पीओके में पाकिस्तानी बलों की कार्रवाई में 40 नागरिकों की मौत, यूकेपीएनपी ने लगाया नरसंहार का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में 27 और 28 जुलाई 2026 के बीच पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा विरोध प्रदर्शनों पर की गई कथित कार्रवाई में 40 नागरिकों की मौत और दर्जनों के घायल होने का दावा किया गया है। यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) ने 29 जुलाई को जारी बयान में इन आरोपों को सामने रखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है।
मुख्य घटनाक्रम
यूकेपीएनपी ने रिपोर्टों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि रावलाकोट, मीरपुर और आसपास के क्षेत्रों में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल का प्रयोग किया गया। संगठन के अनुसार, 5 जून 2026 से अब तक 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, सैकड़ों घायल हुए हैं और कथित तौर पर बड़ी संख्या में लोगों को जबरन लापता किया गया है।
संगठन ने कहा, 'शांतिपूर्ण नागरिकों के खिलाफ अत्यधिक या गैरकानूनी बल का प्रयोग अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का गंभीर उल्लंघन है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपराध की श्रेणी में आ सकता है।' पूरे क्षेत्र में कई दिनों से कड़ी नाकेबंदी, कर्फ्यू और संचार सेवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लागू बताया जा रहा है।
जेएएसी नेता का बयान
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेता सरदार अम्मान खान ने भी पाकिस्तानी बलों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'सिर्फ दो दिनों में पाकिस्तानी बलों ने 38 शांतिपूर्ण कश्मीरी प्रदर्शनकारियों की बेरहमी से हत्या कर दी। यह कानून लागू करना नहीं, बल्कि अपने बुनियादी अधिकारों की मांग कर रहे निहत्थे नागरिकों का नरसंहार है।'
अम्मान खान ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी प्रशासन शांतिपूर्ण आवाज़ों का जवाब घातक बल से दे रहा है। उन्होंने हिंसा तत्काल रोकने, मृतकों के परिजनों को न्याय दिलाने और स्वतंत्र जाँच कराने की माँग की।
अंतरराष्ट्रीय अपील
यूकेपीएनपी ने संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और वैश्विक मानवाधिकार संगठनों से अपील की है कि वे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें, घटनाओं की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जाँच कराएँ और पाकिस्तान को अपने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दायित्वों का पालन करने के लिए बाध्य करें। गौरतलब है कि पीओके में इस्लामाबाद के नियंत्रण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन लंबे समय से जारी हैं, लेकिन हालिया कथित दमन को आलोचक अब तक की सबसे तीखी कार्रवाई बता रहे हैं।
व्यापक संदर्भ
पीओके में जारी ये प्रदर्शन इस्लामाबाद के दशकों पुराने प्रशासनिक नियंत्रण को खुली चुनौती के रूप में देखे जा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि क्षेत्र में बिजली, आटे और अन्य बुनियादी ज़रूरतों की कमी तथा प्रशासनिक उपेक्षा ने जनाक्रोश को भड़काया है। यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय दबाव और बढ़ने की आशंका है।
आगे क्या होगा
पाकिस्तान सरकार की ओर से अब तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मानवाधिकार संगठनों ने क्षेत्र में स्वतंत्र पत्रकारों और निगरानीकर्ताओं की पहुँच सुनिश्चित करने की माँग की है। संचार प्रतिबंध के कारण ज़मीनी हालात की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी तक संभव नहीं हो पाई है।