31 जुलाई 2026
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पीओके में 40 से अधिक मौतों पर बलूच संगठनों का आक्रोश, पाकिस्तानी दमन की अंतरराष्ट्रीय निंदा की माँग

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पीओके में 40 से अधिक मौतों पर बलूच संगठनों का आक्रोश, पाकिस्तानी दमन की अंतरराष्ट्रीय निंदा की माँग

सारांश

पीओके में तीन दिनों में 40 से अधिक मौतों और 125 तक पहुँचने की आशंका के बीच बलूच संगठनों ने पाकिस्तान की दमनकारी कार्रवाई को राज्य नीति का हिस्सा बताया। बीवाईसी, बीडब्ल्यूएफ और बीवीजे ने संयुक्त राष्ट्र से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है।

मुख्य बातें

पीओके में पिछले तीन दिनों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कथित कार्रवाई में 40 से अधिक प्रदर्शनकारी मारे गए, दर्जनों घायल।
विश्लेषकों के अनुसार, विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से कुल मृतक संख्या 125 या अधिक हो सकती है।
बलोच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने इसे पाकिस्तान की व्यापक दमनकारी राज्य नीति का हिस्सा बताया।
बलूच वुमेन फोरम की आयोजक शाली बलूच ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि जन संघर्ष को ताकत से दबाना मुमकिन नहीं।
बीवाईसी ने संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक मानवाधिकार निकायों से पीओके में तत्काल हस्तक्षेप की अपील की।
स्वतंत्र पत्रकारों और पर्यवेक्षकों की क्षेत्र तक पहुँच सीमित होने के कारण मृतकों की सटीक संख्या की पुष्टि कठिन।

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में पिछले तीन दिनों में 40 से अधिक प्रदर्शनकारियों की मौत और दर्जनों के घायल होने की खबरों के बाद कई प्रमुख बलूच मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कथित बर्बर कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। क्वेटा स्थित इन संगठनों ने 31 जुलाई को संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक मानवाधिकार निकायों से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।

मुख्य घटनाक्रम

विश्लेषकों के अनुसार, पीओके में विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से मरने वाले स्थानीय नागरिकों की संख्या 125 या उससे अधिक हो सकती है। कथित तौर पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने प्रत्यक्ष गोलीबारी, राजनीतिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और नागरिकों को निशाना बनाने जैसी कार्रवाइयाँ अंजाम दी हैं। क्षेत्र में घेराबंदी और नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंध की भी खबरें हैं।

बलोच यकजेहती कमेटी की प्रतिक्रिया

बलूच मानवाधिकार संगठन बलोच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने पीओके की स्थिति को पाकिस्तान की व्यापक दमनकारी राज्य नीति का हिस्सा बताया। संगठन ने कहा, "हम इन कार्रवाइयों को व्यापक राज्य नीति का हिस्सा मानते हैं, जिसके तहत जनता की आवाज और राजनीतिक प्रतिरोध को बलपूर्वक दबाने का प्रयास किया जाता है। राजनीतिक प्रक्रियाओं के बजाय जनता की माँगों का जवाब गोलियों, गिरफ्तारियों और दमन से देना इस बात को दर्शाता है कि पाकिस्तान राज्य असहमति को सहन करने की बजाय बल प्रयोग को प्राथमिकता देता है।"

बीवाईसी ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों, संयुक्त राष्ट्र की संबंधित संस्थाओं और वैश्विक समुदाय से पीओके में नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग, न्यायेतर कार्रवाइयों, अवैध गिरफ्तारियों और शांतिपूर्ण विरोध के मौलिक अधिकार के उल्लंघन का गंभीर संज्ञान लेने की अपील की।

बलूच महिला मंच और अन्य संगठनों का स्वर

बलूच वुमेन फोरम (बीडब्ल्यूएफ) की केंद्रीय आयोजक शाली बलूच ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "इतिहास गवाह है कि जब भी दबे-कुचले और वंचित लोग अपने हक के लिए उठे हैं तो उन्होंने हर तरह के जुल्म और हमले का सामना करने की काबिलियत भी विकसित की है। लोगों के संघर्ष को ताकत से दबाना मुमकिन नहीं है।"

बलूच वॉयस फॉर जस्टिस (बीवीजे) ने भी पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सरकारी ताकत का बिना सोचे-समझे इस्तेमाल जुल्म और अमानवीय व्यवहार का सबसे गंभीर उदाहरण है।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब पीओके में नागरिक अशांति पहले से ही चरम पर थी। कथित तौर पर क्षेत्र में संचार प्रतिबंध और घेराबंदी के कारण स्वतंत्र पत्रकारों और मानवाधिकार पर्यवेक्षकों की पहुँच बेहद सीमित है, जिससे मृतकों की सटीक संख्या की स्वतंत्र पुष्टि कठिन बनी हुई है। गौरतलब है कि बलूचिस्तान और पीओके — दोनों क्षेत्रों में पाकिस्तानी राज्य के खिलाफ असंतोष की लंबी और समानांतर कहानी रही है।

क्या होगा आगे

बलूच संगठनों ने माँग की है कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद पीओके की स्थिति पर आपात सत्र बुलाए। आलोचकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के बिना पाकिस्तान अपनी कार्रवाई जारी रखेगा। वैश्विक मानवाधिकार समुदाय की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में इस संकट की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन क्षेत्र में स्वतंत्र मीडिया की अनुपस्थिति इन आँकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि को असंभव बनाती है — यह खुद में एक बड़ी खबर है। बलूच संगठनों की आवाज़ नैतिक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन यह भी ध्यान देने योग्य है कि बलूचिस्तान में खुद इन्हीं संगठनों के सदस्य पाकिस्तानी राज्य के दमन का शिकार रहे हैं — यानी यह एकजुटता केवल राजनीतिक नहीं, अनुभव-आधारित भी है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया अब तक मंद रही है, और संयुक्त राष्ट्र की अपील का असर तभी होगा जब प्रमुख शक्तियाँ पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव डालें — जो अभी तक नहीं हुआ।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीओके में क्या हो रहा है और कितने लोग मारे गए हैं?
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जन आंदोलन के खिलाफ पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कथित कार्रवाई में पिछले तीन दिनों में 40 से अधिक प्रदर्शनकारी मारे गए हैं और दर्जनों घायल हुए हैं। विश्लेषकों के अनुसार विरोध शुरू होने के बाद से कुल मृतक संख्या 125 या उससे अधिक हो सकती है।
बलोच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने क्या माँग की है?
बीवाईसी ने संयुक्त राष्ट्र की संबंधित संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से पीओके में नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग, अवैध गिरफ्तारियों और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार के उल्लंघन का तत्काल संज्ञान लेने की अपील की है। संगठन ने इन कार्रवाइयों को पाकिस्तान की व्यापक दमनकारी राज्य नीति का हिस्सा बताया है।
शाली बलूच ने एक्स पर क्या कहा?
बलूच वुमेन फोरम (बीडब्ल्यूएफ) की केंद्रीय आयोजक शाली बलूच ने एक्स पर लिखा कि इतिहास गवाह है कि दबे-कुचले लोगों का संघर्ष हर जुल्म का सामना करने की क्षमता विकसित करता है और जन संघर्ष को ताकत से दबाना मुमकिन नहीं है।
पीओके में मृतकों की सटीक संख्या की पुष्टि क्यों नहीं हो पा रही?
कथित तौर पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने क्षेत्र में घेराबंदी और संचार प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे स्वतंत्र पत्रकारों और मानवाधिकार पर्यवेक्षकों की पहुँच बेहद सीमित हो गई है। इसी कारण मृतकों और घायलों की सटीक संख्या की स्वतंत्र पुष्टि संभव नहीं हो पा रही।
बलूच संगठन पीओके के मुद्दे पर क्यों बोल रहे हैं?
बलूच संगठनों का कहना है कि बलूचिस्तान और पीओके दोनों में पाकिस्तानी राज्य की दमनकारी नीतियाँ एक जैसी हैं। बीवाईसी के अनुसार, जन आंदोलनों को राजनीतिक संवाद की बजाय बल प्रयोग से दबाना पाकिस्तान की स्थापित राज्य नीति है, जिसका अनुभव उन्हें खुद भी है।
राष्ट्र प्रेस
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