स में अंतर्विरोध और बढ़े हैं। भारत को यूएई समेत अन्य मध्यम शक्तियों के साथ तालमेल बनाना होगा ताकि समूह की सामूहिक ताकत कमजोर न पड़े।
भारत की विदेश नीति में ब्रिक्स की क्या भूमिका होनी चाहिए?
रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली को ब्रिक्स प्लस को न तो अपनी विदेश नीति का प्राथमिक मंच मानना चाहिए और न ही इसे नकारात्मक विरासत वाला समूह। इसे गुटबंदी से दूर रहते हुए बहुध्रुवीय रणनीति के एक अहम स्तंभ के रूप में इस्तेमाल करना उचित होगा।
ब्रिक्स में भारत की सौदेबाजी की ताकत क्यों बढ़ी है?
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बदलने के लिए नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के भीतर अपनी सौदेबाजी की शक्ति बढ़ाने के लिए ब्रिक्स की ज़रूरत है। विस्तारित समूह अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार के लिए भारत के तर्क को और मजबूत करता है।
ब्रिक्स प्लस की असली परीक्षा क्या है?
रिपोर्ट के अनुसार, असली परीक्षा यह है कि क्या भारत एक बड़े और अधिक विरोधाभासी समूह को एक बहुध्रुवीय व्यवस्था के पक्ष में काम करवा सकता है जो भारतीय स्वायत्तता को बनाए रखे। नई दिल्ली की अध्यक्षता इसका एक अवसर है, और उसके बाद की कूटनीति इस दांव की सफलता तय करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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