27 जून 2026
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ब्रिक्स 2026 अध्यक्षता में भारत ग्लोबल साउथ को ऊर्जा सुरक्षा के केंद्र में रखेगा: PM मोदी

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ब्रिक्स 2026 अध्यक्षता में भारत ग्लोबल साउथ को ऊर्जा सुरक्षा के केंद्र में रखेगा: PM मोदी

सारांश

ब्रिक्स 2026 की अध्यक्षता भारत के लिए महज़ एक राजनयिक पड़ाव नहीं — यह ग्लोबल साउथ की ऊर्जा आकांक्षाओं को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का अवसर है। PM मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत घरेलू उपलब्धियों की नींव पर अंतरराष्ट्रीय साझेदारी की इमारत खड़ी करेगा।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 27 जून 2026 को एक्स पर पोस्ट कर कहा कि ब्रिक्स 2026 अध्यक्षता में भारत ग्लोबल साउथ को ऊर्जा भविष्य के केंद्र में रखेगा।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के लेख में ऊर्जा उपलब्धता, स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन और नवाचार को अध्यक्षता की प्रमुख प्राथमिकताएँ बताया गया।
भारत ने NDC लक्ष्य से पहले ही कुल स्थापित बिजली क्षमता का 50% से अधिक हिस्सा गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से हासिल कर लिया है।
भारत ग्रीन हाइड्रोजन , कोयला गैसीकरण , इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और स्मार्ट मीटर जैसी पहलों पर सक्रिय है।
खट्टर के अनुसार, ब्रिक्स देशों की पूरक क्षमताओं को मिलाकर दीर्घकालिक ऊर्जा समाधान विकसित किए जा सकते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 जून 2026 को घोषणा की कि ब्रिक्स (BRICS) की 2026 की अध्यक्षता के दौरान भारत ग्लोबल साउथ को एक सुरक्षित, लचीले, न्यायसंगत और टिकाऊ वैश्विक ऊर्जा भविष्य के केंद्र में स्थापित करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम करेगा। यह बयान उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर का एक लेख साझा करते हुए दिया।

भारत का ऊर्जा दृष्टिकोण

प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी पोस्ट में रेखांकित किया कि भारत का मानना है कि एक मजबूत ऊर्जा व्यवस्था केवल प्रभावी घरेलू नीतियों से नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुदृढ़ साझेदारी से भी निर्मित होती है। उन्होंने कहा, 'ब्रिक्स की वर्ष 2026 की अध्यक्षता संभालने जा रहे भारत की ओर से केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अपने लेख में बताया है कि भारत सुरक्षित, लचीले, समान और टिकाऊ वैश्विक ऊर्जा भविष्य के केंद्र में ग्लोबल साउथ को रखने का प्रयास करेगा।' यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार भू-राजनीतिक तनावों और जलवायु परिवर्तन की दोहरी चुनौती से जूझ रहा है।

मनोहर लाल खट्टर का विश्लेषण

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अपने लेख में कहा कि वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र तेज़ी से बदल रहा है और ऐसे में विकासशील देशों के लिए आर्थिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना एक साथ सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए आपसी सहयोग और नवाचार अपरिहार्य हो गए हैं। खट्टर ने यह भी बताया कि ब्रिक्स देशों की विविध क्षमताएँ एक-दूसरे की पूरक हैं — यदि ये देश समन्वित रूप से काम करें, तो एक सुरक्षित और दीर्घकालिक ऊर्जा व्यवस्था विकसित की जा सकती है।

भारत की ऊर्जा उपलब्धियाँ

खट्टर ने रेखांकित किया कि भारत पहले ही अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) लक्ष्य से आगे निकल चुका है — कुल स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अब गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त हो रहा है। इसके अतिरिक्त, भारत कोयला गैसीकरण, ग्रीन हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार जैसी पहलों पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है। स्मार्ट मीटर और इंडिया एनर्जी स्टैक जैसी डिजिटल तकनीकें भी देश के बिजली क्षेत्र के आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

ब्रिक्स अध्यक्षता में प्राथमिकताएँ

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान ऊर्जा उपलब्धता, स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन, नई तकनीकें और नवाचार प्रमुख एजेंडा बिंदु होंगे। खट्टर के अनुसार, इन क्षेत्रों में उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग को और गहरा किया जाएगा। गौरतलब है कि ब्रिक्स समूह में अब ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका सहित कई नए सदस्य देश शामिल हैं, जो मिलकर वैश्विक ऊर्जा माँग का एक बड़ा हिस्सा प्रतिनिधित्व करते हैं।

आगे की राह

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत ग्लोबल साउथ के हितों को वैश्विक ऊर्जा नीति-निर्माण में केंद्रीय स्थान दिलाने की कोशिश होगी। मजबूत अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के ज़रिये ब्रिक्स देश ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक समाधान विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं — यह संभावना आने वाले महीनों में ठोस नीतिगत रूपरेखाओं में तब्दील होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि 'ग्लोबल साउथ को केंद्र में रखने' का यह वादा ठोस नीतिगत प्रतिबद्धताओं में कैसे बदलता है। भारत की घरेलू ऊर्जा उपलब्धियाँ — विशेषकर 50% गैर-जीवाश्म क्षमता — उसे एक विश्वसनीय नेतृत्वकर्ता की भूमिका देती हैं, लेकिन ब्रिक्स के भीतर चीन और रूस जैसी प्रतिस्पर्धी शक्तियों के साथ सहमति बनाना जटिल कूटनीतिक चुनौती है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि ब्रिक्स का विस्तार हो चुका है और नए सदस्य देशों की ऊर्जा प्राथमिकताएँ एकरूप नहीं हैं — ऐसे में भारत की अध्यक्षता की सफलता साझा एजेंडे को परिणामों में बदलने की क्षमता पर निर्भर करेगी।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिक्स 2026 की अध्यक्षता में भारत की ऊर्जा प्राथमिकताएँ क्या हैं?
भारत ब्रिक्स 2026 अध्यक्षता के दौरान ग्लोबल साउथ को सुरक्षित, न्यायसंगत और टिकाऊ वैश्विक ऊर्जा भविष्य के केंद्र में रखने का लक्ष्य रखता है। इसमें ऊर्जा उपलब्धता, स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन, नई तकनीकें और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच नवाचार-आधारित सहयोग प्रमुख बिंदु होंगे।
PM मोदी ने ब्रिक्स ऊर्जा एजेंडे पर क्या कहा?
PM मोदी ने 27 जून 2026 को एक्स पर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर का लेख साझा करते हुए कहा कि भारत का मानना है कि मजबूत ऊर्जा व्यवस्था केवल घरेलू नीतियों से नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारी से भी बनती है। उन्होंने ग्लोबल साउथ को इस वैश्विक ऊर्जा ढाँचे का केंद्र बनाने की प्रतिबद्धता जताई।
भारत ने NDC लक्ष्य के संदर्भ में क्या उपलब्धि हासिल की है?
भारत ने अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) लक्ष्य से पहले ही कुल स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त कर लिया है। यह उपलब्धि भारत को ब्रिक्स में ऊर्जा नेतृत्व के दावे की विश्वसनीयता देती है।
मनोहर लाल खट्टर के लेख में ब्रिक्स देशों के सहयोग पर क्या कहा गया?
खट्टर ने कहा कि ब्रिक्स देशों की अलग-अलग ताकतें एक-दूसरे की पूरक हैं और यदि ये देश मिलकर काम करें तो सुरक्षित व टिकाऊ ऊर्जा व्यवस्था विकसित की जा सकती है। उन्होंने मजबूत अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को ग्लोबल साउथ के हितों की रक्षा का माध्यम बताया।
भारत ऊर्जा सुरक्षा के लिए कौन-सी प्रमुख तकनीकी पहल कर रहा है?
भारत ग्रीन हाइड्रोजन, कोयला गैसीकरण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार पर काम कर रहा है। इसके अलावा स्मार्ट मीटर और इंडिया एनर्जी स्टैक जैसी डिजिटल तकनीकें देश के बिजली क्षेत्र को आधुनिक बना रही हैं।
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