मसूद अजहर पर पाकिस्तानी इनाम को भारत ने 'खोखला ढोंग' बताया, MEA बोला — कार्रवाई करो, दिखावा नहीं
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 15 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित मीडिया ब्रीफिंग में पाकिस्तान के उस कदम को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के सरगना और संयुक्त राष्ट्र-घोषित वैश्विक आतंकवादी मसूद अजहर की गिरफ्तारी में सहायक जानकारी के बदले इनाम की राशि बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपए की गई है। भारत ने इस घोषणा को एक और 'खोखला ढोंग' करार दिया और साफ कहा कि इस्लामाबाद को बयानों की जगह ठोस कार्रवाई करनी चाहिए।
भारत की सीधी और कड़ी प्रतिक्रिया
प्रवक्ता जायसवाल ने कहा, 'पाकिस्तान की ऐसी चालें और लोगों को गुमराह करने की कोशिश कोई नई बात नहीं हैं। हमने पहले भी ऐसी चालें देखी हैं। हम सब जानते हैं कि इसमें कोई दम नहीं है। उन्हें कार्रवाई करनी चाहिए, न कि ऐसे झूठे ऐलान करने चाहिए, जिनका कोई मतलब नहीं है।'
यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंध पहले से ही गहरे तनाव में हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस्लामाबाद पर आतंकी वित्तपोषण के मामले में नज़र बनाए हुए है।
पाकिस्तान का दावा और उसका खंडन
पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने अपनी नई 'रेड बुक' में मसूद अजहर के साथ-साथ 26/11 मुंबई हमलों से जुड़े 19 अन्य आतंकवादियों के नाम भी दर्ज किए हैं। FIA का दावा है कि अजहर अफगानिस्तान में छिपा हुआ है।
हालाँकि, अफगान तालिबान इस दावे को कई बार नकार चुका है। भारतीय खुफिया अधिकारियों का लगातार यह कहना रहा है कि अजहर पाकिस्तान की ज़मीन पर ही मौजूद है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बिगड़े संबंधों के बीच ISI अजहर को अफगान क्षेत्र में स्थानांतरित करने का जोखिम नहीं उठाएगी।
FATF की नज़र से बचाव की कोशिश
सुरक्षा विश्लेषकों और जानकारों के अनुसार, इनाम की राशि बढ़ाने का असली मकसद फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) को यह दिखाना है कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ कदम उठा रहा है। आलोचकों का कहना है कि यह एक सुनियोजित 'परफॉर्मेटिव' कदम है जिसका ज़मीनी असर शून्य रहेगा।
गौरतलब है कि 2021 में भी FIA ने अजहर पर 50 लाख पाकिस्तानी रुपए के इनाम की घोषणा की थी, तब भी पाकिस्तान का यही रुख था कि वह उसकी ज़मीन पर नहीं है। उस घोषणा के बाद JeM या अजहर के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
जैश की बदलती रणनीति और भारत पर असर
पुलवामा आतंकी हमले का मास्टरमाइंड माने जाने वाले अजहर की निगरानी में JeM ने जम्मू-कश्मीर में अपनी रणनीति बदली है। संगठन ने अब हाइब्रिड वारफेयर और प्रॉक्सी फ्रंट का सहारा लेना शुरू किया है।
FATF की नज़र से बचने के लिए JeM ने 'पीपल्स एंटी-फासिस्ट फ्रंट (PAFF)' जैसे प्रॉक्सी संगठन खड़े किए हैं, जिन्होंने पुंछ और राजौरी के घने जंगलों में भारतीय सुरक्षा बलों पर घातक हमलों की जिम्मेदारी ली है।
आगे क्या होगा
भारतीय अधिकारियों का मानना है कि पाकिस्तान का फोकस अजहर को सुरक्षित रखना और उसे अंतरराष्ट्रीय जाँच से दूर रखना है। जब तक इस्लामाबाद जैश-ए-मोहम्मद के नेटवर्क के खिलाफ सत्यापन-योग्य कार्रवाई नहीं करता, भारत ऐसी हर घोषणा को 'दिखावे की राजनीति' के रूप में खारिज करता रहेगा।