14 जुलाई 2026
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पीओके विरोध प्रदर्शन: दशकों के शोषण का नतीजा, पाकिस्तान निहत्थों पर चला रहा गोलियां — भारतीय विदेश मंत्रालय

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पीओके विरोध प्रदर्शन: दशकों के शोषण का नतीजा, पाकिस्तान निहत्थों पर चला रहा गोलियां — भारतीय विदेश मंत्रालय

सारांश

पीओके में उठी जन-विद्रोह की लहर अब पाकिस्तान के लिए कूटनीतिक संकट बन गई है। भारत ने सीधे तौर पर कहा — यह गुस्सा 78 साल के शोषण का नतीजा है। JAAC का 15 जुलाई का मुजफ्फराबाद मार्च तय करेगा कि यह आंदोलन अगला मोड़ कहाँ लेता है।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 14 जुलाई 2026 को कहा कि पीओके में विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान के दशकों के शोषण का प्रत्यक्ष परिणाम हैं।
पाकिस्तान पर आरोप — महिलाओं और बच्चों पर बल प्रयोग, खाद्य व दवा आपूर्ति रोकना, इंटरनेट बंद करना और निहत्थों पर घातक बल का इस्तेमाल।
प्रदर्शनकारी नेता जावेद इकबाल ने रावलाकोट में कहा — ' 78 साल से आटे की जगह गोलियां मिली हैं।' जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने 15 जुलाई को मुजफ्फराबाद की ओर लॉन्ग मार्च का ऐलान किया।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान को मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जवाबदेह ठहराने की माँग की।

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने 14 जुलाई 2026 को स्पष्ट रूप से कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में उभरा जनाक्रोश पाकिस्तान की कई दशकों की शोषणकारी नीतियों का प्रत्यक्ष परिणाम है। नई दिल्ली में साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान पर निहत्थे नागरिकों के विरुद्ध घातक बल प्रयोग का आरोप लगाया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से जवाबदेही सुनिश्चित करने की माँग की।

मुख्य घटनाक्रम

रणधीर जायसवाल ने कहा, 'पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में चल रहे विरोध प्रदर्शन, पाकिस्तान की ओर से कई दशकों से किए जा रहे शोषण, लोगों के बुनियादी अधिकारों से उन्हें वंचित रखने और उस इलाके पर गैरकानूनी कब्जा करके चलाए जा रहे प्रशासन का सीधा नतीजा हैं।' उन्होंने आगे कहा कि स्थानीय लोगों की जायज शिकायतों को सुनने के बजाय पाकिस्तान ने महिलाओं और बच्चों सहित प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक पुलिस बल का इस्तेमाल किया है।

पाकिस्तान पर गंभीर आरोप

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि पाकिस्तानी प्रशासन ने खाद्य सामग्री और दवाइयों जैसी आवश्यक आपूर्ति बाधित की, इंटरनेट सेवाएँ बंद कर दीं और निहत्थे नागरिकों पर जानलेवा बल का प्रयोग किया, जिससे कई लोगों की मृत्यु हुई। उन्होंने कहा, 'हमें उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को इन गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों और गलत कामों के लिए पूरी तरह जवाबदेह ठहराएगा।'

पीओके में आंदोलन की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि पिछले कई हफ्तों से पीओके में हजारों लोग सड़कों पर उतरे हुए हैं। शुरुआत में यह आंदोलन बिजली, पानी और आटे जैसी बुनियादी सुविधाओं की माँग तक सीमित था, लेकिन अब यह पाकिस्तान के दीर्घकालिक नियंत्रण को खुली चुनौती देने वाले व्यापक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है।

प्रदर्शनकारी नेताओं की आवाज़

हाल ही में रावलाकोट में एक सभा को संबोधित करते हुए प्रदर्शनकारी नेता जावेद इकबाल ने कहा, '78 साल से हमें 'श्रीनगर की आजादी' के नाम पर ठगा गया। जब हम आटा मांगते हैं तो हमें गोलियां मिलती हैं। जब हम बिजली मांगते हैं तो गोलियां मिलती हैं। जब हम पानी मांगते हैं, तब भी गोलियां मिलती हैं।' सभा में मौजूद लोगों ने नारा लगाया, 'हर बच्चा आखिरी सांस तक लड़ेगा, लेकिन कश्मीर कभी पाकिस्तान का प्रांत नहीं बनेगा।' सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, विशेषकर महिलाएँ, दमन, बढ़े हुए करों, महंगी बिजली और मनमानी गिरफ्तारियों के विरुद्ध प्रदर्शन करती दिख रही हैं।

आगे क्या होगा

जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने 15 जुलाई को मुजफ्फराबाद की ओर एक बड़े लॉन्ग मार्च का ऐलान किया है और इलाके के सभी निवासियों से भारी संख्या में शामिल होने की अपील की है। स्थानीय नेताओं के तीखे बयानों और बढ़ते जन-दबाव के बीच यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि पाकिस्तान इस आंदोलन से कैसे निपटता है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया क्या रहती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके पीछे की रणनीति स्पष्ट है — पीओके के संकट को पाकिस्तान की आंतरिक विफलता के रूप में वैश्विक मंच पर स्थापित करना। जो बात मुख्यधारा की कवरेज अक्सर चूक जाती है, वह यह है कि JAAC का आंदोलन महज रोटी-बिजली-पानी की माँग नहीं रहा — यह पाकिस्तान की क्षेत्रीय वैधता को ही चुनौती दे रहा है, जो इस्लामाबाद के लिए कहीं अधिक असुविधाजनक है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की 'जवाबदेही' की माँग प्रतीकात्मक तो है, लेकिन ठोस दबाव तब तक नहीं बनेगा जब तक संयुक्त राष्ट्र या प्रमुख शक्तियाँ इस मुद्दे को औपचारिक एजेंडे पर नहीं लाती हैं।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीओके में विरोध प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं?
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लोग बिजली, पानी, आटे जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी, बढ़े हुए करों और मनमानी गिरफ्तारियों के विरुद्ध प्रदर्शन कर रहे हैं। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार यह आक्रोश पाकिस्तान की दशकों की शोषणकारी नीतियों का नतीजा है।
भारत ने पीओके प्रदर्शनों पर क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 14 जुलाई 2026 को कहा कि पाकिस्तान ने जायज शिकायतें सुनने के बजाय महिलाओं और बच्चों पर बल प्रयोग किया, आवश्यक आपूर्ति रोकी और निहत्थों पर घातक बल इस्तेमाल किया। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की माँग की।
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) क्या है और इसकी माँगें क्या हैं?
JAAC पीओके में सक्रिय एक प्रमुख जन-संगठन है जो बुनियादी अधिकारों और सुविधाओं की माँग को लेकर आंदोलन का नेतृत्व कर रहा है। इसने 15 जुलाई को मुजफ्फराबाद की ओर लॉन्ग मार्च का ऐलान किया है।
पाकिस्तान ने पीओके में क्या कदम उठाए हैं?
रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तानी प्रशासन ने इंटरनेट सेवाएँ बंद कीं, खाद्य व दवा आपूर्ति बाधित की और प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया, जिससे कई लोगों की मृत्यु हुई। इन कदमों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हो रही है।
पीओके के प्रदर्शनों का भारत-पाकिस्तान संबंधों पर क्या असर पड़ सकता है?
भारत ने इस मुद्दे को वैश्विक मंच पर उठाकर पाकिस्तान की क्षेत्रीय वैधता पर सवाल खड़े किए हैं। आंदोलन के बढ़ते दायरे और JAAC के लॉन्ग मार्च के मद्देनजर यह विवाद आने वाले दिनों में कूटनीतिक तनाव को और गहरा कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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