13 सितंबर 2026
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ब्रिक्स 'नई दिल्ली घोषणापत्र' पर एनडीए नेताओं की प्रतिक्रिया: ग्लोबल साउथ विश्व का नेतृत्व करने में सक्षम

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ब्रिक्स 'नई दिल्ली घोषणापत्र' पर एनडीए नेताओं की प्रतिक्रिया: ग्लोबल साउथ विश्व का नेतृत्व करने में सक्षम

सारांश

ब्रिक्स के 'नई दिल्ली घोषणापत्र' पर एनडीए नेताओं ने एकजुट होकर समर्थन जताया — पहलगाम हमले की निंदा, टेरर फंडिंग पर कड़ा प्रस्ताव और MSME के लिए नए अवसर। राजीव रंजन ने ब्रिक्स की वैश्विक GDP में 40% हिस्सेदारी का हवाला देते हुए कहा कि यह मंच पश्चिम एशिया जैसे संकटों में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

मुख्य बातें

ब्रिक्स सम्मेलन में PM मोदी ने ग्लोबल साउथ की आवाज़ सशक्त करने का आह्वान किया।
BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा — ग्लोबल साउथ डिजिटलीकरण और आधुनिकीकरण में तेज़ी से उभर रहा है और विश्व नेतृत्व करने में सक्षम है।
नई दिल्ली घोषणापत्र में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा और टेरर फंडिंग पर कड़ा प्रस्ताव पारित।
जदयू नेता राजीव रंजन के अनुसार ब्रिक्स देशों की वैश्विक GDP में 40% और जनसंख्या में 45-49% हिस्सेदारी है।
अगले वर्ष चीन करेगा ब्रिक्स की मेज़बानी; रंजन ने कहा — एक वर्ष में उल्लेखनीय सफलता असमानता बढ़ाने वाले देशों के लिए कड़ा संदेश होगा।
BJP प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा — भारत ईरान-इजरायल संघर्ष में पहल कर चुका है और विश्व शांति के साथ सीमा सुरक्षा को भी प्राथमिकता देता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन में ग्लोबल साउथ की आवाज़ को और अधिक सशक्त बनाने का आह्वान किया, जिस पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने खुलकर समर्थन व्यक्त किया है। नेताओं का कहना है कि ग्लोबल साउथ आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण सहित तमाम क्षेत्रों में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और वह पूरी दुनिया का नेतृत्व करने की क्षमता रखता है।

भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, 'निश्चित रूप से ग्लोबल साउथ आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण समेत सभी क्षेत्रों में तेज़ी से उभर रहा है। वह पूरे विश्व का नेतृत्व कर सकता है। यही बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कही है।' खंडेलवाल ने नई दिल्ली घोषणापत्र की सराहना करते हुए कहा कि इसमें भारत की ओर से उठाए गए सभी प्रमुख मुद्दे शामिल किए गए हैं।

खंडेलवाल के अनुसार, घोषणापत्र में पहलगाम आतंकी हमले की खुलकर निंदा की गई और आतंकवाद की फंडिंग के विरुद्ध कड़ा प्रस्ताव पारित किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि इस घोषणापत्र से भारत के व्यापारियों और MSME को अनेक देशों में व्यापार के नए अवसर प्राप्त होंगे।

जदयू नेता का विश्लेषण

जनता दल (यूनाइटेड) के नेता राजीव रंजन ने कहा कि ग्लोबल साउथ दुनिया के कमज़ोर और विकासशील देशों का एक बड़ा समूह बन सकता है। उन्होंने कहा, 'ब्रिक्स इसकी भावनाओं और भूमिका को निर्धारित करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगले वर्ष चीन द्वारा ब्रिक्स सम्मेलन की मेज़बानी किए जाने से पहले यदि उल्लेखनीय सफलता हासिल हो सके, तो यह असमानता बढ़ाने वाले देशों के लिए कड़ा संदेश होगा।

रंजन ने ब्रिक्स की आर्थिक ताक़त का उल्लेख करते हुए कहा कि इन देशों की वैश्विक GDP में 40 प्रतिशत और विश्व जनसंख्या में 45 से 49 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। उनके अनुसार, पश्चिम एशिया संकट के दौर में यह मंच एक प्रभावशाली भूमिका निभाने में सक्षम है, जैसा कि UAE और ईरान के बीच संवाद से स्पष्ट होता है।

पश्चिम एशिया और शांति पर भारत का रुख

BJP के प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के पश्चिम एशिया में शांति को लेकर ब्रिक्स की भूमिका संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत हमेशा से इस दिशा में अग्रणी रहा है। उन्होंने कहा, 'ईरान-इजरायल के बीच जो युद्ध चला, उसमें भारत ने बहुत पहल की। दोनों देश भारत के अच्छे मित्र हैं।'

शाहदेव ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत चाहता है कि वर्षों से चले आ रहे संघर्ष समाप्त हों, क्योंकि युद्ध से मानव जीवन, बुनियादी ढाँचे और अर्थव्यवस्था को नुकसान होता है। साथ ही उन्होंने रेखांकित किया, 'भारत हमेशा विश्व में शांति चाहता है, लेकिन हमारी सीमाओं की सुरक्षा भी उतनी ही ज़रूरी है।'

नई दिल्ली घोषणापत्र का महत्व

गौरतलब है कि नई दिल्ली घोषणापत्र ब्रिक्स के इतिहास में एक अहम दस्तावेज़ के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें आतंकवाद, व्यापार और बहुपक्षीय सहयोग पर ठोस प्रस्ताव शामिल हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक भू-राजनीति में पश्चिमी वर्चस्व को चुनौती देने वाले देशों का एक नया समूह आकार ले रहा है। आने वाले महीनों में इस घोषणापत्र के क्रियान्वयन पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

किंतु ब्रिक्स में पाकिस्तान के साझेदारों की उपस्थिति इस निंदा की व्यावहारिक सीमाओं को भी उजागर करती है। ग्लोबल साउथ की 40% GDP हिस्सेदारी एक ठोस संख्या है, पर इस फोरम की भीतरी असहमतियाँ — खासकर भारत-चीन सीमा विवाद के संदर्भ में — यह सवाल उठाती हैं कि क्या यह एकता नारे से आगे जा सकती है।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिक्स 'नई दिल्ली घोषणापत्र' क्या है?
यह 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन में अपनाया गया साझा दस्तावेज़ है, जिसमें आतंकवाद की निंदा, टेरर फंडिंग पर कड़े प्रस्ताव और व्यापार व उद्योग पर आम सहमति शामिल है। इसमें पहलगाम आतंकी हमले की भी खुलकर निंदा की गई है।
एनडीए नेताओं ने ग्लोबल साउथ पर क्या कहा?
BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि ग्लोबल साउथ आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण में तेज़ी से उभर रहा है और पूरे विश्व का नेतृत्व करने में सक्षम है। जदयू नेता राजीव रंजन ने जोड़ा कि ब्रिक्स इसकी भावनाओं और भूमिका को निर्धारित करने में अहम योगदान दे सकता है।
ब्रिक्स देशों की वैश्विक अर्थव्यवस्था में कितनी हिस्सेदारी है?
जदयू नेता राजीव रंजन के अनुसार ब्रिक्स देशों की वैश्विक GDP में 40 प्रतिशत और विश्व जनसंख्या में 45 से 49 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। इसी आधार पर उन्होंने इस फोरम को वैश्विक मंच पर प्रभावशाली बताया।
अगला ब्रिक्स सम्मेलन कहाँ होगा?
जदयू नेता राजीव रंजन के बयान के अनुसार अगले वर्ष चीन ब्रिक्स सम्मेलन की मेज़बानी करेगा। उन्होंने कहा कि यदि इस एक वर्ष में उल्लेखनीय सफलता मिले, तो यह असमानता बढ़ाने वाले देशों के लिए कड़ा संदेश होगा।
पश्चिम एशिया संकट में भारत की क्या भूमिका रही है?
BJP प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव के अनुसार ईरान-इजरायल संघर्ष के दौरान भारत ने सक्रिय पहल की थी। उन्होंने कहा कि दोनों देश भारत के मित्र हैं और भारत युद्ध की समाप्ति चाहता है, साथ ही अपनी सीमाओं की सुरक्षा को भी प्राथमिकता देता है।
राष्ट्र प्रेस
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