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वांग यी की PM मोदी से मुलाकात: भारत-चीन विश्वास बहाली और ग्लोबल साउथ नेतृत्व पर जोर

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वांग यी की PM मोदी से मुलाकात: भारत-चीन विश्वास बहाली और ग्लोबल साउथ नेतृत्व पर जोर

सारांश

चीनी विदेश मंत्री वांग यी की PM मोदी और NSA डोभाल से नई दिल्ली में मुलाकात — यह महज शिष्टाचार भेंट नहीं थी। गलवान के बाद से ठंडे पड़े संबंधों को पिघलाने की कोशिश में यह बैठक ब्रिक्स, ग्लोबल साउथ और सीमा प्रबंधन तीनों मोर्चों पर एक साथ आगे बढ़ने का संकेत देती है।

मुख्य बातें

चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने 24 जून 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।
वांग यी ने दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण सहमति को लागू करने की चीन की प्रतिबद्धता दोहराई।
चीन ने ब्रिक्स के घूर्णन अध्यक्ष के रूप में भारत की भूमिका के समर्थन का आश्वासन दिया।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी बैठक हुई; दोनों पक्षों ने संबंधों के धीरे-धीरे सामान्य होने की बात मानी।
वांग यी ने कहा कि भारत-चीन सीमा विवाद को व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर हावी नहीं होने देना चाहिए।
बैठक में विदेश सचिव विक्रम मिस्री और राजदूत शू फीहोंग भी उपस्थित रहे।

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने 24 जून 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और स्पष्ट किया कि बीजिंग, दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच बनी सहमति को व्यावहारिक धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है। इस बैठक को भारत-चीन संबंधों के सामान्यीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कड़ी माना जा रहा है।

मुलाकात में क्या हुआ

बैठक में विदेश सचिव विक्रम मिस्री और भारत में चीनी राजदूत शू फीहोंग सहित दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। वांग यी ने कहा कि भारत और चीन — दुनिया के दो सबसे बड़े विकासशील देश — को अपने संबंधों को केवल द्विपक्षीय नजरिए से नहीं, बल्कि दीर्घकालिक और वैश्विक दृष्टिकोण से देखना चाहिए।

उन्होंने आपसी भरोसा बढ़ाने, गलतफहमियाँ दूर करने, संवेदनशील मुद्दों को समझदारी से संभालने और पारस्परिक लाभ वाले सहयोग को गहरा करने पर जोर दिया। वांग के अनुसार, यह दोनों देशों की जनता के मूल हितों के अनुरूप है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझा अपेक्षाओं के अनुकूल भी।

ग्लोबल साउथ और ब्रिक्स पर जोर

वांग यी ने कहा कि भारत और चीन को ग्लोबल साउथ के देशों के बीच एकता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि चीन, ब्रिक्स के घूर्णन अध्यक्ष के रूप में भारत की जिम्मेदारियों का पूरा समर्थन करेगा और ब्रिक्स सहयोग को मजबूत बनाने के लिए भारत के साथ काम करने को तैयार है।

राजदूत शू फीहोंग ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस बैठक का विवरण साझा करते हुए वांग यी के हवाले से लिखा कि दोनों देशों को सहयोग के ज़रिए अपने विकास को आगे बढ़ाना चाहिए और ग्लोबल साउथ के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया को तेज करना चाहिए।

डोभाल से भी हुई अहम बातचीत

इससे पहले वांग यी ने ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी मुलाकात की। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों में हाल की प्रगति की समीक्षा की और माना कि संबंधों के सामान्यीकरण की दिशा में धीरे-धीरे प्रगति हो रही है।

डोभाल के साथ बातचीत में वांग यी ने कहा कि एक-दूसरे के मूल हितों का सम्मान जरूरी है और भारत-चीन सीमा विवाद को इस तरह प्रबंधित किया जाना चाहिए कि वह व्यापक द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित न करे। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्षों को समाज के सभी वर्गों में सही समझ विकसित करने की दिशा में काम करना चाहिए, ताकि संबंधों को बेहतर बनाने के लिए मजबूत जनसमर्थन तैयार हो सके।

संबंधों के संदर्भ में महत्व

गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब 2020 के गलवान संघर्ष के बाद से भारत-चीन संबंधों में आई खटास को पाटने के प्रयास जारी हैं। दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव घटाने के बाद यह उच्च-स्तरीय कूटनीतिक संपर्क संबंधों में एक नई लय की ओर संकेत करता है।

आने वाले महीनों में ब्रिक्स की अध्यक्षता और द्विपक्षीय सहयोग के एजेंडे पर दोनों देशों के बीच और बैठकें होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ठोस प्रतिबद्धताओं में अपेक्षाकृत सीमित। 'विश्वास बढ़ाने' और 'संवेदनशील मुद्दों को समझदारी से संभालने' जैसे वाक्यांश वही भाषा हैं जो 2020 के बाद से हर उच्च-स्तरीय बैठक में दोहराई जाती रही है — बिना किसी सत्यापन-योग्य समयसीमा या तंत्र के। असली कसौटी यह होगी कि LAC पर गश्त व्यवस्था और बफर ज़ोन को लेकर जो अनसुलझे बिंदु हैं, उन पर कोई ठोस प्रगति होती है या नहीं। ब्रिक्स और ग्लोबल साउथ की भाषा चीन के लिए रणनीतिक रूप से सुविधाजनक है — यह भारत को एक बहुपक्षीय ढाँचे में बाँधती है जहाँ द्विपक्षीय तनाव पृष्ठभूमि में चले जाते हैं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वांग यी की PM मोदी से मुलाकात का मुख्य एजेंडा क्या था?
मुलाकात में भारत-चीन के बीच आपसी विश्वास बहाली, संवेदनशील मुद्दों के समझदारीपूर्ण प्रबंधन और पारस्परिक लाभ वाले सहयोग को गहरा करने पर चर्चा हुई। साथ ही ब्रिक्स अध्यक्षता में भारत को चीन के समर्थन और ग्लोबल साउथ में संयुक्त नेतृत्व पर भी जोर दिया गया।
वांग यी और अजीत डोभाल की बैठक में क्या हुआ?
ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक के दौरान वांग यी ने NSA अजीत डोभाल से मुलाकात की। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों में हाल की प्रगति की समीक्षा की और माना कि संबंधों के सामान्यीकरण की दिशा में धीरे-धीरे प्रगति हो रही है।
चीन ने ब्रिक्स अध्यक्षता पर भारत को क्या आश्वासन दिया?
वांग यी ने स्पष्ट किया कि चीन, ब्रिक्स के घूर्णन अध्यक्ष के रूप में भारत की जिम्मेदारियों का पूरा समर्थन करेगा और ब्रिक्स सहयोग को मजबूत बनाने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार है।
भारत-चीन सीमा विवाद पर वांग यी ने क्या कहा?
वांग यी ने कहा कि सीमा विवाद को उचित स्थान पर रखना जरूरी है ताकि वह दोनों देशों के व्यापक संबंधों को प्रभावित न करे। उन्होंने एक-दूसरे के मूल हितों के सम्मान और समझदारीपूर्ण प्रबंधन पर जोर दिया।
इस बैठक का भारत-चीन संबंधों के संदर्भ में क्या महत्व है?
2020 के गलवान संघर्ष के बाद से भारत-चीन संबंधों में आई खटास के बाद यह उच्च-स्तरीय कूटनीतिक संपर्क संबंधों के सामान्यीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दोनों देश LAC पर तनाव घटाने के बाद अब व्यापक सहयोग की ओर बढ़ने के संकेत दे रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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