25 जुलाई 2026
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पीओके के रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी: UKPNP ने 'नरसंहार' बताया, UN से हस्तक्षेप की माँग

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पीओके के रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी: UKPNP ने 'नरसंहार' बताया, UN से हस्तक्षेप की माँग

सारांश

पीओके के रावलकोट में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कथित गोलीबारी ने क्षेत्र को उबाल पर ला दिया है। दो कार्यकर्ताओं की मौत, इंटरनेट बंदी और 'लॉन्ग मार्च' की तैयारी के बीच UKPNP ने UN से हस्तक्षेप माँगा है — और अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ता जा रहा है।

मुख्य बातें

पीओके के रावलकोट में रविवार रात शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा कथित गोलीबारी की गई।
JKJ AAC सदस्य शाहजेब हबीब और अमजद कश्मीरी की मौत की खबर, कई अन्य घायल।
UKPNP ने घटना को 'नरसंहार' करार दिया; संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की माँग।
5 जून की रात से पूरे पीओके में इंटरनेट सेवाएँ बंद होने का आरोप; JKJ AAC को प्रतिबंधित घोषित।
विरोध मुज़फ़्फ़राबाद , मीरपुर , टाटा पानी और प्लांदरी तक फैला; 9 जून को 'लॉन्ग मार्च' प्रस्तावित।
यूके , अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में प्रवासी कश्मीरी समुदाय ने एकजुटता प्रदर्शन किए।

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के रावलकोट क्षेत्र में 8 जून 2026 को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा की गई कथित गोलीबारी के बाद गंभीर मानवाधिकार चिंताएँ उभरी हैं। यूनाइटेड कश्मीर पीपल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) ने इस घटना को 'नरसंहार' करार देते हुए संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है।

मुख्य घटनाक्रम

UKPNP के अनुसार, रविवार रात हुई इस घटना में कई प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई और अनेक अन्य घायल हुए। स्थानीय कार्यकर्ताओं के हवाले से आई रिपोर्टों में बताया गया है कि जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JKJ AAC) के सदस्य शाहजेब हबीब और अमजद कश्मीरी की आंदोलन के दौरान मौत हो गई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने निहत्थे आंदोलनकारियों के विरुद्ध अत्यधिक बल प्रयोग किया।

संगठन ने अपने बयान में कहा, 'शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है। पाकिस्तान को निहत्थे कश्मीरियों के खिलाफ अत्याचार और दमन का यह सिलसिला तुरंत बंद करना चाहिए।'

प्रतिबंध और इंटरनेट बंदी

रिपोर्टों के अनुसार, प्रशासन ने JKJ AAC को प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया है और 9 जून को प्रस्तावित 'लॉन्ग मार्च' से पहले कई सुरक्षा उपाय लागू किए गए। आंदोलन से जुड़े नेताओं का आरोप है कि 5 जून की रात से पूरे पीओके में इंटरनेट सेवाएँ बंद कर दी गई हैं, जिससे संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। पाकिस्तानी प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

विरोध का विस्तार

रिपोर्टों के अनुसार, विरोध प्रदर्शन अब केवल रावलकोट तक सीमित नहीं रहा। मुज़फ़्फ़राबाद, मीरपुर, टाटा पानी और प्लांदरी समेत कई क्षेत्रों में प्रदर्शन और बंद का आह्वान किया गया है। प्लांदरी में प्रदर्शनकारियों द्वारा प्रमुख मार्गों को अवरुद्ध किए जाने की भी खबर है। यह ऐसे समय में आया है जब पीओके में जन-असंतोष पहले से ही बिजली और आटे की कीमतों जैसे बुनियादी मुद्दों को लेकर उबल रहा था।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

पीओके में बिगड़ते हालात को लेकर विदेशों में रहने वाले कश्मीरी समुदाय ने भी चिंता जताई है। रिपोर्टों के मुताबिक, यूनाइटेड किंगडम में एकजुटता प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर क्षेत्र में मानवाधिकारों की स्थिति का मुद्दा उठाया गया है। UKPNP ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मानवाधिकार संगठनों से पीओके की जमीनी स्थिति को दुनिया के सामने लाने की विशेष अपील की है।

आगे क्या

9 जून के प्रस्तावित लॉन्ग मार्च और बढ़ते जनाक्रोश को देखते हुए आने वाले दिन बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब पीओके में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हों — 2024 में भी इसी तरह के आंदोलन ने पाकिस्तानी प्रशासन को रियायतें देने पर मजबूर किया था। रावलकोट में जारी तनाव और व्यापक विरोध प्रदर्शनों के कारण पीओके की स्थिति क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक ध्यान आकर्षित कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आटे की कीमत और स्वायत्तता की माँगें लंबे समय से अनसुनी हैं। इंटरनेट बंदी और संगठन पर प्रतिबंध जैसे कदम दमन के उन्हीं पुराने औज़ारों की याद दिलाते हैं जो 2024 के आंदोलन में भी आज़माए गए थे। चिंताजनक यह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया अब तक बयानबाज़ी तक सीमित रही है — UN में कश्मीर पर कोई बाध्यकारी तंत्र नहीं है। जब तक स्वतंत्र पत्रकारों और मानवाधिकार निकायों की जमीनी पहुँच नहीं होती, मृतकों की वास्तविक संख्या और हालात की पूरी तस्वीर अधूरी ही रहेगी।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीओके के रावलकोट में क्या हुआ?
स्थानीय कार्यकर्ताओं और UKPNP के अनुसार, रविवार रात पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने रावलकोट में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिसमें कम से कम दो लोगों — शाहजेब हबीब और अमजद कश्मीरी — की मौत हो गई और कई घायल हुए। पाकिस्तानी प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान अभी तक नहीं आया है।
UKPNP ने क्या माँगें रखी हैं?
यूनाइटेड कश्मीर पीपल्स नेशनल पार्टी ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पीओके में हस्तक्षेप कर कश्मीरी लोगों के जीवन और मौलिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग की है। संगठन ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मानवाधिकार संगठनों से जमीनी स्थिति को दुनिया के सामने लाने की भी अपील की है।
पीओके में इंटरनेट बंदी कब से है?
आंदोलन से जुड़े नेताओं के अनुसार, 5 जून की रात से पूरे पीओके में इंटरनेट सेवाएँ बंद हैं, जिससे संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। पाकिस्तानी प्रशासन ने इस आरोप की न पुष्टि की है और न खंडन किया है।
JKJ AAC क्या है और इसे क्यों प्रतिबंधित किया गया?
जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JKJ AAC) पीओके में सक्रिय एक जन-आंदोलन संगठन है जो बिजली, आटे की कीमत और प्रशासनिक सुधारों की माँग को लेकर विरोध प्रदर्शन करता रहा है। पाकिस्तानी प्रशासन ने 9 जून के प्रस्तावित लॉन्ग मार्च से पहले इसे प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया।
क्या पीओके में पहले भी ऐसे बड़े विरोध प्रदर्शन हुए हैं?
हाँ, 2024 में भी पीओके में इसी तरह के व्यापक आंदोलन हुए थे जब बिजली और आटे की कीमतों को लेकर जनाक्रोश उभरा था और पाकिस्तानी प्रशासन को कुछ रियायतें देनी पड़ी थीं। वर्तमान विरोध उसी असंतोष की निरंतरता माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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