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पीओके अशांति पर भारत का पाकिस्तान को करारा जवाब, आरोपों को बताया 'भ्रामक' और 'मनगढ़ंत'

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पीओके अशांति पर भारत का पाकिस्तान को करारा जवाब, आरोपों को बताया 'भ्रामक' और 'मनगढ़ंत'

सारांश

भारत ने पीओके अशांति के लिए अपने ऊपर लगे पाकिस्तानी आरोपों को 'मनगढ़ंत' बताकर पलटवार किया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, रावलाकोट में दर्जनों मौतों की जड़ें पाकिस्तान की दशकों पुरानी दमनकारी नीतियों में हैं — और अब भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से जवाबदेही की माँग कर दी है।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय ने 23 जून को पाकिस्तान के पीओके अशांति संबंधी आरोपों को 'झूठे', 'भ्रामक' और 'मनगढ़ंत' बताकर खारिज किया।
प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि ये बयान पाकिस्तान की विफलताओं और मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान भटकाने का प्रयास हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, रावलाकोट में झड़पों में दर्जनों लोगों की मौत और सैकड़ों घायल हुए हैं।
पाकिस्तान ने संयुक्त आवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) को आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित घोषित किया था।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान को मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जवाबदेह ठहराने की अपील की।

भारत के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार, 23 जून को पाकिस्तान के उन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनमें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जारी अशांति के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया गया था। मंत्रालय ने इन आरोपों को 'झूठे', 'भ्रामक' और 'मनगढ़ंत' बताते हुए कहा कि ये इस्लामाबाद की अपनी नाकामियों और मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान भटकाने की सुनियोजित कोशिश है।

भारत की आधिकारिक प्रतिक्रिया

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के आरोपों को 'पूरी तरह निराधार' करार दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'हम पाकिस्तान के इन झूठे और मनगढ़ंत आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हैं। ये बयान पाकिस्तान की विफलताओं और मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान भटकाने का प्रयास हैं।'

गौरतलब है कि जायसवाल ने इससे पहले 9 जून को भी कहा था कि पाकिस्तान फर्जी खबरों और वीडियो के जरिए अपनी कमियों को छिपाने की कोशिश कर रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब पीओके में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं।

पीओके में अशांति की जड़ें

प्रवक्ता जायसवाल के अनुसार, पीओके में जारी विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान की दशकों पुरानी दमनकारी नीतियों का परिणाम है। इनमें आर्थिक शोषण, मौलिक अधिकारों से वंचित रखना और प्रशासनिक दमन प्रमुख कारण बताए गए हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, रावलाकोट क्षेत्र में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में दर्जनों लोगों की मौत और सैकड़ों के घायल होने की खबर है। यह तनाव तब और बढ़ा जब पाकिस्तानी प्रशासन ने संयुक्त आवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) को आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित किया।

पाकिस्तान के दमनकारी कदम

भारतीय विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने हालात नियंत्रित करने के लिए पुलिस कार्रवाई, आवश्यक वस्तुओं और दवाओं की आपूर्ति पर रोक, इंटरनेट बंदी और नागरिकों पर बल प्रयोग जैसे कदम उठाए हैं, जिसके चलते कई लोगों की मौत भी हुई है।

यह पहली बार नहीं है जब पीओके में इस तरह की स्थिति उत्पन्न हुई हो। आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान वहाँ की जनता की बुनियादी माँगों को दशकों से अनसुना करता आया है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील

विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह इस स्थिति पर ध्यान दे और पाकिस्तान को उसके मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जवाबदेह ठहराए। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और प्रवासी कश्मीरी समुदाय ने भी इन घटनाओं पर गहरी चिंता जताते हुए नागरिकों पर कथित अत्याचारों की निंदा की है और अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की माँग की है।

आगे क्या होगा

भारत की यह कड़ी प्रतिक्रिया दोनों देशों के बीच पहले से तनावपूर्ण कूटनीतिक संबंधों को और जटिल बना सकती है। अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ने के साथ, पाकिस्तान पर पीओके में मानवाधिकार स्थिति को लेकर वैश्विक जवाबदेही का सामना करना पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस अपील पर कितनी गंभीरता से ध्यान देगा। पीओके में मानवाधिकार उल्लंघनों की खबरें नई नहीं हैं — दशकों से ऐसी रिपोर्टें आती रही हैं, लेकिन वैश्विक प्रतिक्रिया हमेशा सीमित रही है। रावलाकोट में दर्जनों मौतें और इंटरनेट बंदी जैसे कदम अब पहले से कहीं अधिक दस्तावेज़ीकृत हो रहे हैं, जो पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बचाव को कठिन बना सकता है। भारत की रणनीति स्पष्ट है — पाकिस्तान को रक्षात्मक स्थिति में रखना — लेकिन बिना ठोस बहुपक्षीय दबाव के यह कूटनीतिक बयानबाजी से आगे नहीं बढ़ पाएगी।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीओके में अशांति के लिए पाकिस्तान ने भारत पर क्या आरोप लगाए?
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने दावा किया कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जारी विरोध प्रदर्शनों और अशांति के पीछे भारत का हाथ है। भारत ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और मनगढ़ंत बताकर खारिज किया है।
भारत के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान को क्या जवाब दिया?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 23 जून को साप्ताहिक ब्रीफिंग में कहा कि पाकिस्तान के आरोप 'झूठे और मनगढ़ंत' हैं और ये इस्लामाबाद की अपनी विफलताओं तथा मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान भटकाने की कोशिश हैं।
पीओके के रावलाकोट में क्या हुआ?
रिपोर्टों के अनुसार, रावलाकोट क्षेत्र में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में दर्जनों लोगों की मौत और सैकड़ों के घायल होने की खबर है। यह तनाव तब बढ़ा जब पाकिस्तानी प्रशासन ने संयुक्त आवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) को आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित घोषित किया।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से क्या माँग की है?
भारत के विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह पीओके की स्थिति पर ध्यान दे और पाकिस्तान को मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जवाबदेह ठहराए। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और प्रवासी कश्मीरी समुदाय ने भी अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की माँग की है।
पीओके में अशांति की मूल वजह क्या बताई जा रही है?
भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, पीओके में जारी विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान की दशकों पुरानी दमनकारी नीतियों का नतीजा है, जिसमें आर्थिक शोषण, मौलिक अधिकारों से वंचित रखना और प्रशासनिक दमन शामिल हैं। पाकिस्तान ने हालात काबू करने के लिए इंटरनेट बंदी और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर रोक जैसे कदम भी उठाए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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