पीओके में प्रदर्शनकारियों पर दमन: 32 से अधिक नागरिकों की मौत, मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तान को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में 8 से 16 जून के बीच शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तानी प्रशासन की कड़ी निंदा की है। इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन (आईएचआरएफ) के अनुसार, इस दमन में एक महिला समेत 32 से अधिक नागरिकों की मौत हुई। संगठन का कहना है कि यह कार्रवाई पीओके में मानवाधिकार उल्लंघनों के एक सुनियोजित पैटर्न का हिस्सा है।
मुख्य घटनाक्रम
पाकिस्तानी प्रशासन ने 9 जून को प्रस्तावित प्रदर्शन से ठीक पहले जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) को आतंकवाद-निरोधक कानूनों के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया। इस घोषणा के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुँच गया और बड़े पैमाने पर बल प्रयोग की खबरें सामने आईं।
आईएचआरएफ के मुताबिक, कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएँ बंद कर दी गईं, संघीय अर्धसैनिक बल तैनात किए गए और 100 से अधिक कार्यकर्ताओं व नेताओं को मनमाने ढंग से हिरासत में लिया गया। बाहरी लोगों के क्षेत्र में प्रवेश पर भी पाबंदी लगाई गई।
पत्रकार की गिरफ्तारी और सूचना-अवरोध
दमन के दौरान पत्रकार सोहराब बरकत को पाकिस्तान के प्रिवेंशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक क्राइम्स एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह कदम क्षेत्र से बाहर सूचना पहुँचने से रोकने की सुनियोजित कोशिश थी।
आईएचआरएफ ने कहा, 'किसी नागरिक संगठन को अस्पष्ट आधारों पर आतंकवादी करार देना और साथ ही पूरे क्षेत्र को बाहरी निगरानी से दूर कर देना, संगठन की स्वतंत्रता के अधिकार का गंभीर उल्लंघन है।'
एमनेस्टी इंटरनेशनल की आलोचना
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी पीओके में इंटरनेट बंदी की कड़ी निंदा की है। संगठन के अनुसार, 5 जून से लागू प्रतिबंधों के कारण क्षेत्र में सूचना का संकट पैदा हो गया है और लोगों की जरूरी सेवाओं तक पहुँच बाधित हुई है।
एमनेस्टी ने यह भी रेखांकित किया कि आवाजाही पर लगाई गई पाबंदियों से खाद्य सामग्री और दवाओं जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे लोगों के जीवन, स्वास्थ्य सेवाओं और आवाजाही के मौलिक अधिकारों पर गंभीर असर पड़ा है।
पहले की घटनाओं से जुड़ाव
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब जेएएसी के प्रदर्शनों पर इस तरह की कार्रवाई हुई हो। आईएचआरएफ ने मई 2024 और अक्टूबर 2025 में भी जेएएसी के विरोध-प्रदर्शनों पर हुई कार्रवाई का हवाला दिया, जिनमें कथित तौर पर कई लोगों की जान गई थी। आलोचकों का कहना है कि यह पीओके में असहमति की आवाज़ को व्यवस्थित रूप से दबाने की नीति का संकेत है।
मानवाधिकार संगठनों की माँगें और आगे की राह
आईएचआरएफ ने पाकिस्तान से माँग की है कि वह शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग तत्काल बंद करे, इंटरनेट सेवाएँ बहाल करे, मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए सभी लोगों को रिहा करे और जेएएसी पर लगाया गया प्रतिबंध वापस ले। साथ ही, इस दौरान हुई मौतों की स्वतंत्र जाँच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की भी माँग की गई है। एमनेस्टी ने भी संचार और आवाजाही पर लगाए गए सभी प्रतिबंध तत्काल हटाने और क्षेत्र में निर्बाध पहुँच बहाल करने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच पाकिस्तानी प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।