यूएनएचआरसी में भारत का पाकिस्तान पर हमला: पीओके में जून से नागरिकों की मौत, छात्र गिरफ्तारी के सबूत पेश
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में 24 सितंबर 2026 को भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में बिगड़ती मानवीय स्थिति का मुद्दा सीधे और कड़े शब्दों में उठाया। जिनेवा में भारत के स्थायी मिशन के राजनयिक क्षितिज त्यागी ने पीओके में जून 2026 से हो रही नागरिकों की मौत, इस्लामाबाद और रावलपिंडी में छात्रों की गिरफ्तारी तथा भोजन व दवाओं पर प्रतिबंध की रिपोर्टों का हवाला देते हुए परिषद का ध्यान आकर्षित किया।
भारत की कड़ी चेतावनी और मुख्य आरोप
त्यागी ने परिषद में स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान दशकों तक सीमापार आतंकवाद को प्रायोजित करने के बाद जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाने की नैतिक स्थिति में नहीं है। उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान दूसरों के इलाके पर कब्जा करने या आतंक फैलाने के बजाय, विकास पर ध्यान देकर अपने लोगों की बेहतर सेवा करेगा, क्योंकि न तो ये, और न ही काउंसिल में उसकी नौटंकी, उसकी अर्थव्यवस्था के लोन चुकाने में मदद करेगी।'
यह बयान ऐसे समय में आया जब पाकिस्तान ने एक बार फिर परिषद के सत्र में जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाने की कोशिश की। भारत ने अपना मूल रुख दोहराते हुए कहा, 'जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग था, है और हमेशा रहेगा।'
पीओके में बिगड़ते हालात: भारत के आरोप
त्यागी ने परिषद के समक्ष पीओके की स्थिति का विस्तृत ब्यौरा रखा। उनके अनुसार, जून 2026 से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में नागरिकों की मौतें हो रही हैं। इसके अलावा, इस्लामाबाद और रावलपिंडी में छात्रों को गिरफ्तार किया गया है और वहाँ की आम जनता को भोजन एवं दवाओं तक पहुँच से वंचित किया जा रहा है।
त्यागी ने तीखे शब्दों में कहा, 'अगर इस कमरे में कोई भी प्रतिनिधिमंडल इस परिषद की जाँच के हर मानदंड को पूरा करता है, तो वह पाकिस्तान है।' गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब भारत ने यूएनएचआरसी में पीओके की मानवाधिकार स्थिति को सीधे केंद्र में लाने का प्रयास किया हो, लेकिन इस बार भारतीय पक्ष ने विशिष्ट घटनाओं और समय-सीमा का उल्लेख कर अपने तर्क को और ठोस बनाया।
कश्मीरी पंडितों का संदर्भ और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
त्यागी ने 1990 में कश्मीरी पंडितों के पलायन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, 'यह 1990 में हुआ था, कश्मीरी पंडितों के साथ, जिन्हें उन आतंकवादियों ने अपने घरों से निकाल दिया था, जिन्हें पाकिस्तान ने हथियार दिए, प्रशिक्षित किया और सीमा पार भेजा। उन आतंकवादियों ने तब से हर धर्म के कश्मीरियों को मारा है, उनमें से कई मुसलमान हैं। जिस देश ने उन्हें प्रायोजित किया, वह अब इस परिषद से जाँच की माँग कर रहा है — इस परिषद से यह विडंबना छिपी नहीं रहेगी।'
यह बयान इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत ने एक बहुपक्षीय मंच पर पाकिस्तान की ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित करते हुए उसे रक्षात्मक स्थिति में डाला।
भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर भारत का पक्ष
पाकिस्तान द्वारा भारत में अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर उठाए जाने वाले सवालों का जवाब देते हुए त्यागी ने कहा कि भारत में दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादियों में से एक है, जहाँ अल्पसंख्यक वोट देते हैं, कानून बनाते हैं, सर्वोच्च न्यायालय में बैठते हैं और संस्थानों का नेतृत्व करते हैं। उन्होंने इसे पाकिस्तान की आलोचना के खिलाफ एक ठोस काउंटर के रूप में प्रस्तुत किया।
आगे की राह
यूएनएचआरसी का यह सत्र भारत-पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक तनाव का एक और अखाड़ा बन गया है। भारत की इस आक्रामक प्रस्तुति के बाद देखना होगा कि परिषद पीओके में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों पर किस तरह की प्रतिक्रिया देती है और क्या अन्य सदस्य देश भारत के उठाए मुद्दों पर ध्यान देते हैं।