कराची हमले में भारत पर आरोप: विदेश मंत्रालय ने किया खंडन, पाकिस्तान से कहा — खुद के आतंकी ढांचे पर करे कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
भारत के विदेश मंत्रालय ने 28 जून 2025 को कराची में पाकिस्तान रेंजर्स के कैंप पर हुए आतंकी हमले को लेकर पाकिस्तान द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान को दूसरों पर उंगली उठाने के बजाय अपनी जमीन पर पनप रहे आतंकी ढांचे के खिलाफ ठोस कार्रवाई करनी चाहिए।
मुख्य घटनाक्रम
कराची के गुलिस्तान-ए-जौहर इलाके में स्थित पाकिस्तान रेंजर्स (सिंध) के कैंप पर हुए इस आतंकी हमले में तीन सुरक्षाकर्मी मारे गए। जवाबी कार्रवाई में तीन हथियारबंद हमलावर भी ढेर हो गए, जबकि एक घायल हमलावर को हिरासत में ले लिया गया। पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) ने रविवार को जारी बयान में दावा किया कि हमलावरों ने पहले कैंप के मुख्य द्वार पर विस्फोट किया और फिर परिसर में घुसने की कोशिश की।
भारत की प्रतिक्रिया
मीडिया के सवालों के जवाब में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'हमने कराची में हाल ही में हुई घटना को लेकर भारत के खिलाफ लगाए गए पाकिस्तान के आरोपों वाली रिपोर्टें देखी हैं। हम इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हैं।' उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान को 'अपनी जमीन पर मौजूद आतंकवादी ढांचे के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कार्रवाई करनी चाहिए और आतंकवाद को राज्य की नीति के एक साधन के रूप में इस्तेमाल करने की अपनी प्रवृत्ति को समाप्त करना चाहिए।'
हमले के पीछे कौन
ISPR के अनुसार, यह हमला जमात-उल-अहरार से जुड़े आतंकियों ने किया। जमात-उल-अहरार, प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से अलग हुआ एक गुट है, जो पाकिस्तान के सुरक्षाबलों पर अनेक हमलों की जिम्मेदारी ले चुका है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पहले से ही अपने उत्तर-पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्रों में TTP की बढ़ती गतिविधियों से जूझ रहा है।
भारत-पाकिस्तान तनाव का संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं। आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान की यह रणनीति — घरेलू आतंकी हमलों के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराना — नई नहीं है और इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय ध्यान भटकाना है। भारत ने अब तक ऐसे हर आरोप को सिरे से नकारा है।
आगे क्या
भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मुद्दे पर अपना पक्ष अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी रखेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पाकिस्तान अपनी जमीन से संचालित आतंकी नेटवर्क के खिलाफ सत्यापन-योग्य कदम नहीं उठाता, दोनों देशों के बीच राजनयिक तनाव बना रहेगा।