15 सितंबर 2026
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ब्रिक्स के बाद चीन का बड़ा बयान: भारत से संबंध बेहतर करना लक्ष्य, सहयोग की सूची और बढ़ाएंगे

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ब्रिक्स के बाद चीन का बड़ा बयान: भारत से संबंध बेहतर करना लक्ष्य, सहयोग की सूची और बढ़ाएंगे

सारांश

नई दिल्ली में ब्रिक्स के मंच पर मोदी-शी की तीन साल में तीसरी मुलाकात महज औपचारिकता नहीं थी। चीनी राजदूत का एक्स पर आया बयान साफ संकेत देता है कि बीजिंग अब सहयोग की सूची लंबी करने, व्यापार चिंताएं दूर करने और सीमा पर शांति बनाए रखने को प्राथमिकता मान रहा है।

मुख्य बातें

नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान PM मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तीन साल में तीसरी द्विपक्षीय बैठक हुई।
चीनी राजदूत शू फेइहोंग ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि चीन-भारत को साझेदार होना चाहिए — यह बैठक की सबसे महत्वपूर्ण सहमति।
दोनों देश सहयोग की सूची विस्तारित करने, आर्थिक-व्यापारिक चिंताएं संतुलित तरीके से दूर करने पर सहमत।
सीमा क्षेत्र में शांति बनाए रखने और विवादों को उचित तरीके से संभालने पर भी सहमति।
ग्लोबल साउथ में सहयोग और बहुध्रुवीय विश्व निर्माण में साझा भूमिका निभाने का संकल्प।

नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद चीन ने भारत के साथ संबंधों को नई ऊँचाई पर ले जाने का स्पष्ट संकेत दिया है। भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने 15 सितंबर 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा कि चीन, दोनों नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण सहमतियों को लागू करने और सहयोग की सूची को और विस्तृत करने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करेगा। यह बयान तीन वर्षों में मोदी-शी जिनपिंग की तीसरी द्विपक्षीय बैठक के तुरंत बाद आया है।

तीन साल में तीसरी मुलाकात, क्या बदला?

राजदूत शू फेइहोंग ने अपनी पोस्ट में लिखा कि यह मुलाकात कजान में द्विपक्षीय संबंधों को नए सिरे से शुरू करने और तियानजिन में उन्हें और मजबूत करने की दिशा में जारी प्रयासों की अगली कड़ी है। उनके अनुसार, दोनों नेताओं ने इस बात की पुष्टि की कि चीन और भारत को साझेदार होना चाहिए — यह इस बैठक की सबसे महत्वपूर्ण सहमति बताई गई। गौरतलब है कि गलवान संघर्ष के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में जो कड़वाहट आई थी, वह धीरे-धीरे कूटनीतिक संवाद की ओर लौट रही है।

सहयोग के मुख्य बिंदु

राजदूत के अनुसार, दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देशों और ग्लोबल साउथ के प्रमुख सदस्यों के रूप में, चीन और भारत को विकास पर केंद्रित रहना चाहिए। उन्होंने मैत्रीपूर्ण आदान-प्रदान, पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग को मजबूत करने और द्विपक्षीय संबंधों के बारे में जनता की धारणा में सुधार लाने पर भी सहमति जताई। साथ ही, दोनों पक्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता में एक-दूसरे का समर्थन करने और बहुध्रुवीय विश्व के निर्माण में योगदान देने पर भी एकमत हुए।

व्यापार और आर्थिक संबंध

शू फेइहोंग ने स्पष्ट किया कि दोनों पक्ष एक-दूसरे की आर्थिक और व्यापारिक चिंताओं को संतुलित तरीके से दूर करने और आर्थिक संबंधों के स्वस्थ तथा स्थिर विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह इस लिहाज से महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत लंबे समय से चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे को लेकर चिंतित रहा है, और चीनी निवेश पर कड़ी नज़र रखता आया है।

सीमा विवाद पर रुख

दोनों नेता सीमा क्षेत्र में शांति बनाए रखने और विवादों तथा मतभेदों को उचित तरीके से संभालने पर सहमत हुए। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब भारत-चीन सीमा पर स्थिति पिछले कुछ वर्षों की तुलना में अपेक्षाकृत शांत बताई जा रही है, हालांकि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर कई बिंदु अभी भी संवेदनशील बने हुए हैं। राजदूत ने लोगों के बीच आदान-प्रदान को गहरा करने और बहुपक्षीय मंचों पर निकट सहयोग बढ़ाने की भी बात कही।

आगे की दिशा

चीनी राजदूत के बयान के अनुसार, दोनों देश एक-दूसरे के विकास और पुनरुत्थान का दृढ़ता से समर्थन करते हुए क्षेत्र और उससे परे शांति व समृद्धि में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अब यह देखना होगा कि ये राजनयिक सहमतियाँ ज़मीनी स्तर पर — व्यापार, पर्यटन, वीज़ा नीति और सीमा प्रबंधन में — किस रफ़्तार से साकार होती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी वादों का क्रियान्वयन है। कजान से तियानजिन और अब नई दिल्ली तक — हर बैठक के बाद 'साझेदारी' की बात होती है, मगर व्यापार घाटा, वीज़ा बाधाएं और LAC की संवेदनशीलता जस की तस बनी रहती हैं। 'सहयोग की सूची लंबी करने' का वादा तब तक अधूरा है जब तक चीनी निवेश और भारतीय निर्यात पहुंच पर ठोस कदम नहीं उठते। ग्लोबल साउथ की साझा पहचान और बहुध्रुवीय विश्व की वकालत आकर्षक है, पर भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि यह साझेदारी रणनीतिक स्वायत्तता की कीमत पर न आए।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात में क्या तय हुआ?
नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान PM मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें सबसे बड़ी सहमति यह रही कि चीन और भारत को साझेदार होना चाहिए। दोनों नेता सहयोग बढ़ाने, व्यापारिक चिंताएं दूर करने और सीमा पर शांति बनाए रखने पर सहमत हुए।
चीनी राजदूत शू फेइहोंग ने भारत-चीन संबंधों पर क्या कहा?
भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि चीन, दोनों नेताओं के बीच बनी सहमतियों को लागू करने, सहयोग की सूची विस्तारित करने और लोगों के बीच आदान-प्रदान गहरा करने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करेगा। उन्होंने एक-दूसरे के विकास का समर्थन करने की भी बात कही।
तीन साल में यह मोदी-शी की कौन सी बैठक थी और पहले कहाँ हुई थीं?
15 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में हुई बैठक तीन वर्षों में तीसरी द्विपक्षीय मुलाकात थी। इससे पहले कजान में द्विपक्षीय संबंधों को नए सिरे से शुरू किया गया था और तियानजिन में उन्हें और आगे बढ़ाया गया था।
भारत-चीन सीमा विवाद पर इस बैठक में क्या सहमति बनी?
दोनों नेता सीमा क्षेत्र में शांति बनाए रखने और विवादों तथा मतभेदों को उचित तरीके से संभालने पर सहमत हुए। हालांकि, वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर किसी विशिष्ट हल की घोषणा नहीं की गई।
ब्रिक्स और ग्लोबल साउथ के संदर्भ में भारत-चीन सहयोग का क्या मतलब है?
दोनों देश ब्रिक्स की अध्यक्षता में एक-दूसरे का समर्थन करने, ग्लोबल साउथ में सहयोग बढ़ाने और बहुध्रुवीय विश्व के निर्माण में योगदान देने पर सहमत हुए। इसका अर्थ है कि दोनों देश अमेरिका-केंद्रित एकध्रुवीय व्यवस्था के विकल्प के रूप में मिलकर काम करने की मंशा रखते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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