पीओके के रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी: UKPNP ने 'नरसंहार' बताया, UN से हस्तक्षेप की माँग
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के रावलकोट क्षेत्र में 8 जून 2026 को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा की गई कथित गोलीबारी के बाद गंभीर मानवाधिकार चिंताएँ उभरी हैं। यूनाइटेड कश्मीर पीपल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) ने इस घटना को 'नरसंहार' करार देते हुए संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है।
मुख्य घटनाक्रम
UKPNP के अनुसार, रविवार रात हुई इस घटना में कई प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई और अनेक अन्य घायल हुए। स्थानीय कार्यकर्ताओं के हवाले से आई रिपोर्टों में बताया गया है कि जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JKJ AAC) के सदस्य शाहजेब हबीब और अमजद कश्मीरी की आंदोलन के दौरान मौत हो गई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने निहत्थे आंदोलनकारियों के विरुद्ध अत्यधिक बल प्रयोग किया।
संगठन ने अपने बयान में कहा, 'शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है। पाकिस्तान को निहत्थे कश्मीरियों के खिलाफ अत्याचार और दमन का यह सिलसिला तुरंत बंद करना चाहिए।'
प्रतिबंध और इंटरनेट बंदी
रिपोर्टों के अनुसार, प्रशासन ने JKJ AAC को प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया है और 9 जून को प्रस्तावित 'लॉन्ग मार्च' से पहले कई सुरक्षा उपाय लागू किए गए। आंदोलन से जुड़े नेताओं का आरोप है कि 5 जून की रात से पूरे पीओके में इंटरनेट सेवाएँ बंद कर दी गई हैं, जिससे संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। पाकिस्तानी प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
विरोध का विस्तार
रिपोर्टों के अनुसार, विरोध प्रदर्शन अब केवल रावलकोट तक सीमित नहीं रहा। मुज़फ़्फ़राबाद, मीरपुर, टाटा पानी और प्लांदरी समेत कई क्षेत्रों में प्रदर्शन और बंद का आह्वान किया गया है। प्लांदरी में प्रदर्शनकारियों द्वारा प्रमुख मार्गों को अवरुद्ध किए जाने की भी खबर है। यह ऐसे समय में आया है जब पीओके में जन-असंतोष पहले से ही बिजली और आटे की कीमतों जैसे बुनियादी मुद्दों को लेकर उबल रहा था।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
पीओके में बिगड़ते हालात को लेकर विदेशों में रहने वाले कश्मीरी समुदाय ने भी चिंता जताई है। रिपोर्टों के मुताबिक, यूनाइटेड किंगडम में एकजुटता प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर क्षेत्र में मानवाधिकारों की स्थिति का मुद्दा उठाया गया है। UKPNP ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मानवाधिकार संगठनों से पीओके की जमीनी स्थिति को दुनिया के सामने लाने की विशेष अपील की है।
आगे क्या
9 जून के प्रस्तावित लॉन्ग मार्च और बढ़ते जनाक्रोश को देखते हुए आने वाले दिन बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब पीओके में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हों — 2024 में भी इसी तरह के आंदोलन ने पाकिस्तानी प्रशासन को रियायतें देने पर मजबूर किया था। रावलकोट में जारी तनाव और व्यापक विरोध प्रदर्शनों के कारण पीओके की स्थिति क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक ध्यान आकर्षित कर सकती है।