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पीओके में पुलिस बर्बरता छिपाने को पाकिस्तान फैला रहा फर्जी खबरें: विदेश मंत्रालय

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पीओके में पुलिस बर्बरता छिपाने को पाकिस्तान फैला रहा फर्जी खबरें: विदेश मंत्रालय

सारांश

पीओके में जेएएसी प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़पों में 12 की मौत के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान को घेरा — आरोप है कि इस्लामाबाद फर्जी खबरों और वीडियो के ज़रिए अपनी क्रूर कार्रवाई पर पर्दा डाल रहा है। इंटरनेट बंद, आंदोलन चार शहरों तक फैला।

मुख्य बातें

एमईए प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 9 जून को पाकिस्तान पर पीओके में मानवाधिकार उल्लंघन छिपाने के लिए फर्जी खबरें फैलाने का आरोप लगाया।
रावलकोट में झड़पों में 12 लोगों की मौत — 8 प्रदर्शनकारी और 4 सुरक्षाकर्मी ।
पीओके सरकार ने जेएएसी को आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित घोषित किया।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार 5 जून की रात से पूरे पीओके में इंटरनेट सेवाएं बंद ।
आंदोलन मुजफ्फराबाद, मीरपुर, टाटा पानी और पलंदरी तक फैला।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की अपील की।

विदेश मंत्रालय (एमईए) ने मंगलवार, 9 जून को पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में प्रदर्शनकारियों पर हो रही क्रूर कार्रवाई और मानवाधिकार उल्लंघनों से दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए जानबूझकर फर्जी खबरें और भ्रामक वीडियो प्रसारित कर रहा है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान को इन कृत्यों के लिए जवाबदेह ठहराने की अपील की है।

विदेश मंत्रालय का बयान

साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में एमईए के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'हम लगातार पाकिस्तान से फर्जी खबरें और वीडियो आते हुए देख रहे हैं। यह पाकिस्तान की अपनी नाकामियों को छिपाने और मानवाधिकारों के उल्लंघन से ध्यान हटाने की एक हताश कोशिश है।' उन्होंने आगे कहा कि पीओके में पुलिस बर्बरता की खबरें सामने आई हैं, जिनमें कई लोगों की मौत हुई है और अनेक अन्य घायल हुए हैं। जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत को उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को उसके गलत कामों और अत्याचारों के लिए जवाबदेह ठहराएगा।

रावलकोट में हिंसा: 12 की मौत

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पीओके के रावलकोट शहर में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के सदस्यों और कानून-व्यवस्था बलों के बीच हुई झड़पों में 12 लोगों की मौत हो गई है — इनमें 8 प्रदर्शनकारी और 4 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। स्थानीय प्रशासन ने यह भी पुष्टि की है कि कई सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं। पाकिस्तान के प्रमुख अखबार 'द न्यूज इंटरनेशनल' के मुताबिक, घटना के बाद पूरे पीओके में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी गई है।

जेएएसी पर प्रतिबंध और इंटरनेट बंद

ये झड़पें उस समय हुईं जब पीओके सरकार ने 9 जून को प्रस्तावित प्रदर्शन से ठीक पहले जेएएसी को आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया था। 'यूरोपियन टाइम्स' ने स्थानीय कार्यकर्ताओं के हवाले से बताया कि इस प्रतिबंध और प्रस्तावित लॉन्ग मार्च से पहले सुरक्षा उपाय बढ़ाए जाने के बाद तनाव और अधिक बढ़ गया। प्रदर्शनकारी नेताओं का आरोप है कि 5 जून की रात से पूरे पीओके में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं, जिससे संचार बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

आंदोलन का विस्तार

रिपोर्टों के अनुसार, जेएएसी से जुड़े शाहजैब हबीब और अमजद कश्मीरी की झड़पों में मौत की खबरों के बाद लोगों का आक्रोश और बढ़ गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल का प्रयोग किया। यह आंदोलन अब रावलकोट से आगे मुजफ्फराबाद, मीरपुर, टाटा पानी और पलंदरी तक फैल चुका है, जहाँ प्रदर्शन और बंद की खबरें सामने आई हैं। पलंदरी में स्थानीय कार्यकर्ताओं ने कई प्रमुख रास्ते भी बंद कर दिए हैं।

अंतरराष्ट्रीय दबाव की माँग

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। भारत का स्पष्ट संदेश है कि पीओके में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों को वैश्विक मंचों पर नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ इस मामले पर क्या रुख अपनाती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार संदर्भ अधिक गंभीर है — पीओके में 12 मौतें, इंटरनेट शटडाउन और एक लोकप्रिय आंदोलन पर आतंकवाद-रोधी कानून का इस्तेमाल, ये सब मिलकर एक ऐसी तस्वीर बनाते हैं जिसे इस्लामाबाद अंतरराष्ट्रीय नज़रों से छिपाना चाहता है। भारत का एमईए बयान कूटनीतिक रूप से सटीक है, पर असली सवाल यह है कि क्या संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद और पश्चिमी सरकारें इस पर ठोस प्रतिक्रिया देंगी या केवल 'गहरी चिंता' व्यक्त करने तक सीमित रहेंगी। पाकिस्तान द्वारा जेएएसी जैसे नागरिक आंदोलन को आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित करना उसी दमनकारी पैटर्न को दोहराता है जो बलूचिस्तान में दशकों से देखा जा रहा है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीओके में जेएएसी कौन है और वे किस बात का विरोध कर रहे हैं?
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का एक नागरिक आंदोलन है जो स्थानीय अधिकारों और आर्थिक मुद्दों को लेकर सक्रिय है। पीओके सरकार ने 9 जून को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले इसे आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया।
रावलकोट झड़पों में कितने लोगों की मौत हुई?
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार रावलकोट में हुई झड़पों में कुल 12 लोगों की मौत हुई — जिनमें 8 प्रदर्शनकारी और 4 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। कई सुरक्षाकर्मियों के घायल होने की भी पुष्टि स्थानीय प्रशासन ने की है।
भारत के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान पर क्या आरोप लगाए?
एमईए प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान फर्जी खबरें और वीडियो फैलाकर पीओके में अपनी क्रूर कार्रवाई और मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहा है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान को इन कृत्यों के लिए जवाबदेह ठहराने की माँग की।
पीओके में इंटरनेट बंद कब से है?
प्रदर्शनकारी नेताओं के अनुसार 5 जून की रात से पूरे पीओके में इंटरनेट सेवाएं बंद हैं। इससे स्थानीय लोगों के बीच संचार बुरी तरह प्रभावित हुआ है और बाहरी दुनिया तक सूचना पहुँचाना मुश्किल हो गया है।
पीओके में विरोध प्रदर्शन किन-किन इलाकों में फैले हैं?
रावलकोट से शुरू हुआ यह आंदोलन अब मुजफ्फराबाद, मीरपुर, टाटा पानी और पलंदरी तक फैल चुका है। पलंदरी में स्थानीय कार्यकर्ताओं ने आंदोलन के समर्थन में कई प्रमुख रास्ते भी बंद कर दिए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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